9 साल का इंतजार खत्म, मध्यप्रदेश में GST अपीलीय न्यायाधिकरण ने शुरू की सुनवाई

भोपाल बेंच में आज से होगी दूसरी अपीलों की सुनवाई, 300 से अधिक मामले सूचीबद्ध; करदाताओं और उद्योगों को बड़ी राहत

विवेक झा, भोपाल। वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था लागू होने के लगभग नौ वर्ष बाद मध्यप्रदेश के करदाताओं, उद्योगों और टैक्स पेशेवरों का लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। प्रदेश में GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) के समक्ष द्वितीय अपीलों की नियमित सुनवाई शुक्रवार से प्रारंभ होने जा रही है। इसे जीएसटी व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कदम माना जा रहा है, जिससे वर्षों से लंबित कर विवादों के निस्तारण का रास्ता खुल गया है।

प्रारंभिक चरण में भोपाल बेंच के समक्ष 300 से अधिक अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई हैं। इससे प्रदेश के सैकड़ों करदाताओं और उद्योगों को शीघ्र न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

26 जून से भोपाल बेंच में होगी नियमित सुनवाई

जानकारी के अनुसार भोपाल स्थित GSTAT बेंच में 26 जून 2026 से अपीलों की सुनवाई शुरू होगी। फिलहाल तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण प्रत्येक सप्ताह गुरुवार और शुक्रवार को ही मामलों की सुनवाई निर्धारित की गई है।

विशेष बात यह है कि सुनवाई हाइब्रिड मोड में होगी। यानी करदाता और उनके अधिवक्ता आवश्यकता अनुसार न्यायाधिकरण में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के साथ-साथ वर्चुअल माध्यम से भी अपनी पैरवी कर सकेंगे।

लंबे समय से लंबित थे हजारों कर विवाद

जीएसटी लागू होने के बाद अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन में हुई देरी के कारण देशभर में बड़ी संख्या में द्वितीय अपीलें लंबित थीं। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं रहा। प्रदेश में अनेक करदाता अंतिम न्यायिक मंच उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्षों से अपने मामलों के निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब न्यायाधिकरण की नियमित सुनवाई शुरू होने से कर विवादों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आएगी और करदाताओं को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।

पुराने वैट मामलों के निस्तारण की भी बड़ी चुनौती

जीएसटी मामलों के अलावा मध्यप्रदेश में पूर्व कर कानूनों, विशेषकर वैट से संबंधित करीब 3,500 अपीलें भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। कर विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत किए जाने पर इन मामलों के निस्तारण में भी तेजी लाई जा सकेगी।

व्यापारिक संगठनों की लंबे समय से थी मांग

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन और नियमित सुनवाई की मांग विभिन्न व्यापारिक संगठनों, उद्योग संघों और टैक्स प्रोफेशनल्स द्वारा लंबे समय से की जा रही थी। उनका कहना था कि अंतिम अपीलीय मंच उपलब्ध नहीं होने से करदाताओं को अनावश्यक आर्थिक और कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

करदाताओं को मिलेगा प्रभावी न्यायिक मंच : मनोज पारख

टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल के अध्यक्ष एडवोकेट मनोज कुमार पारख ने कहा कि GSTAT की नियमित सुनवाई शुरू होना करदाताओं और उद्योग जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि अब वर्षों से लंबित विवादों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा, जिससे कर प्रशासन और व्यापार जगत दोनों को लाभ मिलेगा। न्यायिक प्रक्रिया में गति आने से अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और करदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा।

30 जून तक अपील दाखिल करने का अंतिम अवसर

एडवोकेट मनोज पारख ने करदाताओं और कर सलाहकारों को आगाह करते हुए कहा कि वर्तमान में 30 जून 2026 GSTAT के समक्ष अपील दायर करने की महत्वपूर्ण अंतिम तिथि है। पात्र करदाताओं को निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे अपील के अधिकार से वंचित न हों।

उन्होंने कहा कि समय पर अपील दाखिल करने से करदाताओं को कानूनी राहत प्राप्त करने का पूरा अवसर मिलेगा।

कर व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता और विश्वास

कर विशेषज्ञों का मानना है कि GSTAT की शुरुआत से न केवल विवादों का शीघ्र समाधान होगा बल्कि कर प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास भी बढ़ेगा। उद्योग जगत को इससे बड़ी राहत मिलेगी और निवेश एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी सकारात्मक वातावरण मिलेगा।


GSTAT से जुड़ी प्रमुख बातें

  • करीब 9 वर्ष बाद मध्यप्रदेश में द्वितीय अपीलों की नियमित सुनवाई शुरू।
  • भोपाल बेंच में 300 से अधिक अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध।
  • 26 जून 2026 से सुनवाई प्रारंभ।
  • प्रत्येक गुरुवार और शुक्रवार होगी सुनवाई।
  • हाइब्रिड मोड (फिजिकल + वर्चुअल) में होगी कार्यवाही।
  • प्रदेश में लगभग 3,500 पुराने वैट अपीलों के निस्तारण की भी चुनौती।
  • 30 जून 2026 तक GSTAT में अपील दाखिल करने की महत्वपूर्ण समय-सीमा।

क्या है GSTAT?

GST Appellate Tribunal (GSTAT) वस्तु एवं सेवा कर कानून के अंतर्गत गठित एक वैधानिक अपीलीय न्यायाधिकरण है, जहां प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के आदेशों के विरुद्ध द्वितीय अपील की जाती है। इसका उद्देश्य कर विवादों का विशेषज्ञ और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना है, जिससे करदाताओं को उच्च न्यायालय जाने से पहले प्रभावी न्यायिक मंच उपलब्ध हो सके।

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