जीएसटी दरें घटने के बावजूद राजस्व कम नहीं होगा, उपभोग बढ़ने से आय में होगा इज़ाफा
‘कर मंथन–2026’ राज्य स्तरीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताया— जीएसटी सुधार जरूरी, प्रक्रियात्मक बोझ से जूझ रहे व्यापारी

विवेक झा, भोपाल।
Tax Law Bar Association द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कर सेमिनार “कर मंथन–2026” में देश के प्रतिष्ठित कर विशेषज्ञों ने जीएसटी और आयकर में हालिया सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। सेमिनार में दिल्ली से आए जीएसटी विशेषज्ञ Bimal Jain ने कहा कि जीएसटी भाग-2 में सरकार द्वारा कर की दरें कम की गई हैं, लेकिन इससे सरकारी राजस्व में कमी नहीं आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर दरों में राहत से उपभोग बढ़ेगा और उसी के माध्यम से सरकार की आय भी स्वतः बढ़ेगी।

बिमल जैन ने कहा कि सरकार लगातार जीएसटी के प्रावधानों में सुधार कर रही है, फिर भी जमीनी स्तर पर कई व्यावहारिक समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में व्यापारी और कर सलाहकारों पर प्रक्रियात्मक बोझ बढ़ गया है, जिसके कारण बिना योग्य अकाउंटेंट या टैक्स एक्सपर्ट के जीएसटी अनुपालन लगभग असंभव हो गया है।
उन्होंने क्रेडिट नोट व्यवस्था में हुए बदलाव को सकारात्मक बताते हुए कहा कि पहले प्रत्येक क्रेडिट नोट को संबंधित बिक्री बिल से लिंक करना अनिवार्य था, जिससे विशेषकर तब कठिनाई आती थी जब एक क्रेडिट नोट कई बिक्री बिलों से जुड़ा होता था। अब इस अनिवार्यता को हटाया जाना व्यापारियों के लिए बड़ी राहत है।
आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े उत्साहजनक: संजय झंवर
जयपुर से पधारे वरिष्ठ अधिवक्ता Sanjay Jhanwar ने आर्थिक सर्वेक्षण और आगामी वर्षों की अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले समय में देश की विकास दर मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि हाल के रोजगार आंकड़ों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो सकारात्मक संकेत है।
उन्होंने केंद्रीय बजट में आयकर अधिनियम से जुड़े परिवर्तनों की जानकारी देते हुए कहा कि स्रोत पर कर कटौती (TDS) की दरें घटाई गई हैं, जिससे आम नागरिकों का पैसा सरकार के पास अनावश्यक रूप से फंसेगा नहीं। साथ ही सरकार को रिफंड पर ब्याज देने की जिम्मेदारी से भी राहत मिलेगी। विदेश यात्रा करने वालों पर पहले जहां 20 प्रतिशत तक टीडीएस लगता था, उसे घटाकर अब केवल 2 प्रतिशत कर दिया गया है।

कर सलाहकारों की बड़ी भागीदारी, व्यावहारिक पहलुओं पर मंथन
सेमिनार में भोपाल एवं आसपास के शहरों से बड़ी संख्या में कर सलाहकारों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष मृदुल आर्य, उपाध्यक्ष अंकुर अग्रवाल, बच्चन आचार्य, सचिव मनोज पारख, कोषाध्यक्ष धीरज अग्रवाल, सहसचिव संदीप चौहान सहित वरिष्ठ सदस्य आर.के. पारख, नरेश राजानी, राजेश्वर दयाल और भूपेश खुरपिया मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन माधवी राहतेकर एवं पलाश खुरपिया ने किया। वक्ताओं ने जीएसटी और आयकर से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया।
व्यापारियों के लिए राहत और अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
सेमिनार में विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि हालिया कर सुधारों से जहां व्यापारियों को प्रक्रियात्मक राहत मिलेगी, वहीं बढ़ता उपभोग देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। “कर मंथन–2026” ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुधारों के साथ-साथ जमीनी स्तर की चुनौतियों को समझना और उन्हें सरल बनाना अब समय की आवश्यकता है।





