भोपाल में सड़क सुरक्षा को लेकर ऐतिहासिक पहल, 17 जनवरी को ‘अराइव अलाइव इंडिया रोड सेफ्टी समिट 2026’
100 से अधिक संस्थानों के प्रमुख होंगे शामिल, लक्ष्य—2026 तक ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर बीमा-पंजीकरण तक 100% नियम पालन सुनिश्चित करना
भोपाल। राजधानी भोपाल में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और ठोस पहल की शुरुआत होने जा रही है। Arrive Alive India अभियान के अंतर्गत 17 जनवरी को ‘अराइव अलाइव इंडिया रोड सेफ्टी समिट 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस समिट में शहर के करीब 100 से अधिक संस्थानों के अध्यक्ष, प्राचार्य, निदेशक और सामाजिक नेतृत्वकर्ता भाग लेकर सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन को लेकर साझा रणनीति तैयार करेंगे।
आयोजकों के अनुसार, इस समिट का प्रमुख उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि 2026 तक भोपाल में सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करना है। इसके तहत ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन बीमा, वाहन पंजीकरण और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) जैसे जरूरी पहलुओं पर विशेष फोकस किया जाएगा।
जागरूकता से आगे—नेतृत्व आधारित जवाबदेही मॉडल
समिट को Event Tree द्वारा योजनाबद्ध तरीके से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें OM AUTO HONDA का सहयोग भी प्राप्त है। आयोजकों का कहना है कि सड़क हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब जरूरत इस बात की है कि सड़क सुरक्षा को “केवल प्रचार अभियान” तक सीमित न रखा जाए, बल्कि संस्थागत नेतृत्व के माध्यम से जवाबदेही आधारित प्रणाली तैयार की जाए।
समिट में यह संदेश प्रमुख रूप से रखा जाएगा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर संस्था, हर संगठन और हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
‘रोड सेफ्टी लीडरशिप चार्टर 2026’ का होगा विमोचन
इस समिट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘रोड सेफ्टी लीडरशिप चार्टर 2026’ का विमोचन होगा। इस चार्टर के अंतर्गत विभिन्न संस्थान यह प्रतिबद्धता जताएंगे कि वे अपने स्तर पर सड़क सुरक्षा से जुड़े ठोस कदम उठाएंगे—जैसे नियमों के पालन को प्रोत्साहित करना, कर्मचारियों/छात्रों में अनुशासन विकसित करना और नियमित रूप से अनुपालन की समीक्षा करना।
आयोजकों के अनुसार, इस चार्टर से संस्थानों की भूमिका केवल सहभागी की नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के ‘लीडर’ और ‘मॉडल संस्थान’ के रूप में तय होगी।
भोपाल मॉडल बनेगा देश के लिए उदाहरण
समिट के माध्यम से यह भी लक्ष्य रखा गया है कि यदि भोपाल में यह मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है। आयोजकों ने कहा कि भोपाल में सड़क सुरक्षा नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना न केवल दुर्घटनाओं में कमी लाएगा, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के साथ शहर की व्यवस्थाओं को भी अधिक अनुशासित बनाएगा।
सामूहिक सहभागिता से सुरक्षित सड़कें
इस समिट में शिक्षा, उद्योग, सामाजिक संगठनों और नागरिक नेतृत्व की भागीदारी यह संकेत देती है कि भोपाल में सड़क सुरक्षा को लेकर अब एक संगठित और निर्णायक कदम उठाया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि नियमों का पालन, जवाबदेही और नेतृत्व आधारित पहल से सड़क हादसों में कमी लाना संभव है और भोपाल इस दिशा में एक नई शुरुआत करने जा रहा है।





