इलेक्ट्रो होम्योपैथी को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल करने की दिशा में उठे कदम : डॉ. वार्ष्णेय

भोपाल। देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल, भोपाल में बुधवार को राष्ट्रीय इलेक्ट्रो होम्योपैथी दिवस 2024 के अवसर पर एक महत्वपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें आयुष मंत्री मध्य प्रदेश शासन,  इंदर सिंह परमार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस आयोजन में केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के सलाहकार समिति के सदस्य, डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय, कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। इसके अलावा, इलेक्ट्रो होम्योपैथी परिषद मध्य प्रदेश के अध्यक्ष ओम प्रकाश जैन ने अध्यक्षता की और इस चिकित्सा पद्धति के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद ओम प्रकाश जैन ने अध्यक्षीय उद्बोधन में इलेक्ट्रो होम्योपैथी के भविष्य, सरकारी मान्यता और समर्थन के संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी के माध्यम से भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया मोड़ आया है और आने वाले समय में इसे और अधिक विस्तार दिया जाएगा।

डॉ. अजय हार्डिया द्वारा वैज्ञानिक प्रस्तुति

समारोह के दौरान डॉ. अजय हार्डिया ने अपनी प्रस्तुति में इलेक्ट्रो होम्योपैथी के क्षेत्र में किए गए शोध और विकास के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने डॉ. नन्द लाल सिन्हा के इलेक्ट्रो होम्योपैथी में अभिनव योगदान को शोधात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया। साथ ही, उन्होंने बताया कि कैसे इलेक्ट्रो होम्योपैथी कैंसर और अन्य गंभीर रोगों के उपचार में सकारात्मक परिणाम दे रही है। देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल में अधिकतर मामलों में इस पद्धति से इलाज के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जो इस चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता को सिद्ध करता है।

डॉ. हार्डिया ने यह भी सुझाव दिया कि सरकारी अस्पतालों में आधिकारिक डॉक्टरों द्वारा निदान किया जाए और इलाज इलेक्ट्रो होम्योपैथी दवाओं से किया जाए। उनका मानना था कि इस पहल से पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच संतुलन स्थापित हो सकता है।

इलेक्ट्रो होम्योपैथी को मिलनी चाहिए व्यापक मान्यता : परमार

मुख्य अतिथि इंदर सिंह परमार, आयुष मंत्री, मध्य प्रदेश शासन ने अपने संबोधन में कहा, “यह दिन इलेक्ट्रो होम्योपैथी के क्षेत्र में किए गए अद्वितीय प्रयासों और सफलता को समर्पित है। इस चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता को देख कर मैं यह कह सकता हूं कि भविष्य में इसे व्यापक मान्यता मिलनी चाहिए। मैं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन देता हूं ताकि यह चिकित्सा पद्धति देशभर में अपनी पहचान बना सके। उन्होंने आगे कहा कि सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचारों का स्वागत करती है और इलेक्ट्रो होम्योपैथी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी अस्पतालों में पायलट प्रोजेक्ट चलाने पर विचार किया जाएगा।

इलेक्ट्रो होम्योपैथी ने बचाए लाखों जीवन : डॉ. वार्ष्णेय

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने भी इस आयोजन की सराहना की और इलेक्ट्रो होम्योपैथी के संभावित लाभों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “मैं इस दिन को समर्पित करता हूं उन चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को जिन्होंने इलेक्ट्रो होम्योपैथी के माध्यम से लाखों लोगों का जीवन बचाया है। यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्ण चिकित्सा पद्धति है और इसे शोध और प्रमाणिकता के माध्यम से स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी बताया कि आयुष मंत्रालय इस पद्धति को समर्थन देने के लिए संजीदा है और वैज्ञानिक शोध और परीक्षणों के आधार पर इसे सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा।

इलेक्ट्रो होम्योपैथी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान समारोह

समारोह के दौरान डॉ. नन्द लाल सिन्हा के योगदान को याद करते हुए, उनकी जयंती पर विभिन्न चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। जिन चिकित्सकों को सम्मानित किया गया, उनमें प्रमुख थे:

डॉ. आकिल खान – जिन्होंने ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अथक मेहनत की।

डॉ. राम चंद्र चौहान – जिन्होंने इलेक्ट्रो होम्योपैथी पद्धति के माध्यम से कई जटिल रोगों का सफल उपचार किया।

डॉ. मकबूल खान – जिन्होंने इलेक्ट्रो होम्योपैथी को एक वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डॉ. मुज़फ्फर राथेर – जिन्होंने समाज में स्वास्थ्य शिक्षा के प्रसार के लिए विशेष प्रयास किए।

डॉ. रामचंद्र मौर्या – जिनकी समर्पण और नवाचारों ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी को समाज में और अधिक लोकप्रिय और प्रभावी बना दिया है।

राष्ट्रीय इलेक्ट्रो होम्योपैथी दिवस का उद्देश्य

देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीषा शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय इलेक्ट्रो होम्योपैथी दिवस का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को इस चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक करना है। यह दिन डॉ. नन्द लाल सिन्हा की जयंती पर मनाया जाता है, जो भारतीय जमीं पर इलेक्ट्रो होम्योपैथी के विकास और विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महान चिकित्सक थे। उनके योगदान को याद करते हुए, यह दिवस इलेक्ट्रो होम्योपैथी के लाभों को समाज के सामने लाने और इसके वैज्ञानिक प्रमाणों पर जोर देने के लिए मनाया जाता है।

समारोह का समापन सभी उपस्थित विशेषज्ञों और चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल के उप निदेशक डॉ. आशीष हार्डिया ने इस दिन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, “हम सभी मिलकर इलेक्ट्रो होम्योपैथी के क्षेत्र में और अधिक शोध और विकास की दिशा में काम करेंगे, ताकि यह पद्धति सभी के लिए उपलब्ध हो सके।

इस आयोजन ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार, और सरकार के सहयोग से इस पद्धति को देशभर में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

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