चेन्नई में चमके भोपाल के नन्हे जीनियस : एसआईपी अकादमी इंटरनेशनल प्रोडिजी 2025 में अरेरा कॉलोनी व न्यू मार्केट सेंटर के 46 विद्यार्थियों को पुरस्कार
सेंट्रल इंडिया में रचा रिकॉर्ड : 49 में से 46 बच्चों ने जीते अवॉर्ड, 17 बने रनर-अप; वर्षों से प्रतिभा को निखार रहे हैं सेंटर

भोपाल। चेन्नई ट्रेड सेंटर में एसआईपी एकेडमी इंडिया द्वारा आयोजित एसआईपी इंटरनेशनल प्रोडिजी 2025 में भोपाल के अरेरा कॉलोनी एवं न्यू मार्केट सेंटर के नन्हे प्रतिभागियों ने इतिहास रच दिया। दुनियाभर से आए करीब 6000 प्रतिभागियों में से यहां के बच्चों ने शानदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
यहां से कुल 49 बच्चों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिनमें से 46 विजेता बने — यह उपलब्धि किसी भी सेंट्रल इंडिया के सेंटर द्वारा हासिल किया गया सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। यही नहीं, 17 बच्चों को रनर-अप का गौरव प्राप्त हुआ, जिससे मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ रीजन में यह सेंटर पहला बना जिसने इतनी बड़ी संख्या में रनर-अप निकाले।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों में
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फर्स्ट रनर-अप : आनिया गोयल और राजश्री विवेक राउत
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सेकंड रनर-अप : कुश माहेश्वरी, विवान बिश्नोई, दिवा मिश्रा, आरव चौधरी, केविन नोबल, नमन जैन, आराध्या ठाकुर
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थर्ड रनर-अप : गौरी मंगेश राउत, रिद्धान राज, आद्विक चौधरी, अबीर गोरावरा, आरव जैन, अतरकिक सिंह, अथर्व सोनी, ध्रुव पटेल और मयंक सेन
इसके अलावा कई बच्चों को उनके शानदार प्रदर्शन पर परफॉर्मर ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया।
वर्षों से सफलता की मिसाल
अरेरा कॉलोनी व न्यू मार्केट सेंटर को संचालित कर रहीं मिसेज अपर्णा सिंह का कहना है कि बच्चों की इस सफलता के पीछे उनकी मेहनत, निरंतर अभ्यास और शिक्षकों का समर्पण शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से यहां पढ़ने वाले बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में नाम कमा रहे हैं।
लगभग नौ प्रशिक्षित शिक्षकों की मजबूत टीम बच्चों को केंद्रित शिक्षा और अभिनव तरीकों से मानसिक गणना में दक्ष बनाती है।
20 से अधिक देशों के बच्चों ने दिखाई प्रतिभा
यह प्रतियोगिता भारत सहित मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका, इंडोनेशिया, यूएई, केन्या, तंजानिया और फिलीपींस समेत 20 से अधिक देशों के प्रतिभागियों की प्रतिभा का बड़ा मंच रही। हर प्रतिभागी ने तेज गणना, समस्या समाधान और मानसिक गणित के कौशल का दमदार प्रदर्शन किया।
एसआईपी एकेडमी बच्चों की सीखने की क्षमता को अबेकस आधारित कार्यक्रमों के जरिए बढ़ाती है। इससे बच्चों में तेज याददाश्त, बेहतर एकाग्रता और सही-तेज़ कैलकुलेशन की क्षमता विकसित होती है। नंबरों को अबेकस की मोतियों के रूप में कल्पना करने से उनके दोनों दिमागी हिस्सों का संतुलित विकास होता है, जिससे गणित एक रोमांचक सीख बन जाता है।
हर बच्चा बन सकता है प्रोडिजी
इंटरनेशनल प्रोडिजी 2025 ने एक स्पष्ट संदेश दिया—
उचित प्रशिक्षण, सही मार्गदर्शन और विश्वास मिल जाए तो हर बच्चा प्रोडिजी बन सकता है।
भोपाल के इन नन्हे प्रतिभाओं की इस शानदार उपलब्धि ने शहर का गौरव बढ़ाया और यह साबित किया कि मेहनत और सही दिशा मिल जाए तो कसौटी कोई भी ऊँची क्यों न हो — सफलता निश्चित है।





