बाइक-स्कूटर डीलरों की कमाई पर संकट, FADA करेगा OEM कंपनियों के साथ बैठक

FADA ने उठाया डीलरों की परेशानी का मुद्दा

विवेक झा, भोपाल। देश में दोपहिया वाहनों की बिक्री का बड़ा बाजार होने के बावजूद टू-व्हीलर डीलरों के सामने अब कारोबार को लाभदायक बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। वाहनों की बिक्री में वॉल्यूम मौजूद है, लेकिन सर्विस और वर्कशॉप कारोबार की कमजोर कमाई डीलरों की आर्थिक स्थिति पर दबाव डाल रही है। इसी को देखते हुए फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) अब देश की टू-व्हीलर कंपनियों यानी OEMs के साथ इस मुद्दे को उठाने की तैयारी कर रहा है। यह जानकारी शनिवार को भोपाल पधारे FADA के टू-व्हीलर वर्टिकल के चेयरमैन प्रणव शाह ने मीडिया को दी।

शाह के मुताबिक संगठन सभी प्रमुख टू-व्हीलर कंपनियों को पत्र लिखकर उनके प्रतिनिधियों और डीलरों के बीच वन-टू-वन बैठक कराने की मांग करेगा। जरूरत पड़ने पर एक साथ कई कंपनियों के साथ संयुक्त बैठक भी की जा सकती है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य डीलरशिप कारोबार की कमजोर अर्थव्यवस्था और खासतौर पर वर्कशॉप की कम कमाई का समाधान तलाशना होगा।

अब OEM से आमने-सामने बातचीत की तैयारी

FADA अब इस पूरे मुद्दे को सिर्फ सर्वे या शिकायत तक सीमित नहीं रखना चाहता। संगठन सभी टू-व्हीलर OEMs को पत्र लिखकर डीलरों और कंपनी प्रतिनिधियों के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था करने की तैयारी में है।

जरूरत पड़ने पर एक से अधिक कंपनियों के साथ संयुक्त बैठक भी की जा सकती है। बातचीत में वर्कशॉप की कमाई, MBOs, डीलर मार्जिन, इन्वेंटरी, EV ट्रांजिशन और OEM-डीलर समझौते जैसे मुद्दे शामिल होंगे।

FADA अब कंपनियों के साथ आमने-सामने बैठकर टू-व्हीलर डीलरशिप के पूरे बिजनेस मॉडल की समीक्षा करना चाहता है।

300 रुपए की कमाई में कैसे चले वर्कशॉप, डीलरों को चाहिए 500 रुपए

FADA के मुताबिक टू-व्हीलर सर्विस वर्कशॉप में एक वाहन से औसतन करीब 300 रुपए का राजस्व मिल रहा है। डीलरों का कहना है कि वर्कशॉप को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए यह राशि कम से कम 500 रुपए प्रति दोपहिया वाहन होनी चाहिए।

टू-व्हीलर वर्कशॉप में भी तकनीशियनों की सैलरी, भवन का किराया, बिजली, उपकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण और अन्य संचालन खर्च लगातार होते हैं। लेकिन प्रति वाहन कम राजस्व मिलने के कारण इन खर्चों की भरपाई मुश्किल हो रही है।

कंपनियों से मिलने वाला 100 रुपए भी खर्च के मुकाबले कम

FADA के टू-व्हीलर वर्टिकल चेयरमैन प्रणव शाह के मुताबिक, टू-व्हीलर में वॉल्यूम जरूर है, लेकिन राजस्व के मुकाबले वर्कशॉप कारोबार लाभदायक नहीं है। डीलरों की परेशानी सिर्फ सर्विस चार्ज से मिलने वाले राजस्व तक सीमित नहीं है। एक डीलर के मुताबिक कुछ OEMs प्रति वाहन करीब 100 रुपए का सपोर्ट देते हैं, लेकिन यह राशि किराया, श्रम और अन्य परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

डीलरों का कहना है कि अधिकृत वर्कशॉप को कंपनी के मानकों के अनुरूप बनाए रखने में खर्च होता है। प्रशिक्षित कर्मचारियों से लेकर आधुनिक उपकरणों तक में निवेश करना पड़ता है। ऐसे में सर्विस कारोबार का मौजूदा आर्थिक मॉडल डीलरों के लिए चुनौती बन रहा है।

