जीएसटी में करदाता को शोकाज नोटिस मिलने से पहले एक सूचना पत्र देना जरूरी : गर्ग

अगर करदाता सूचना पत्र के बाद उसमें मांगी गई कर राशि जमा कर देता है तो उसके ऊपर शास्ती की कार्रवाई नहीं की जाएगी

भोपाल। टैक्‍स ला बार एसोसिएशन भोपाल द्वारा अपने सदस्यों के लिए एक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसे वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट नवनीत गर्ग ने संबोधित किया। इसमें उन्होंने जीएसटी में विभाग द्वारा करदाताओं को जारी किए जा रहे नोटिस एवं विवादों की प्रक्रिया के विषय में सदस्यों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी नोटिस को मिलने के बाद सर्वप्रथम यह देखना चाहिए कि उस नोटिस को जारी करने के लिए जो जरूरी प्रक्रिया है उसका पालन अधिकारियों द्वारा किया गया है या नहीं। जैसे कि जिस वर्ष के लिए वह जारी किया गया है उसे जारी करने की समय सीमा समाप्त तो नहीं हो गई है, उसमें डिन नंबर लिखा गया है या नहीं साथ ही वर्ष 20-21 के लिए धारा 73 के नोटिस जारी करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है वह अब जारी नहीं किया जा सकते एवं धारा 74 के अंतर्गत 18-19 के लिए यह नोटिस 30 जून तक जारी किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया की शोकाज नोटिस मिलने से पहले एक सूचना पत्र मिलना चाहिए यह सुविधा करदाता के लिए है कि अगर वह इस सूचना पत्र के बाद उसमें मांगी गई कर राशि जमा कर देता है तो उसके ऊपर शास्ती की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसलिए अगर यह सूचना पत्र के बिना ही शोकाज नोटिस जारी कर दिया गया है तो वह गलत है। इस विषय में कई न्यायालय के निर्णय भी उन्होंने बताएं। उन्होंने बताया कि कंपनियों द्वारा व्यापारियों को बिक्री के बाद ट्रेड डिस्काउंट दिया जाता है जिसके ऊपर जीएसटी की देनदारी नहीं आती है परंतु इसे अपने बही खातों में उचित स्थान पर दर्शाना चाहिए।

इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष मृदुल आर्य, उपाध्यक्ष अंकुर अग्रवाल एवं बच्चन आचार्य, सचिव मनोज पारख, कोषाध्यक्ष धीरज अग्रवाल उपस्थित थे। इस अवसर पर संस्था में सम्मिलित हुए नए सदस्यों को सदस्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

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