वेल्डिंग तकनीक में बदलाव की आहट: स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक वेल्डिंग और स्किल डेवलपमेंट पर मंथन
सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव-2026 में देशभर के विशेषज्ञ जुटे, उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर

विवेक झा, भोपाल। विनिर्माण और फैब्रिकेशन उद्योगों में तेजी से बदलती तकनीक, ऑटोमेशन और कुशल मानव संसाधन की बढ़ती जरूरतों के बीच भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित द्वितीय सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव-2026 में देशभर के विशेषज्ञों ने स्मार्ट वेल्डिंग तकनीकों, गुणवत्ता मानकों और कौशल विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में आयोजित इस कॉन्क्लेव में उद्योग, तकनीकी संस्थानों, एमएसएमई इकाइयों तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

उद्योगों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने का मंच बना कॉन्क्लेव
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सीआईआई मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग, विनिर्माण और फैब्रिकेशन क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे समय में आधुनिक वेल्डिंग तकनीकों, ऑटोमेशन और प्रशिक्षित मानव संसाधन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक औद्योगिक वातावरण में टिके रहने के लिए तकनीकी नवाचारों को अपनाना आवश्यक है और सीआईआई भविष्य में भी उद्योगों को ऐसे ज्ञानवर्धक मंच उपलब्ध कराता रहेगा।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रही कुशल वेल्डरों की मांग
कॉन्क्लेव की भूमिका प्रस्तुत करते हुए सीआईआई मध्यप्रदेश के पूर्व अध्यक्ष एवं बेंड जॉइंट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक उत्तम गांगुली ने कहा कि दुनिया भर में कुशल वेल्डरों की भारी मांग है। उन्होंने बताया कि आधारभूत संरचना, रक्षा, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और भारी विनिर्माण जैसे क्षेत्रों की सफलता काफी हद तक गुणवत्तापूर्ण वेल्डिंग पर निर्भर करती है। ऐसे आयोजनों से उद्योगों को वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है।
स्किल डेवलपमेंट से बढ़ेगी युवाओं की रोजगार क्षमता
संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क के निदेशक नीरज सहाय ने कहा कि बदलते औद्योगिक परिदृश्य में कौशल विकास सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विश्वस्तरीय प्रशिक्षण अवसंरचना विकसित कर रही है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।
जेन-ज़ेड के लिए स्मार्ट और डिजिटल हो रही वेल्डिंग
तकनीकी सत्रों में फ्रोनियस, पुणे के विशेषज्ञ अमलान साहा ने “इंटेलिजेंट वेल्डिंग टेक्नोलॉजी फॉर जेन-ज़ेड” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम और ऑटोमेशन वेल्डिंग प्रक्रियाओं को अधिक सटीक, सरल और प्रभावी बना रहे हैं। नई पीढ़ी के तकनीकी पेशेवरों के लिए यह क्षेत्र तेजी से आकर्षक बनता जा रहा है।
गुणवत्ता और भविष्य की तैयारी पर विशेष जोर
बीएचईएल भोपाल के विशेषज्ञ पल्लवित दुबे ने उद्योगों में गुणवत्ता उत्कृष्टता और भविष्य की तैयारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन करना भी आवश्यक है। गुणवत्ता आधारित उत्पादन से ही भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।
वैश्विक मानकों और निरीक्षण प्रणाली की अहम भूमिका
इंस्टीट्यूट ऑफ वेल्डिंग एंड टेस्टिंग टेक्नोलॉजी के सतीश पी. सावंत ने अपने संबोधन में वेल्डिंग स्टैंडर्ड्स, नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (एनडीटी) और लीन प्रैक्टिसेज की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण प्रणालियां किसी भी उद्योग की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
एमएसएमई को बताए लागत घटाने के उपाय
लिंकन इलेक्ट्रिक, मुंबई के आर. निपिन शंकर ने एमएसएमई इकाइयों के लिए व्यावहारिक वेल्डिंग समाधानों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से रीवर्क कम किया जा सकता है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और गुणवत्ता में सुधार आता है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।
आधुनिक वेल्डिंग इंजीनियरिंग में कौशल सबसे बड़ी जरूरत
द वेल्डिंग इंस्टीट्यूट (टीडब्ल्यूआई) इंडिया, चेन्नई के पार्थ प्रतिम ब्रह्मा ने आधुनिक वेल्डिंग इंजीनियरिंग में कौशल और अंतरराष्ट्रीय मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने होंगे।
रोबोटिक वेल्डिंग डेमो बना आकर्षण का केंद्र
कॉन्क्लेव का प्रमुख आकर्षण रोबोटिक आर्म आधारित लाइव वेल्डिंग डेमोंस्ट्रेशन रहा। प्रतिभागियों ने अत्याधुनिक रोबोटिक वेल्डिंग तकनीक को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। प्रदर्शन के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि रोबोटिक तकनीक के उपयोग से वेल्डिंग प्रक्रिया अधिक सटीक, सुरक्षित और उत्पादक बन रही है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ मानवीय त्रुटियों में भी कमी आती है।
उद्योग, शिक्षा और कौशल विकास के बीच मजबूत समन्वय की जरूरत
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि उद्योगों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों और कौशल विकास केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना समय की मांग है। इससे उद्योगों को प्रशिक्षित कार्यबल मिलेगा और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
मध्यप्रदेश को विनिर्माण हब बनाने की दिशा में पहल
कॉन्क्लेव के समापन पर सीआईआई ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे। संस्था का उद्देश्य तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और गुणवत्ता आधारित उत्पादन को बढ़ावा देकर प्रदेश के उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है।
क्या है सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव?
सीआईआई एमपी वेल्डटेक कॉन्क्लेव एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य वेल्डिंग, फैब्रिकेशन और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, विशेषज्ञों, तकनीकी संस्थानों और पेशेवरों को एक मंच पर लाना है। यहां नवीनतम तकनीकों, गुणवत्ता मानकों, कौशल विकास और उद्योग की भविष्य की आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया जाता है।





