‘आओ बहना’ में स्त्री होने का उत्सव: गीत, नृत्य और जज़्बातों के बीच टूटी रूढ़ियां

महिला दिवस की पूर्व संध्या पर गांधी भवन में ‘सरोकार’ का आयोजन, घरेलू कामगार से लेकर डॉक्टर और छात्राओं तक ने साझा किया मंच

विवेक झा, भोपाल। समाज में अक्सर कहा जाता है कि “एक औरत ही दूसरी औरत की दुश्मन होती है”, लेकिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर भोपाल के गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रम ने इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर दिया। लैंगिक समानता के लिए काम करने वाली संस्था ‘सरोकार’ ने शनिवार को एकता परिषद सभागार में “आओ बहना – महिलाओं का, महिलाओं द्वारा, महिलाओं के लिए” शीर्षक से एक आत्मीय कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें महिलाओं ने खुलकर अपनी भावनाएं, अनुभव और अभिव्यक्ति साझा की।

गीत-संगीत और नृत्य के साथ मनाया स्त्री होने का उत्सव

कार्यक्रम में करीब 30 महिलाओं ने भाग लिया। रोजमर्रा की जिम्मेदारियों और सामाजिक दबावों से अलग हटकर उन्होंने इस मंच पर अपने मन की बात कही और अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। “मन के मंजीरे आज थिरकने लगे” और “ताल से ताल मिला” जैसे गीतों की धुनों पर महिलाओं के कदम थिरक उठे। “आज फिर जीने की तमन्ना है”, “बेख़ौफ़ आज़ाद है जीना मुझे” और “तोड़-तोड़ के बंधनों को” जैसे गीतों ने माहौल को उत्साह और आत्मविश्वास से भर दिया।

कविताओं और अनुभवों में झलका संघर्ष और हौसला

इस दौरान कई महिलाओं ने अपनी स्वरचित कविताएं प्रस्तुत कीं और जीवन के अनुभव साझा किए। इन प्रस्तुतियों में स्त्री जीवन के संघर्ष, पीड़ा और साहस की झलक दिखाई दी। महिलाओं ने बताया कि जीवन की चुनौतियों ने उन्हें कमजोर नहीं बल्कि और अधिक मजबूत बनाया है।

‘Strike a Pose’ गतिविधि बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का एक खास और भावुक क्षण “Strike a Pose” गतिविधि रही। इसमें महिलाओं ने समूह बनाकर ऐसे जीवंत दृश्य प्रस्तुत किए, जिनमें वे समाज की रूढ़ियों को तोड़ती, अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती और बहनचारे की ताकत को दर्शाती नजर आईं। इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को भावुक और प्रेरित किया।

हर वर्ग की महिलाओं की भागीदारी

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों की महिलाएं शामिल हुईं। घरेलू कामगार, कॉलेज छात्राएं, डॉक्टर, शिक्षाविद, कवयित्रियां और सामाजिक कार्यकर्ता—सभी एक ही मंच पर साथ नजर आईं।

संस्था ‘सरोकार’ की सचिव कुमुद सिंह के नेतृत्व और यशस्वी कुमुद के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में शशि सिंह, डॉ. वीणा सिन्हा, शहनाज़ खान, जेबा खान, शेहला अहमद, दीपिका सक्सेना, सोनम छतवानी, जीशा, पुष्पा सिंह, तबस्सुम फ़ारूकी, राशि श्रीवास्तव, सर्जना चतुर्वेदी, हफ़्सा फ़ारूकी, अंजली, नंदिनी, सोनम छटवानी, इनु फ़ारूकी और अनुष्का सहित कई महिलाओं ने भागीदारी निभाई।

प्रेरक कहानियों ने बढ़ाया उत्साह

कार्यक्रम में शेहला अहमद ने बाइक राइडर बनने के अपने संघर्षपूर्ण सफर को साझा किया, जिसने उपस्थित महिलाओं को प्रेरित किया। वहीं डॉ. वीणा सिन्हा ने लंबे समय बाद मंच पर गीत गाकर सभी का मन मोह लिया। नंदिनी ने नृत्य प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में रंग भर दिए।

हर महीने मिलने का लिया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने यह भी तय किया कि यह साथ सिर्फ एक दिन का नहीं रहेगा। अब वे हर महीने एक ऐसे सुरक्षित और समावेशी मंच पर मिलेंगी, जहां वे बिना किसी झिझक के अपने अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे का साथ दे सकें।

इफ़्तार और स्नेह भोज के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम का समापन सभी महिलाओं ने एक साथ बैठकर इफ़्तार और स्नेह भोज के साथ किया। एक ही दस्तरख्वान पर बैठकर भोजन करते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि जब महिलाएं एक-दूसरे का हाथ थामती हैं तो वे समाज की किसी भी रूढ़ि को चुनौती दे सकती हैं।

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