अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, समय से पहले रिहाई की याचिका खारिज

मुंबई 

1993 के मुंबई धमाका मामले में दोषी करार कुख्‍यात गैंगस्‍टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई वाली याचिका को खारिज कर दिया है. इसका मतलब यह है कि अबू सलेम जेल से बाहर नहीं आ सकेगा. उसका कानूनी तिकड़म फेल हो गया है. इस मामले में अबू सलेम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. बता दें कि वॉन्‍टेड गैंगस्‍टर को पुर्तगाल से प्रत्‍यर्पित करा कर भारत लाया गया था।

आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा रिहाई की याचिका खारिज किए जाने के बाद अबू सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उसे 1995 में बिजनेसमैन प्रदीप जैन की हत्या के मामले में 2015 में और 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में 2017 में TADA की स्पेशल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, "साधारण हिसाब से भी देखें तो 11 नवंबर, 2005 को जेल जाने की तारीख से आपके 25 साल पूरे नहीं हुए हैं।"

अबू सलेम को मुंबई ब्लास्ट और प्रदीप जैन की हत्या के मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जब भारत सरकार ने यह पक्का भरोसा दिया था कि उसे 25 साल से ज्यादा जेल की सजा नहीं दी जाएगी। जब ट्रायल कोर्ट ने दोनों मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई तो सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई, 2022 को पुर्तगाल को दिए गए भारत के पक्के भरोसे के मुताबिक उसकी सजा को घटाकर 25 साल कर दिया।

क्या थी अबु सलेम की दलील?
अबू सलेम की तरफ से कहा गया था कि सजा में मिलने वाली छूट (remission) को जोड़ने पर उसने 25 साल की सजा पूरी कर ली है, इसलिए उसे रिहा किया जाए। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि उसकी याचिका समय से पहले दायर की गई है। उसकी 25 साल की अवधि 2030 में पूरी होगी। अबू सलेम ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सही माना है। आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल महीने में भी अबू सलेम की याचिका को खारिज कर दिया था।

क्या है पूरा केस?
आपको बता दें कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 बड़े बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में अबू सलेम को साल 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। अबु सलेम को कोर्ट ने मुंबई ब्लास्ट में शामिल होने के लिए आजीवन कारावास की सजा दी थी। 

क्या था अबू सलेम का तर्क?
सुप्रीम कोर्ट में पहले हुई कार्यवाही में केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि उसकी 25 साल की सजा 11 नवंबर, 2005 से शुरू हुई थी और यह नवंबर 2030 में खत्म होगी। वहीं, अबू सलेम ने तर्क दिया है कि सजा की अवधि की गिनती 18 सितंबर 2002 से की जानी चाहिए जब भारत के कहने पर इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के बाद उसे पुर्तगाल में हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार का तर्क है कि अबू सलेम को पुर्तगाल में पासपोर्ट से जुड़े एक अपराध के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था और उसकी हिरासत का उस अपराध से कोई लेना-देना नहीं था जिसके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया था।

कौन है अबू सलेम?
अबू सलेम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सिंडिकेट का हिस्सा था। जून 2017 में अबू सलेम को 1993 के मुंबई धमाकों के मामले में दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उसे सीरियल बम धमाकों में इस्तेमाल के लिए गुजरात से मुंबई हथियार ले जाने का दोषी पाया गया था। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

 

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