“जाम, अव्यवस्था और अतिक्रमण में घिरा पुराना भोपाल — काली घाट से मोती मस्जिद तक सड़कें बनी परेशानी का सबब”

सिटी कोतवाली के सामने ही खुलेआम अतिक्रमण और अवैध पार्किंग; हर दिन जाम से जूझते व्यापारी, ग्राहक और रहवासी — प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

विवेक झा, भोपाल। राजधानी भोपाल का पुराना शहर क्षेत्र, जो कभी अपनी रौनक, बाजारों की रफ्तार और धार्मिक स्थलों की पहचान के लिए जाना जाता था, आज अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और जाम की समस्या से जकड़ा हुआ है।
काली घाट श्री काली मंदिर से लेकर बुधवारा, सुल्तानिया रोड और मोती मस्जिद तक पूरे मार्ग पर सड़कें दुकानों, ठेलों और बेतरतीब खड़ी गाड़ियों से पटी पड़ी हैं। नतीजा — हर दिन घंटों का ट्रैफिक जाम और लोगों की बढ़ती परेशानी।

कोतवाली के सामने ही कानून की धज्जियाँ

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह अव्यवस्था सिटी कोतवाली और प्रशासनिक दफ्तरों के ठीक सामने जारी है। सड़क किनारे अवैध ढंग से वाहन खड़े हैं, दुकानें फुटपाथ तक फैल चुकी हैं और राहगीर व वाहन चालकों को निकलने की जगह तक नहीं बची है।
स्थानीय लोगों का कहना है —

“पुलिस चौकी और ट्रैफिक पोस्ट के पास ही नियमों का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है। कोई कार्रवाई नहीं होती। अब लगता है कानून का डर ही खत्म हो गया है।”

व्यापार पर असर, ग्राहकों का रुझान घटा

बुधवारा और मोती मस्जिद क्षेत्र पुराने भोपाल के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र रहे हैं, लेकिन अब लगातार ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था से व्यापारियों का धैर्य टूटने लगा है। ग्राहकों का आना कम हो गया है, जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है।
एक दुकानदार ने कहा —

“पहले यहां दिनभर भीड़ रहती थी, लेकिन अब लोग गाड़ी लेकर आने से कतराने लगे हैं। जाम, धूल और शोर ने पुराने बाजार की रौनक छीन ली है।”

रहवासी मजबूर होकर कर रहे पलायन

पुराने भोपाल के कई रहवासी अब नए इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं। लगातार बढ़ते शोर, प्रदूषण और ट्रैफिक से उनका रहना दूभर हो गया है।
सुल्तानिया रोड और जामा मस्जिद क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल त्योहारों या वीआईपी दौरों से पहले ही सड़कों को थोड़ी देर के लिए साफ कराता है, फिर हालात जस के तस हो जाते हैं।

अतिक्रमण और पार्किंग बनी मुख्य समस्या

  • दुकानदारों ने फुटपाथ और सड़कों तक सामान रख लिया है।

  • वाहन चालकों ने हर मोड़ पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों की अवैध पार्किंग बना रखी है।

  • ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है।

  • सड़कों की चौड़ाई घटने से एंबुलेंस और दमकल वाहनों को भी निकलने में मुश्किल होती है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह क्षेत्र आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर पड़ जाएगा।

पर्यटन और धार्मिक पहचान पर भी असर

पुराना भोपाल सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि संस्कृति, विरासत और धार्मिक आस्था का प्रतीक भी है। काली घाट, मोती मस्जिद, ताजुल मसाजिद और शहीद स्मारक जैसे स्थल हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
लेकिन लगातार बिगड़ती यातायात व्यवस्था और गंदगी ने इन क्षेत्रों की छवि धूमिल कर दी है।

“जो पर्यटक यहां आते हैं, वे दोबारा लौटना नहीं चाहते — यह हमारे लिए शर्म की बात है,”
एक स्थानीय नागरिक ने कहा।

प्रशासन की निष्क्रियता पर उठे सवाल

नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई की कमी सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है। कई बार सर्वे और अभियान की घोषणा हुई, लेकिन जमीनी असर नगण्य रहा।
स्थानीय लोग अब स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं —
फुटपाथों को खाली कराने, पार्किंग व्यवस्था सुधारने और सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

जनता की पुकार — “अब नहीं तो कभी नहीं”

लोगों का कहना है कि अगर अब भी प्रशासन ने कदम नहीं उठाए तो पुराना भोपाल इतिहास बन जाएगा — विकास नहीं।
शहर के सामाजिक संगठनों ने भी “पुराने भोपाल को बचाओ अभियान” चलाने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक सड़क या बाजार की समस्या नहीं, बल्कि भोपाल की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की जंग है।

पुराना भोपाल आज व्यवस्था के अभाव में कराह रहा है।
जहां कभी व्यापार की चहल-पहल और धार्मिक आस्था का संगम दिखाई देता था, वहां अब ट्रैफिक, अतिक्रमण और अव्यवस्था का साम्राज्य है। अब वक्त आ गया है कि प्रशासन जागे और इस ऐतिहासिक हिस्से की रौनक लौटाने के लिए निर्णायक कदम उठाए — वरना आने वाली पीढ़ियाँ इसे केवल इतिहास की किताबों में ही देख पाएंगी।

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