नन्हे हाथों में थमाए सपने, महिला अधिकारियों ने बच्चों को दिए बैग और किताबें

महिला दिवस पर केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन की पहल; बाणगंगा बस्ती और शासकीय स्कूल शाहपुरा में बांटी अध्ययन सामग्री

विवेक झा, भोपाल। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन, भोपाल की महिला अधिकारियों ने सेवा और संवेदना का अनोखा उदाहरण पेश किया। महिला दिवस को केवल औपचारिक उत्सव तक सीमित न रखते हुए उन्होंने शहर की गरीब बस्तियों और सरकारी स्कूलों के बच्चों तक पहुंचकर उन्हें पढ़ाई से जुड़ी सामग्री वितरित की। इस पहल के तहत बच्चों को स्कूल बैग, किताबें, पानी की बोतल और अन्य शैक्षणिक सामग्री प्रदान की गई, जिससे उनके चेहरे पर मुस्कान और आंखों में नए सपने दिखाई दिए।

बाणगंगा बस्ती और शाहपुरा स्कूल में किया सामग्री वितरण

सेवा गतिविधि के अंतर्गत महिला अधिकारियों की टीम ने भोपाल की बाणगंगा गरीब बस्ती के बच्चों और शासकीय स्कूल शाहपुरा के विद्यार्थियों को बैग, किताबें और अन्य जरूरी अध्ययन सामग्री वितरित की। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के इन बच्चों के लिए यह सामग्री न केवल पढ़ाई में सहायक बनेगी, बल्कि उनके भीतर शिक्षा के प्रति उत्साह भी बढ़ाएगी।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी। जब बच्चों को नए बैग और किताबें मिलीं तो उनके चेहरों पर उमंग साफ झलक रही थी। उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि जब किसी बच्चे के हाथ में किताब आती है तो केवल पन्ने ही नहीं खुलते, बल्कि उसके सपनों और उज्ज्वल भविष्य के रास्ते भी खुल जाते हैं।

समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की पहल

इस पहल को केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव के. रवि कुमार के दूरदर्शी विज़न से प्रेरणा मिली। उनका मानना है कि महिला दिवस जैसे विशेष अवसर केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें समाज के लिए सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों से जोड़ना चाहिए।

वंचित बच्चों की मुस्कान ही सच्चा उत्सव

इस अवसर पर केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन भोपाल के वाइस प्रेसिडेंट के.के. त्रिपाठी ने कहा कि समाज के वंचित और जरूरतमंद बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सच्चा उत्सव है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर ही एक संवेदनशील और बेहतर समाज की नींव रखते हैं।

सेवा और संवेदना का संदेश

महिला अधिकारियों की इस पहल को स्थानीय लोगों और बच्चों के अभिभावकों ने भी सराहा। उनका कहना था कि इस तरह की सामाजिक पहल से बच्चों को न केवल जरूरी संसाधन मिलते हैं, बल्कि उनके मन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी पैदा होती है।

महिला दिवस के अवसर पर की गई यह पहल यह संदेश देती है कि सच्ची महिला शक्ति केवल उत्सव मनाने में नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने में है।

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