2 हजार रुपए से अधिक के UPI भुगतान पर रोक से डिजिटल लेन-देन को झटका, CAIT ने जताई चिंता
15-16 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर 2 हजार रुपए से ज्यादा के पेट्रोल-डीजल भुगतान UPI से नहीं लेने के फैसले का विरोध; धर्मेंद्र शर्मा बोले- MDR से व्यापारियों पर बढ़ेगा अतिरिक्त लागत का बोझ

मध्यप्रदेश के करीब 4,700 पेट्रोल पंप होंगे प्रभावित
भोपाल, 18 सितंबर। मध्यप्रदेश के पेट्रोल पंप डीलर्स द्वारा 15-16 अक्टूबर से 2,000 रुपए से अधिक के पेट्रोल-डीजल भुगतान UPI के माध्यम से स्वीकार नहीं करने के प्रस्तावित फैसले को लेकर कारोबारियों के संगठन CAIT ने चिंता जताई है। CAIT भोपाल के जिलाध्यक्ष एवं CAIT मध्यप्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि UPI को डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था के प्रमुख माध्यम के रूप में बढ़ावा दिए जाने के बाद इस तरह की स्थिति बनना डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है। उनके अनुसार, प्रदेश के करीब 4,700 पेट्रोल पंप इस व्यवस्था से प्रभावित हो सकते हैं।
MDR को बताया फैसले की मुख्य वजह
धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि व्यापारियों के बीच UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर चिंता है। उन्होंने कहा कि सामान्य 2,000 रुपए से अधिक के पात्र UPI मर्चेंट लेन-देन पर 0.4% MDR प्रस्तावित होने की बात कही जा रही है। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपए के भुगतान पर करीब 40 रुपए की लागत बनती है। वहीं फ्यूल श्रेणी में 2,000 रुपए से अधिक के लेन-देन पर 5 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR बताया गया है।
उनका कहना है कि पेट्रोल पंप जैसे कारोबार में बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान होते हैं। ऐसे में प्रत्येक लेन-देन पर लगने वाली अतिरिक्त लागत का सीधा असर कारोबारियों के खर्च और मार्जिन पर पड़ सकता है।
‘सिर्फ कुछ रुपये की लागत का मामला नहीं’
शर्मा ने कहा कि यह मामला केवल कुछ रुपये की अतिरिक्त लागत तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल भुगतान नीति की दिशा से भी जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, देश में व्यापारियों और आम नागरिकों को लंबे समय से डिजिटल और कैशलेस भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ता है तो छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए इसे वहन करना मुश्किल हो सकता है। इससे कुछ कारोबारी डिजिटल भुगतान के बजाय दूसरे भुगतान माध्यमों को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकते हैं।
सीमित मार्जिन में अतिरिक्त खर्च की चिंता
CAIT के अनुसार, व्यापारी पहले से ही लागत, प्रतिस्पर्धा और सीमित मार्जिन के बीच कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत जुड़ने से उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
शर्मा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल जैसी आवश्यक वस्तुओं के कारोबार में ग्राहकों के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में भुगतान के माध्यम पर अतिरिक्त लागत आने से व्यापारी और ग्राहक दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
CAIT की मांग- MDR से मुक्त रहे व्यापारिक लेन-देन
धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि CAIT की स्पष्ट मांग है कि सरकार इस विषय पर संवेदनशीलता से विचार करे और पेट्रोल-डीजल सहित व्यापारिक लेन-देन को MDR से मुक्त रखने की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि व्यापारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में किए गए प्रयास प्रभावित न हों और कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी न पड़े।
‘UPI दुनिया के सामने भारत का डिजिटल मॉडल’
शर्मा ने कहा कि UPI भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल की महत्वपूर्ण पहचान बन चुका है और इसका इस्तेमाल देशभर में तेजी से बढ़ा है। ऐसे में UPI के उपयोग को सीमित करने की स्थिति बनना चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित संस्थाओं को व्यापारियों की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए MDR से जुड़े मुद्दे पर विचार करना चाहिए, ताकि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में व्यापारियों और ग्राहकों का भरोसा बना रहे।
फैसले पर पुनर्विचार की मांग
CAIT ने सरकार से पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपए से अधिक के UPI भुगतान को लेकर प्रस्तावित बदलाव और MDR व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है। संगठन का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर ऐसा रास्ता निकालने की मांग की, जिससे डिजिटल भुगतान की सुविधा भी बनी रहे और कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का दबाव भी न आए।





