जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी बिगुल
12 फरवरी को 25 करोड़ कामगारों की आम हड़ताल, भोपाल में मशाल जुलूस से दी चेतावनी

श्रम कोड, निजीकरण, बेरोज़गारी और महंगाई के विरोध में संयुक्त ट्रेड यूनियनों का आह्वान
विवेक झा, भोपाल, 11 फरवरी 2026।
केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ देशभर के दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों और सौ से अधिक स्वतंत्र ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल में बैंक, बीमा, बीएसएनएल, डाक, आयकर, आंगनवाड़ी, आशा, मध्यान्ह भोजन कर्मी, खेतिहर मजदूर, किसान संगठनों, पेंशनर्स और मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सहित विभिन्न क्षेत्रों के करीब 25 करोड़ कामगार, कर्मचारी और अधिकारी भाग लेंगे।

पूर्व संध्या पर भोपाल में मशाल प्रदर्शन
हड़ताल की पूर्व संध्या पर बुधवार शाम राजधानी भोपाल में इंदिरा प्रेस कॉम्प्लेक्स स्थित पंजाब नैशनल बैंक शाखा के सामने सैकड़ों मजदूर, कर्मचारी और अधिकारी एकत्रित हुए। अपने-अपने संगठनों के झंडे, बैनर और प्लेकार्ड के साथ उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए मशाल जुलूस निकाला। इसके बाद आयोजित सभा को विभिन्न श्रमिक नेताओं—वी. के. शर्मा, शिवशंकर मौर्या, प्रमोद प्रधान, पूषण भट्टाचार्य, विनोद लोगरिया, संजय मिश्रा, दीपक रत्न शर्मा, एस. सी. जैन और ओ. पी. डोंगरीवाल—ने संबोधित किया।

कॉरपोरेट समर्थक नीतियों का आरोप
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक नीतियों का लाभ केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों और उद्योगपतियों को मिल रहा है, जबकि आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और असुरक्षा से जूझ रही है। उनका कहना था कि टैक्स का बोझ आम लोगों पर बढ़ाया जा रहा है, जबकि बड़े उद्योगों को विभिन्न रियायतें दी जा रही हैं।

बेरोजगारी और महंगाई पर चिंता
सभा में कहा गया कि देश की युवा आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन रोजगार के अवसर घट रहे हैं। पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही। महंगाई पर नियंत्रण नहीं है और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। न्यूनतम वेतन तक सुनिश्चित नहीं है, जबकि ठेका प्रथा और “फिक्स टर्म जॉब” नीति से स्थायी रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं।
श्रम कोड और निजीकरण का विरोध
नेताओं ने चार नए श्रम कोड को श्रमिक अधिकारों पर हमला बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि दशकों के संघर्ष से मिले 29 श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों—विशेषकर बैंक और बीमा कंपनियों—के निजीकरण की प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों में देश की करीब ₹150 लाख करोड़ की जमा राशि सुरक्षित है, जिसे निजी हाथों में सौंपना जनहित के खिलाफ होगा।
किसानों और असंगठित क्षेत्र की समस्याएं
सभा में किसानों की स्थिति, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग और कृषि क्षेत्र में कॉरपोरेट हस्तक्षेप के मुद्दे भी उठाए गए। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, विशेषकर महिलाओं की असुरक्षित कार्य स्थितियों पर चिंता व्यक्त की गई।
12 फरवरी को भोपाल में धरना-रैली
संयुक्त मोर्चे के प्रवक्ता वी. के. शर्मा ने बताया कि 12 फरवरी को प्रातः 10:30 बजे भोपाल में पंजाब नैशनल बैंक, इंदिरा प्रेस कॉम्प्लेक्स शाखा (होशंगाबाद रोड) के सामने धरना, प्रदर्शन, रैली और सभा का आयोजन किया जाएगा।





