अब आयकर रिटर्न बताएगा आपकी पूरी वित्तीय कहानी, GSTAT में घर बैठे होगी ऑनलाइन अपील
टैक्स लॉ बार एसोसिएशन और बार एट GSTAT की अध्ययन गोष्ठी में विशेषज्ञों ने समझाए आयकर रिटर्न के नए नियम और जीएसटी ट्रिब्यूनल की ऑनलाइन प्रक्रिया
विवेक झा, भोपाल। बदलते कर कानूनों, डिजिटल टैक्स प्रशासन और बढ़ती अनुपालन आवश्यकताओं के बीच कर सलाहकारों को नवीनतम प्रावधानों से अपडेट रखने के उद्देश्य से टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल एवं बार एट GSTAT, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को राज्य जीएसटी भवन, अरेरा हिल्स स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में अध्ययन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आयकर और जीएसटी से जुड़े नवीनतम बदलावों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। इसमें अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं कर सलाहकारों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर विषय विशेषज्ञों से व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।
कर कानूनों में बदलाव की जानकारी हर पेशेवर के लिए जरूरी
कार्यक्रम की शुरुआत में टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज पारख तथा बार एट GSTAT के अध्यक्ष सीए अमित जैन ने कहा कि कर कानूनों में लगातार हो रहे बदलावों को देखते हुए नियमित अध्ययन गोष्ठियां समय की आवश्यकता बन गई हैं। उन्होंने कहा कि कर सलाहकारों के लिए केवल कानून की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक संशोधन की व्यावहारिक समझ भी आवश्यक है, ताकि वे व्यापारियों और करदाताओं को समय पर सही सलाह दे सकें।
उन्होंने सभी सदस्यों से नियमित रूप से ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे कर कानूनों की सही जानकारी व्यापारिक समुदाय तक पहुंचाई जा सकेगी और अनावश्यक विवादों से बचा जा सकेगा।
आयकर रिटर्न अब केवल आय नहीं, पूरे वित्तीय व्यवहार का दस्तावेज
अध्ययन गोष्ठी के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रख्यात कर विशेषज्ञ सीए अमित जैन ने आकलन वर्ष 2026-27 के आयकर रिटर्न (ITR) में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष आयकर रिटर्न के विभिन्न फॉर्मों में 22 से अधिक महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। अब आयकर रिटर्न केवल आय का विवरण भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करदाता के संपूर्ण वित्तीय लेन-देन, निवेश, परिसंपत्तियों और अन्य वित्तीय गतिविधियों का व्यापक दस्तावेज बन गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता और सूचना प्रकटीकरण को प्राथमिकता देते हुए रिटर्न फॉर्म को अधिक विस्तृत बनाया है। ऐसे में करदाताओं को प्रत्येक जानकारी पूरी सावधानी और सत्यता के साथ भरनी होगी, क्योंकि गलत अथवा अधूरी जानकारी भविष्य में जांच और नोटिस का कारण बन सकती है।
31 जुलाई से पहले रिटर्न भरने की सलाह
सीए अमित जैन ने वेतनभोगी कर्मचारियों, छोटे व्यापारियों और अन्य पात्र करदाताओं से 31 जुलाई 2026 की निर्धारित अंतिम तिथि से पहले आयकर रिटर्न दाखिल करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर विलंब शुल्क एवं ब्याज देना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी करदाता से पूर्व वर्षों के रिटर्न में कोई आय छूट गई हो तो वह Updated Return (ITR-U) के माध्यम से 48 माह के भीतर स्वेच्छा से संशोधन कर सकता है।
उन्होंने कहा कि नोटिस का इंतजार करने के बजाय स्वयं सुधार करना अधिक लाभदायक और कम खर्चीला विकल्प है, क्योंकि वर्तमान कर व्यवस्था ईमानदार करदाताओं को स्वैच्छिक अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करती है।
GSTAT बनने से व्यापारियों को बड़ी राहत
कार्यक्रम के दूसरे तकनीकी सत्र में सीए संजीव मंगल ने जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) में ऑनलाइन अपील दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया।
