GST ट्रिब्यूनल में विभाग भी कर सकेगा द्वितीय अपील, सलाहकारों को मिली अहम जानकारी
टैक्स लॉ बार एसोसिएशन की संगोष्ठी में वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट नवनीत गर्ग ने जीएसटी ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया, अपील की समय-सीमा और शुल्क पर किया विस्तार से मार्गदर्शन

भोपाल। जीएसटी में प्रथम अपील में पारित आदेश के विरुद्ध न केवल करदाता, बल्कि विभाग भी द्वितीय अपील जीएसटी ट्रिब्यूनल में प्रस्तुत कर सकता है। यह महत्वपूर्ण जानकारी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट नवनीत गर्ग ने कर सलाहकारों और अधिवक्ताओं को दी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद अब जाकर जीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन हुआ है, जो भोपाल में स्थापित हो चुका है और शीघ्र ही नियमित सुनवाई प्रारंभ करने वाला है। इस अवसर पर उन्होंने ट्रिब्यूनल की संरचना, अपील की प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
धारा 111, 112 और 113 में अपील से जुड़े प्रावधान
नवनीत गर्ग ने बताया कि जीएसटी अधिनियम की धारा 111, 112 एवं 113 में जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील से संबंधित स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इन धाराओं के अंतर्गत प्रथम अपील में पारित आदेश के खिलाफ द्वितीय अपील दायर की जा सकती है, जिसमें विभाग को भी अपील का अधिकार प्राप्त है।
दिल्ली में मुख्य बेंच, राज्यों में 31 पीठें
उन्होंने जानकारी दी कि जीएसटी ट्रिब्यूनल की मुख्य पीठ दिल्ली में स्थित है, जबकि राज्यों में 31 पीठें गठित की गई हैं, जो देश के 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आने वाली अपीलों की सुनवाई करेंगी।
राज्य स्तरीय पीठों के आदेशों के विरुद्ध संबंधित क्षेत्र के उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी, जबकि मुख्य पीठ (दिल्ली) के आदेशों के विरुद्ध अपील सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जा सकेगी।
31 मार्च 2026 तक के आदेशों पर 30 जून तक अपील का मौका
संगोष्ठी में यह भी बताया गया कि 31 मार्च 2026 तक पारित आदेशों के विरुद्ध 30 जून 2026 तक जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील प्रस्तुत की जा सकती है। यह समय-सीमा करदाताओं और विभाग—दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
50,000 रूपये से कम वाद राशि पर अपील खारिज हो सकती है
नवनीत गर्ग ने स्पष्ट किया कि यदि वाद राशि 50,000 रूपये से कम है, तो ट्रिब्यूनल उस अपील को सुनने से इनकार कर सकता है। वहीं, अपील प्रस्तुत करने के लिए न्यूनतम 5,000 रूपये की फीस निर्धारित की गई है।
कानूनी सलाहकारों के लिए उपयोगी सत्र
संगोष्ठी को कर सलाहकारों और अधिवक्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद बढ़ी है और कर विवादों को एक स्पष्ट मंच मिलेगा।
इस अवसर पर टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृदुल आर्य, उपाध्यक्ष अंकुर अग्रवाल, सचिव मनोज पारख, सहसचिव संदीप चौहान, कोषाध्यक्ष धीरज अग्रवाल सहित वरिष्ठ सदस्य अरुण जैन, मनीष त्रिपाठी, के.के. वर्मा एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।





