21 साल से नया मास्टर प्लान नहीं, अब व्यापारियों ने मांगा समाधान: ‘मिक्स्ड लैंड यूज लागू करें या गुजरात की तर्ज पर नियमितीकरण कानून लाएं’

10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ की मुख्यमंत्री से मांग; कार्रवाई रोकने की अपील, कहा-आवासीय भूखंडों पर कारोबार बंद हुआ तो लाखों लोगों की रोजी-रोटी और करोड़ों के राजस्व पर असर

भोपाल। राजधानी में आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर व्यापारियों और नगर निगम के बीच चल रहे विवाद के बीच 10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से स्थायी समाधान की मांग की है। महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि भोपाल का आखिरी मास्टर प्लान वर्ष 2005 में प्रकाशित हुआ था और इसके बाद 21 साल में शहर की आबादी और सीमा काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए या तो नया मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए अथवा प्रमुख मार्गों और बाजार क्षेत्रों में मिक्स्ड लैंड यूज की व्यवस्था की जाए।

व्यापारियों ने यह भी मांग की है कि जब तक सरकार कोई व्यवहारिक नीति या नया कानून नहीं लाती, तब तक आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा कार्रवाई नहीं की जाए।

व्यापारियों का तर्क-शहर बदला, लेकिन प्लान वही

महासंघ के अनुसार वर्ष 2005 के बाद भोपाल में बड़े पैमाने पर शहरी विस्तार हुआ है। नई कॉलोनियां और आवासीय क्षेत्र शहर के दूर-दराज इलाकों तक विकसित हो गए हैं। इन क्षेत्रों में लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मेडिकल स्टोर, क्लीनिक, अस्पताल, भोजनालय, किराना, सेवा केंद्र और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी विकसित हुए हैं।

व्यापारियों का कहना है कि जब नए क्षेत्रों के विकास के अनुरूप पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं कराए गए, तो स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कई लोगों ने आवासीय भूखंडों से ही कारोबार शुरू किया। अब अचानक इन गतिविधियों को बंद करने की कार्रवाई से हजारों प्रतिष्ठानों के सामने संकट पैदा हो सकता है।

‘व्यावसायिक दर से टैक्स, फिर कार्रवाई क्यों?’

अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि अनेक व्यापारी नगर निगम को व्यावसायिक दर से संपत्ति कर, बिजली वितरण कंपनी को कमर्शियल दर से बिजली शुल्क और नगर निगम से मिलने वाले कमर्शियल लाइसेंस का शुल्क नियमित रूप से जमा कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि इन प्रतिष्ठानों को बंद करने के नोटिस जारी किए जाते हैं तो व्यापारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा होती है।

महासंघ का कहना है कि शासन को इन कारोबारों से विभिन्न माध्यमों से राजस्व प्राप्त होता रहा है। इसलिए समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे नियमों का पालन भी हो और वर्षों से स्थापित कारोबार तथा उनसे जुड़ी आजीविका भी सुरक्षित रहे।

‘कारोबार बंद हुआ तो रोजगार पर सीधा असर’

व्यापारियों ने चेताया कि यदि आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को अचानक बंद कराया गया तो इसका असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। इन प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों, छोटे सेवा प्रदाताओं, सप्लायरों और अन्य लोगों की आजीविका भी प्रभावित होगी।

महासंघ के अनुसार, जिन क्षेत्रों में आज लोगों को घर के पास मेडिकल, अस्पताल, भोजन और रोजमर्रा की वस्तुएं उपलब्ध हो रही हैं, वहां व्यावसायिक गतिविधियां बंद होने से नागरिकों को इन सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है।

बैंकों से लिया कर्ज, भुगतान का संकट

व्यापारियों ने कहा कि कई कारोबारियों ने प्रतिष्ठान स्थापित करने और कारोबार बढ़ाने के लिए बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से टर्म लोन, मॉर्टगेज लोन और कैश क्रेडिट लिमिट सहित विभिन्न प्रकार के ऋण लिए हैं। यदि कारोबार अचानक बंद हो जाते हैं तो इन ऋणों की किस्त और ब्याज चुकाना मुश्किल हो सकता है।

महासंघ का कहना है कि ऐसी स्थिति न तो व्यापारियों के हित में होगी और न ही शासन तथा आम जनता के हित में।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला, राज्य को नीति बनाने की मांग

व्यापारी महासंघ ने 12 अगस्त 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि राज्यों की विकास संबंधी परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं और राज्य अपने स्थानीय संदर्भों के अनुरूप नियोजन संबंधी व्यवस्था कर सकते हैं। महासंघ ने इसी आधार पर मध्यप्रदेश सरकार से भोपाल की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने की मांग की है।

हालांकि, इस संबंध में किसी विशेष फैसले की कानूनी व्याख्या अथवा उसका भोपाल के मामले पर सीधा प्रभाव अलग से न्यायिक परीक्षण का विषय होगा।

गुजरात की तर्ज पर नियमितीकरण कानून की मांग

व्यापारियों ने कहा है कि यदि तत्काल नया मास्टर प्लान या मिक्स्ड लैंड यूज लागू करना संभव नहीं है तो गुजरात की तर्ज पर अनधिकृत विकास के नियमितीकरण के लिए कानून बनाया जाए।

गुजरात में Gujarat Regularisation of Unauthorised Development Act, 2022 के तहत कुछ निर्धारित परिस्थितियों में अनधिकृत विकास के नियमितीकरण का प्रावधान किया गया है। इसमें कुछ मामलों में चेंज ऑफ यूज, बिल्ट-अप एरिया, पार्किंग आदि से जुड़े विकास को निर्धारित शर्तों के अधीन नियमित करने की व्यवस्था है।

पहले समाधान, फिर कार्रवाई की मांग

10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जब तक भोपाल के लिए कोई स्थायी और व्यवहारिक नीति तैयार नहीं हो जाती, तब तक नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा आवासीय भूखंडों पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई रोक दी जाए।

महासंघ का कहना है कि नया मास्टर प्लान, मिक्स्ड लैंड यूज या नियमितीकरण कानून में से कोई व्यवहारिक विकल्प लागू कर सरकार व्यापारियों, कर्मचारियों, आम नागरिकों और शासन—सभी के हितों में संतुलन कायम कर सकती है। अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि व्यापारियों की मांग कार्रवाई से बचने भर की नहीं, बल्कि भोपाल के बदलते स्वरूप के अनुरूप दीर्घकालीन शहरी नियोजन और स्पष्ट नीति बनाने की है।

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