सक्रिय जीवन शैली हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम में सहायक- डॉ मनीषा श्रीवास्तव

सक्रिय जीवन शैली हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम में सहायक- डॉ मनीषा श्रीवास्तव
भोपाल
भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी), भोपाल में 08 सितंबर 2026 को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वर्ष 2026 में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस की थीम “हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन एवं पुनर्वास में फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधि की भूमिका” रही।
बीएमएचआरसी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, NCAHP (National Commission for Allied and Healthcare Professions) के अध्यक्ष डॉ. डी. विजय कुमार थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने की।
अपने उद्बोधन में डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 की थीम के प्रमुख संदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हृदय संबंधी रोग (सीवीडी) विश्व स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम में नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका है। फिजियोथेरेपिस्ट लोगों को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रेरित एवं प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि शारीरिक गतिविधि एवं नियमित मूवमेंट व्यक्ति को स्वतंत्र एवं सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना चाहिए तथा प्रत्येक आधे घंटे में शरीर को सक्रिय अवस्था में लाने का प्रयास करना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम में सहायक हो सकती है।
मुख्य अतिथि डॉ. डी. विजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में “वन हेल्थ, वन नेशन” के दृष्टिकोण के तहत विश्व फिजियोथेरेपी दिवस को समग्र स्वास्थ्य चेतना के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक तक शारीरिक तंदुरुस्ती एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने फिजियोथेरेपी के संबंध में विश्वसनीय जानकारी साझा करने, आवश्यकता पड़ने पर उचित चिकित्सा एवं पुनर्वास सेवाएं लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने तथा स्वास्थ्य एवं पुनर्वास के क्षेत्र में फिजियोथेरेपी की व्यापक भूमिका के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिला चिकित्सालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क फिजियोथेरेपी शिविर तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों एवं पुनर्वास केंद्रों में फिजियोथेरेपिस्ट की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य एवं पुनर्वास सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में सहायता मिल रही है।
कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी विभाग के प्रभारी डॉ. असलम जमाली ने कहा कि प्रत्येक चार में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में स्ट्रोक होने की संभावना रहती है, जबकि अधिकांश स्ट्रोक के जोखिम को प्रभावी जीवनशैली एवं स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से कम किया जा सकता है। उन्होंने नियमित व्यायाम एवं शारीरिक सक्रियता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सप्ताह में पांच दिन लगभग 30 मिनट का नियमित व्यायाम स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने संदेश दिया कि “ज्यादा चलें और सक्रिय रहें, बैठे कम” को दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। नियमित व्यायाम से मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा शारीरिक क्षमता में सुधार होता है।
न्यूरोमेडिसिन के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रचित राज सक्सेना ने “मैनेजमेंट ऑफ स्ट्रोक” विषय पर पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने स्ट्रोक के उपचार में समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने स्ट्रोक के प्रारंभिक उपचार में समय की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
न्यूरो सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ गुप्ता ने अपने प्रस्तुतीकरण में सर्जरी के पश्चात मरीज के पुनर्वास में फिजियोथेरेपिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मरीज को पुनः शारीरिक रूप से सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने में फिजियोथेरेपिस्ट की सहभागिता भी महत्वपूर्ण होती है।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. नेहल शाह ने “स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन में न्यूरोप्लास्टिसिटी का महत्व” विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि न्यूरोप्लास्टिसिटी के माध्यम से मस्तिष्क के स्वस्थ क्षेत्र स्ट्रोक अथवा चोट के कारण प्रभावित हुए कार्यों की भरपाई एवं पुनर्गठन में सहायता कर सकते हैं। नियमित अभ्यास एवं व्यायाम से नए तंत्रिका मार्गों को मजबूत करने, मस्तिष्क के अनुकूलन को बढ़ावा देने तथा रिकवरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। उन्होंने स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों के लिए अर्ली न्यूरो-रिहैबिलिटेशन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के दौरान हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से फिजियोथेरेपी के विद्यार्थियों द्वारा नाटक का मंचन किया गया। कार्यक्रम में फिजियोथेरेपी विभाग के चिकित्सकों का सम्मान कर विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।
इस अवसर पर न्यूरो-सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप सोरते, मिनी यूनिट को-ऑर्डिनेटर डॉ. रोमा रस्तोगी, डॉ. अंजलि शर्मा, डॉ. सीमा नवेद, डॉ. महेश राठौर, देवेंद्र सिंह सहित संस्थान के चिकित्सक, अधिकारी-कर्मचारी एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।