उन्होंने बताया कि वर्षों की प्रतीक्षा के बाद जीएसटी ट्रिब्यूनल के संचालन शुरू होने से व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। अब जिन व्यापारियों की अपील विभागीय अपीलीय अधिकारी द्वारा निरस्त कर दी गई है, वे बिना किसी अतिरिक्त जटिल प्रक्रिया के घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल कर सकते हैं।
उन्होंने प्रतिभागियों को पोर्टल पर लॉग-इन करने, आवेदन भरने, दस्तावेज अपलोड करने, शुल्क जमा करने तथा अंतिम रूप से अपील प्रस्तुत करने की चरणबद्ध प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
सिर्फ 10 प्रतिशत अतिरिक्त जमा पर वसूली पर लगेगी रोक
सीए संजीव मंगल ने बताया कि ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने के लिए विवादित कर राशि का सिर्फ 10 प्रतिशत अतिरिक्त जमा करना होता है। अपील स्वीकार होते ही शेष कर मांग की वसूली पर स्वतः रोक लग जाती है, जिससे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलती है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था व्यापारियों के लिए राहतकारी साबित होगी, क्योंकि अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें अनावश्यक वसूली कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
31 जुलाई तक टोकन जनरेट करने पर मिलेगा अतिरिक्त समय
उन्होंने विशेष रूप से बताया कि यदि पात्र व्यापारी 31 जुलाई 2026 तक GSTAT पोर्टल पर अपना टोकन जनरेट कर लेते हैं तो उन्हें अपील दाखिल करने के लिए 60 दिनों का अतिरिक्त समय प्राप्त होगा।
उन्होंने सभी पात्र करदाताओं से अपील की कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें और समय रहते टोकन जनरेट कर अपने अपील के अधिकार को सुरक्षित रखें।
लाइव डेमो से मिली व्यावहारिक जानकारी
अध्ययन गोष्ठी का प्रमुख आकर्षण जीएसटी ट्रिब्यूनल की ऑनलाइन अपील प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन रहा। प्रतिभागियों ने वास्तविक पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया को समझा तथा तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए आयकर एवं जीएसटी कानूनों के अनेक व्यावहारिक पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
भविष्य में भी होंगे ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रम
कार्यक्रम में उपस्थित कर सलाहकारों, अधिवक्ताओं एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने अध्ययन गोष्ठी को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि कर कानूनों में लगातार हो रहे बदलावों के बीच इस प्रकार के नियमित शैक्षणिक कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं।
प्रतिभागियों ने भविष्य में भी आयकर, जीएसटी एवं अन्य कर कानूनों पर इसी प्रकार की व्यावहारिक अध्ययन गोष्ठियां आयोजित किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन संयुक्त संस्था के सचिव अधिवक्ता धीरज अग्रवाल एवं अधिवक्ता प्रशांत काबरा ने किया। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष सीए अंकुर अग्रवाल, सह सचिव संदीप चौहान, मनोज विजयवर्गीय, संदीप मुखर्जी, अमित तिवारी, प्रशांत काबरा सहित दोनों संस्थाओं के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ता तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मुख्य बातें
- आयकर रिटर्न फॉर्म में 22 से अधिक महत्वपूर्ण बदलाव।
- ITR अब पूरे वित्तीय लेन-देन का विस्तृत दस्तावेज।
- 31 जुलाई से पहले रिटर्न दाखिल करने की सलाह।
- ITR-U के माध्यम से 48 माह तक स्वयं सुधार का अवसर।
- GSTAT में अब घर बैठे ऑनलाइन अपील संभव।
- केवल 10% अतिरिक्त जमा पर शेष मांग की वसूली पर रोक।
- 31 जुलाई तक टोकन जनरेट करने पर अपील के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय।
- टैक्स लॉ बार एसोसिएशन एवं बार एट GSTAT द्वारा नियमित अध्ययन गोष्ठियों पर जोर।





