25 करोड़ कामगारों की ऐतिहासिक हड़ताल से देश ठहरा

खेत-खदान से लेकर बैंक-बीमा तक कामकाज ठप, भोपाल में निकली रंगीन इंकलाबी रैली

विवेक झा, भोपाल।
केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी 2026 को आयोजित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का व्यापक असर पूरे देश में देखने को मिला। खेत, खदान, कोयला, बैंक, बीमा, डाक-तार, टेलीफोन, बीएसएनएल और केंद्रीय कार्यालयों सहित लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर देशभर में 25 करोड़ से अधिक मजदूर, कामगार, कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल हुए, जिसे संख्या के लिहाज से विश्व की सबसे बड़ी हड़तालों में से एक माना जा रहा है।

भोपाल में हजारों हड़ताली कर्मियों की “कलरफुल इंकलाबी रैली”

राजधानी भोपाल में बैंक, बीमा, केंद्रीय कार्यालय, डाक-तार, बीएसएनएल, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सहित विभिन्न संगठनों से जुड़े हजारों कामगार सुबह 11 बजे इंदिरा प्रेस कॉम्प्लेक्स स्थित पंजाब नेशनल बैंक शाखा के सामने एकत्रित हुए। हाथों में झंडे, प्ले-कार्ड और पोस्टर लिए, लाल टी-शर्ट पहने हड़ताली कर्मियों ने जोरदार नारेबाजी के साथ प्रभावी प्रदर्शन किया।

इसके बाद करीब 2000 से अधिक कर्मियों की अनुशासित रैली निकाली गई, जो दैनिक भास्कर, जागरण, नवदुनिया और नवभारत कार्यालयों से होती हुई पुनः पंजाब नेशनल बैंक शाखा के सामने पहुंचकर विशाल सभा में परिवर्तित हो गई। रैली में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जिससे आंदोलन को अतिरिक्त ऊर्जा मिली।

मजदूर विरोधी नीतियों पर तीखा हमला

सभा को संबोधित करते हुए वी. के. शर्मा, एस. एस. मोर्या, प्रमोद प्रधान, विनोद लोगरिया, नजीर कुरैशी, संजय मिश्रा, भूषण भट्टाचार्य, आर. ए. शर्मा, यशवंत पुरोहित, दीपक रत्न शर्मा, ए. परसाई, शैलेंद्र शैली, संजय कुदेशिया सहित अनेक श्रमिक नेताओं ने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियां बड़े कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में हैं, जबकि आम जनता, मजदूर और किसान लगातार संकट में जा रहे हैं।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई बेकाबू है, स्थायी नौकरियों की जगह ठेका और “फिक्स्ड टर्म रोजगार” थोपा जा रहा है तथा सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों का तेज़ी से निजीकरण किया जा रहा है।

ये हैं हड़ताल की प्रमुख मांगें

हड़ताली संगठनों ने सरकार के समक्ष 17 सूत्रीय मांग पत्र रखा, जिनमें प्रमुख हैं—

  • चारों श्रम संहिताएं (लेबर कोड) वापस ली जाएं

  • सभी मजदूरों के लिए 26,000 मासिक राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन लागू हो

  • ठेका प्रथा, आउटसोर्सिंग और फिक्स्ड टर्म रोजगार बंद किया जाए

  • सभी श्रेणियों के कामगारों को 9,000 न्यूनतम पेंशन व सामाजिक सुरक्षा मिले

  • पुरानी पेंशन योजना बहाल हो, एनपीएस/यूपीएस समाप्त किए जाएं

  • महंगाई पर नियंत्रण, आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी हटे

  • सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण रोका जाए

  • किसानों को C2+50% एमएसपी की कानूनी गारंटी मिले

  • बिजली संशोधन विधेयक वापस लिया जाए

  • मनरेगा का विस्तार और शहरी रोजगार गारंटी लागू हो

  • शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास सभी के लिए मुफ्त सुनिश्चित किए जाएं

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र भी रहा बंद

मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन के महासचिव वी. के. शर्मा ने बताया कि बैंकिंग उद्योग की यूनियनों ने भी इस हड़ताल में पूर्ण भागीदारी की, जिससे बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। वित्तीय क्षेत्र की यूनियनों ने सार्वजनिक बैंकों-बीमा कंपनियों को मजबूत करने, निजीकरण रोकने, नई भर्तियां करने, आउटसोर्सिंग बंद करने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग दोहराई।

आंदोलन और तेज करने की चेतावनी

वक्ताओं ने केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसमें आगे और राष्ट्रव्यापी हड़तालें, धरना-प्रदर्शन और बड़े जनआंदोलन शामिल होंगे।

अंत में कॉमरेड वैभव गुप्ता ने सभी संगठनों और हड़ताली साथियों का आभार व्यक्त किया।

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