सुरों की महफिल में गूंजा संगीत का जश्न, यादगार बनी सुर संदेश परिवार की संगीतमय शाम
बावड़िया कला स्थित होटल में कराओके ग्रुप का आयोजन; हर उम्र के सदस्यों ने दी प्रस्तुति, महान गीतकारों, संगीतकारों और गायकों को किया भावपूर्ण नमन

लोकप्रिय फिल्मी गीतों से सजी शाम
भोपाल, 12 सितंबर। बावड़िया कला स्थित एक होटल में सुर संदेश म्यूजिकल परिवार कराओके ग्रुप की ओर से संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गीत-संगीत के माध्यम से महान गीतकारों, संगीतकारों और गायकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सुर संदेश परिवार के सदस्यों ने लोकप्रिय फिल्मी गीतों की प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को संगीत की सुनहरी यादों से रूबरू कराया।
कार्यक्रम के दौरान किसी कलाकार की मधुर आवाज ने श्रोताओं का दिल छुआ, तो किसी की प्रस्तुति ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया। जैसे-जैसे गीतों का सिलसिला आगे बढ़ा, महफिल तालियों, मुस्कुराहटों और संगीत की मिठास से सराबोर होती गई। उपस्थित लोगों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए हर प्रस्तुति का गर्मजोशी से स्वागत किया।

संगीत ने जोड़े दिल, महफिल बनी परिवार का उत्सव
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें अलग-अलग उम्र के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वरिष्ठ सदस्यों से लेकर युवा प्रतिभागियों तक ने अपनी आवाज में गीत प्रस्तुत किए। इससे यह संदेश सामने आया कि संगीत किसी उम्र या सीमा का मोहताज नहीं है। सुरों के माध्यम से हर व्यक्ति अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकता है और दूसरों के साथ आत्मीय रिश्ता बना सकता है।
कार्यक्रम में शामिल सदस्यों ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाली भाषा भी है। यही कारण रहा कि आयोजन में शामिल लोग एक-दूसरे की प्रस्तुतियों का आनंद लेते हुए परिवार जैसी आत्मीयता का अनुभव करते नजर आए।

‘हर आवाज अपने आप में खास है’
आयोजक संदेश सुले ने कहा कि सुर संदेश केवल एक कराओके ग्रुप नहीं, बल्कि संगीत से जुड़े ऐसे लोगों का परिवार है, जो गीतों के बहाने एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि इस परिवार में कोई बड़ा या छोटा कलाकार नहीं है। हर आवाज की अपनी विशेषता है और हर प्रस्तुति का अपना महत्व है।
उन्होंने कहा कि संगीत बिना कुछ कहे लोगों के दिलों तक पहुंचता है। यही वजह है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि और उम्र के लोग भी संगीत के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। सुर संदेश परिवार का उद्देश्य इसी आत्मीयता को बनाए रखना और सदस्यों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर देना है।

साथियों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
कार्यक्रम की सफलता में सुर संदेश परिवार के अनेक सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सतीश जी, अविनाश भाई, रणदीवे जी, खान साहब, नंदा जी, वसुंधरा जी, सुगंधा जी, ममता जी, रवि मालवीय जी, संजय चिंचोंकर जी, राकेश श्रीवास्तव, डॉ. सुमन पिल्लई और शशि पिल्लई सहित सभी साथियों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया।
सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और आपसी समन्वय के कारण कार्यक्रम में पूरे समय उत्साह बना रहा। गीतों की प्रस्तुतियों के साथ-साथ एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाने और कलाकारों का सम्मान करने की भावना भी दिखाई दी।
उम्र नहीं, जज्बा मायने रखता है
सुर संदेश परिवार की इस संगीतमय शाम ने यह संदेश दिया कि सपने देखने और उन्हें सुरों में जीने की कोई उम्र नहीं होती। व्यक्ति चाहे किसी भी आयु का हो, संगीत के प्रति प्रेम उसे नई ऊर्जा और उत्साह दे सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर यह भावना प्रमुखता से सामने आई कि जब दिलों में संगीत और रिश्तों में अपनापन हो, तो छोटी-सी महफिल भी जीवनभर याद रहने वाला अनुभव बन जाती है। सुर संदेश परिवार ने एक बार फिर साबित किया कि गीतों के माध्यम से न केवल यादों को जीवंत रखा जा सकता है, बल्कि लोगों के बीच प्रेम, आत्मीयता और पारिवारिक जुड़ाव को भी मजबूत किया जा सकता है।
सुर संदेश परिवार के सदस्यों ने इसी भावना के साथ आगे भी संगीत की महफिलें सजाने, सुरों को जीवंत रखने और लोगों के दिलों को जोड़ते रहने का संदेश दिया।





