ED को मिला बड़ा पावर बूस्ट, सरकार ने बढ़ाई मैनपावर; घोटालेबाजों पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली
विपक्ष बार-बार शोर मचाता है कि ईडी को सरकार ने विपक्षी नेताओं के पीछे छोड़ रखा है. इसके बावजूद सरकार ने ऐलान कर दिया है कि जो घालमेल करेगा, वो नपेगा. सरकार ने ईडी की ताकत अचानक बढ़ा दी है. दरअसल सरकार ने ईडी में बड़े स्तर पर कैडर रिस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है.इसका सीधा मतलब है कि बड़ी संख्या में ईडी में अफसरों की तैनाती की जाएगी. यह बढ़ोतरी कोई छोटी मोटी नहीं है, बल्कि दोगुनी तीन गुनी हो गई. अब ईडी में बड़े अफसरों से लेकर जमीन पर जाकर रेड मारने वाले अधिकारियों तक, सबकी फौज बड़ी होने जा रही है।
नई व्यवस्था के तहत सबसे ज्यादा बढ़ोतरी डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एनफोर्समेंट ऑफिसर और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पदों में की गई है. सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को देखते हुए ED की क्षमता मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया गया है. यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है और इसका खर्च ED के मौजूदा बजट से ही उठाया जाएगा।
क्या होने जा रहा?
एडिशनल डायरेक्टर के पद 10 से बढ़ाकर 24 किए गए हैं।
जॉइंट डायरेक्टर के पद 28 से बढ़ाकर 49 किए गए हैं.
डिप्टी डायरेक्टर के पद 148 से बढ़ाकर 267 कर दिए गए हैं.
असिस्टेंट डायरेक्टर के पद 255 से बढ़ाकर 531 किए गए हैं.
एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 355 से बढ़ाकर 606 किए गए हैं.
असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 425 से बढ़ाकर 803 कर दिए गए हैं.
इसके अलावा ED की लीगल टीम में भी भारी मैनपावर दिया गया है. एडजुडिकेशन, सिस्टम, सिक्योरिटी और सपोर्ट स्टाफ कैडर में भी कई नए पद मंजूर किए गए हैं.
ग्राउंड फोर्स हुई डबल से भी ज्यादा!
इस आंकड़े को ध्यान से देखिए. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कहां हुई है? डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एनफोर्समेंट ऑफिसर और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पदों पर. ये वो लोग होते हैं जो सिर्फ फाइलों में साइन नहीं करते, बल्कि कोर्ट-कचहरी की दौड़ भाग संभालते हैं, मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग ढूंढते हैं, रेड मारने जाते हैं और आरोपियों से पूछताछ की कमान संभालते हैं।
इसके अलावा, बात सिर्फ अधिकारियों तक सीमित नहीं है। सरकार ने ईडी के लीगल, एडजुडिकेशन, सिस्टम, सिक्योरिटी और सपोर्ट स्टाफ कैडर कैडर में भी कई नए पद मंजूर किए हैं. यानी कि अब अगर ईडी किसी पर हाथ डालेगी, तो उसके पास कोर्ट में केस लड़ने के लिए वकीलों की फौज भी बड़ी होगी और डेटा खंगालने के लिए डिजिटल सिस्टम के उस्ताद भी ज्यादा होंगे।
लेकिन अचानक इतनी ताकत क्यों?
सरकार का इसके पीछे सिंपल तर्क है। देश में आर्थिक अपराधों का ग्राफ और डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए होने वाले हेर-फेर के मामले तेजी से बढ़े हैं. पीएमएलए और फेमा के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को देखते हुए ईडी की कार्यक्षमता को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया था. अब जब मैनपावर बढ़ गई है, तो मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा से जुड़े मामलों की जांच में और तेजी आएगी।
टाइमिंग बेहद खास
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईडी को लेकर देश में एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है. विपक्ष के तमाम नेता चाहे वो कांग्रेस के हों, आप के हों, टीएमसी के हों या आरजेडी के हमेशा यह आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से कर रही है। चुन-चुनकर विपक्षी नेताओं के घरों पर रेड मारी जाती है, उन्हें परेशान किया जाता है, ताकि विपक्ष को कमजोर किया जा सके. इन आरोपों की तपिश के बीच सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि एजेंसियां कमजोर नहीं होंगी, बल्कि उन्हें और धारदार बनाया जाएगा. राजनीति अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन आर्थिक अपराधों पर कार्रवाई अब और तेज और आक्रामक होगी।





