भोपाल में थोक दवा बाजार रात 8.30 बजे बंद करने का फरमान विवादों में

व्यापारियों ने कहा – दवाएं इमरजेंसी सेवा का हिस्सा, यह फैसला ‘तुगलकी फरमान’

बिना सर्वसम्मति के जारी किए गए आदेश को व्यापारियों ने ठुकराया, बोले- लोकहित और व्यवहारिकता की अनदेखी

भोपाल। राजधानी भोपाल में थोक दवा व्यापारियों को रात 8:30 बजे दुकानें बंद करने का फरमान जारी होते ही दवा बाजार में विरोध की लहर दौड़ गई है। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ के इस एकतरफा फैसले के खिलाफ व्यापारियों में असंतोष फैल गया है। खुद एसोसिएशन के सदस्य, थोक और रिटेल दवा व्यापारी ही नहीं, बल्कि विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने भी इसे अव्यावहारिक और ‘व्यापार विरोधी’ बताया है।

इस फैसले के तहत दुकानों को समय से पहले बंद करने और उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है। विरोध करने वाले व्यापारियों ने इसे “तुगलकी फरमान” बताया है और मांग की है कि इस पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए।


🔴 क्या है विवाद 

भोपाल के थोक दवा बाजार को अब रात 8:30 बजे के बाद बंद करने का आदेश दिया गया है।
यह निर्णय भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन द्वारा एकतरफा रूप से लिया गया है, जिसमें न व्यापारियों की राय ली गई, न ग्राहकों की सुविधा का ध्यान रखा गया। आदेश में उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई है।


📌 दवाएं सिर्फ कारोबार नहीं, इमरजेंसी सेवा भी हैं

थोक दवा बाजार से न केवल शहर बल्कि आसपास के 100 किलोमीटर के दायरे से लोग जीवन रक्षक दवाएं लेने आते हैं। कई बार मरीज को रात में अचानक जरूरत पड़ती है, और महंगी या विशेष दवाएं केवल थोक बाजार में ही उपलब्ध होती हैं।

ऐसे में दुकानें जल्दी बंद करना, एक तरह से जरूरतमंद मरीजों के सामने दीवार खड़ी करना है।


🗣️ व्यापारी बोले – फैसला न व्यापार हित में है, न लोकहित में

भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने कहा –

“सांसद महोदय भी बाजार 10 बजे तक खुले रखने की बात कर चुके हैं। ऐसे में एसोसिएशन का यह निर्णय न केवल अनावश्यक है, बल्कि व्यापार और उपभोक्ता दोनों के हित में भी नहीं है। इस मुद्दे पर मैं एसोसिएशन अध्यक्ष से बातचीत कर रहा हूं।”


📣 व्यवसाय नहीं, आदेश चलाया जा रहा है

अखिल भारतीय व्यापार उद्योग मंडल के प्रांतीय महासचिव नवनीत अग्रवाल ने कहा –

“राज्य सरकार जहां 24×7 बाजार की अवधारणा पर काम कर रही है, वहां कुछ व्यापारी संगठन उल्टी दिशा में जा रहे हैं। यह निर्णय अव्यावहारिक है, क्योंकि अधिकांश लेन-देन और हिसाब-किताब का काम रात में ही होता है।”


💬 थोक व्यापारी बोले – दवा बाजार का समय बांधना अनुचित

थोक दवा व्यापारी वीरेंद्र जैन ने कहा –

“दवाएं विलासिता की वस्तु नहीं, आपातकालीन सेवा हैं। कुछ महंगी दवाएं थोक बाजार में ही मिलती हैं। मरीज या उनके परिजन सीधे थोक दवा बाजार आते हैं। ऐसे में बाजार को रात 8.30 बजे बंद करना लोकहित के विरुद्ध है।”


💬 रिटेल व्यापारियों की परेशानी बढ़ेगी

रिटेल दवा विक्रेताओं ने भी इस आदेश का विरोध किया है। उन्होंने बताया कि कई बार मरीज की मांग पर वे थोक बाजार से ही दवाएं मंगवाते हैं।

“अगर थोक बाजार पहले ही बंद हो गया तो गंभीर स्थिति में मरीजों को दवा देना मुश्किल हो जाएगा।”


🧾 लोकहित को अनदेखा किया गया

10 नंबर मार्केट व्यापारी संघ के महासचिव हरीश चोइथानी ने कहा –

“दवा इमरजेंसी सेवा है। ऐसे में व्यापारिक सुविधा के बजाय लोकहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बाजार रात 10 बजे तक खुला रहना चाहिए।”


🧵 व्यापारी संगठनों में फूट, विरोध की लहर

भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अंदर भी इस निर्णय को लेकर असहमति दिखने लगी है। कई सदस्य इस फैसले को जल्दबाजी और मनमाना बता रहे हैं।


🧠 विशेषज्ञों का कहना – यह समय नहीं, समाधान खोजने का है

भोपाल की सामाजिक संस्थाओं और हेल्थ एक्टिविस्ट्स का कहना है कि बाजार का समय तय करने से पहले सभी पक्षों से सलाह लेना जरूरी था। व्यापार, स्वास्थ्य सेवा और प्रशासन – इन तीनों के संतुलन से ही ऐसा कोई फैसला सही ठहराया जा सकता है।


📊 सुझाव – व्यापक बैठक बुलाकर लिया जाए निर्णय

व्यापारिक संगठनों ने मांग की है कि सभी पक्षों – थोक व्यापारी, रिटेल व्यापारी, ग्राहक प्रतिनिधि और प्रशासन – को साथ लेकर एक विस्तृत बैठक की जाए और सर्वमान्य समय तय किया जाए, जिससे मरीज, व्यापारी और संगठन सभी संतुष्ट रहें।


📌 क्या कहते हैं आंकड़े?

  • भोपाल में करीब 1500 थोक और रिटेल दवा व्यापारी

  • प्रतिदिन लगभग 2 लाख लोगों को दवा की आवश्यकता

  • 30% ग्राहक रात 8 बजे के बाद आते हैं

  • 25% दवाएं केवल थोक बाजार में उपलब्ध होती हैं


निर्णय पर पुनर्विचार आवश्यक

दवाएं जीवन रक्षक हैं और इनकी आपूर्ति का समय सीमित करना न केवल आमजन के स्वास्थ्य को खतरे में डालता है बल्कि व्यापारी वर्ग में भी असंतोष फैलाता है। सभी पक्षों की राय लेकर नीतिगत और व्यवहारिक समाधान की जरूरत है।

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