“कमाल का भोपाल” अभियान से साकार हो रहा राजधानी का नया विज़न : सांसद आलोक शर्मा

हाईकोर्ट बेंच, पर्यावरण-संवेदी फ्लाईओवर और क्वांटम कैपिटल की दिशा में ठोस पहल — सांसद ने मनोज मीक से साझा किया रोडमैप

विवेक झा, भोपाल, 26 अगस्‍त। राजधानी के सांसद आलोक शर्मा ने मंगलवार को ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के संस्थापक मनोज मीक से मुलाकात कर कहा कि “नगर तभी महानगर बनते हैं जब ऐसे समर्पित बुद्धिजीवी आगे आते हैं।” सांसद ने इस अवसर पर अभियान की अब तक की उपलब्धियों की सराहना की और इसे राजधानी के भविष्य को नया आयाम देने वाला प्रयास बताया।

हाईकोर्ट बेंच और फ्लाईओवर पर प्रगति

सांसद ने जानकारी दी कि भोपाल में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने अथवा इंदौर बेंच से जोड़ने के संबंध में कानून मंत्री से सार्थक चर्चा हुई है। वहीं, यातायात सुविधा और बड़े तालाब के संरक्षण के लिए तालाब के ऊपर से पर्यावरण-संवेदी फ्लाईओवर बनाने को लेकर केंद्रीय पर्यावरण और परिवहन मंत्रालय से भी अहम विमर्श हुआ है।

सितंबर में आईटी मिनिस्टर से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात

सांसद शर्मा ने बताया कि उन्हें अगले महीने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात का समय मिला है। इस दौरान ‘कमाल का भोपाल’ अभियान का प्रतिनिधिमंडल राजधानी को क्वांटम कम्प्यूट कैपिटल बनाने संबंधी प्रस्ताव और स्मरण-पत्र सौंपेगा। साथ ही भेल की रिक्त भूमि के उपयोग और राज्य सरकार की पहल की प्रगति भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी जाएगी।

वन नेशन, वन इलेक्शन पर संवाद

सांसद ने 30 अगस्त को होने वाले ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विमर्श में क्रेडाई की कार्यकारिणी को आमंत्रित किया और राजधानी के बुद्धिजीवियों को इस विमर्श में शामिल करने का आग्रह किया।

सम्मान और उपस्थिति

बैठक के दौरान विशाल भोजपाल मेला के संयोजक विकास वीरानी, सुनील यादव, और स्पेस इन्क्यूबेशन सेंटर के कई एंटरप्रेन्योर्स मौजूद रहे। मनोज मीक ने सांसद आलोक शर्मा को राजा भोज की नवशिल्पित प्रतिमा और उनके ग्रंथ भेंट किए।

सांसद शर्मा ने कहा कि “मनोज मीक का समर्पण और ‘कमाल का भोपाल’ अभियान राजधानी की पहचान को नई दिशा देने वाला है। शहर की भविष्यदृष्टि और रचनात्मक सोच को नीतियों से जोड़ना ही सच्चा विकास है।”

‘कमाल का भोपाल’ अभियान

‘कमाल का भोपाल’ अभियान की शुरुआत मनोज मीक ने राजधानी के सर्वांगीण विकास को लेकर की थी। इसमें AI लाइटहाउस सिटी, क्लीन कंप्यूट कैपिटल, इनोवेशन बेल्ट और डेटा स्वराज्य जैसे विज़न प्रस्तावित किए गए थे। अब इनमें से कई अवधारणाएं प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं में परिलक्षित हो रही हैं।

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