अनऑर्गनाइज्ड मल्टी-ब्रांड आउटलेट से भी मुकाबला

FADA ने अनऑर्गनाइज्ड मल्टी-ब्रांड आउटलेट (MBOs) को भी बड़ी चुनौती बताया है। ये ऐसे आउटलेट हैं जो अलग-अलग ब्रांड के दोपहिया वाहनों की बिक्री या सर्विस करते हैं, लेकिन OEM के अधिकृत डीलर नेटवर्क का हिस्सा नहीं होते।

अधिकृत डीलरों का कहना है कि उन्हें कंपनी के मानकों के मुताबिक शोरूम और वर्कशॉप बनाए रखने, प्रशिक्षित कर्मचारियों को रखने और अन्य नियमों का पालन करने पर खर्च करना पड़ता है। दूसरी तरफ मल्टी-ब्रांड आउटलेट अपेक्षाकृत अलग लागत संरचना के साथ बाजार में प्रतिस्पर्धा करते हैं।

FADA का कहना है कि कंपनियां MBOs को प्रोत्साहित नहीं करतीं, लेकिन इस समस्या को रोकने के लिए पर्याप्त सक्रिय कदम भी नहीं उठाए जा रहे हैं। संगठन अब इस मुद्दे पर OEMs के साथ चर्चा करना चाहता है।

डीलर-कंपनी एग्रीमेंट में बदलाव की मांग

FADA का कहना है कि मौजूदा OEM-डीलर समझौतों में डीलरों के हितों का पर्याप्त संतुलन नहीं है। संगठन अब कंपनियों से अधिक संतुलित डीलर एग्रीमेंट मॉडल पर चर्चा करना चाहता है।

डीलरों की मांग है कि कंपनी और डीलर के बीच जिम्मेदारियां, लागत, इंसेंटिव, मार्जिन और नीतियां अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक हों, ताकि बाजार में बदलाव का पूरा जोखिम सिर्फ डीलर पर न आए।

देश में 5 हजार से ज्यादा अधिकृत डीलर

टू-व्हीलर डीलरशिप नेटवर्क देश के ऑटोमोबाइल कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। FADA के अनुसार देश में 5,000 से ज्यादा अधिकृत टू-व्हीलर डीलर और करीब 15,000 आउटलेट हैं। FADA का टू-व्हीलर वर्टिकल करीब दो साल पहले बनाया गया था। संगठन के अनुसार इस अवधि में टू-व्हीलर डीलरशिप से जुड़े सदस्यों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। इससे संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में डीलरों की सामूहिक आवाज और प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है।

स्टॉक भी फंसा रहा तो बढ़ेगा वित्तीय दबाव

डीलरों की बड़ी चुनौती इन्वेंटरी और स्टॉक मैनेजमेंट है। 35 प्रतिशत डीलरों ने इसे चिंता के रूप में दर्ज किया। टू-व्हीलर डीलर को अलग-अलग मॉडल, इंजन क्षमता, वेरिएंट और रंगों का स्टॉक रखना पड़ता है। किसी मॉडल की मांग कम होने पर स्टॉक लंबे समय तक खड़ा रह सकता है। इससे डीलर की कार्यशील पूंजी फंसती है और ब्याज व अन्य लागत बढ़ती है।

UPI पर MDR का मुद्दा भी डीलरों के लिए चुनौती

प्रणव शाह के मुताबिक डीलरों के लिए डिजिटल भुगतान और खासतौर पर UPI से जुड़े MDR (Merchant Discount Rate) का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में ग्राहक वाहन की बुकिंग, डाउन पेमेंट, एक्सेसरीज और सर्विस का भुगतान डिजिटल माध्यम से करते हैं। शाह का कहना है कि भुगतान के डिजिटल विकल्प बढ़ने के साथ कारोबार में लेन-देन की लागत, सेटलमेंट और भुगतान से जुड़े शुल्क का असर भी महत्वपूर्ण हो जाता है। खासकर कम मार्जिन वाले सर्विस कारोबार में हर अतिरिक्त लागत सीधे लाभप्रदता को प्रभावित करती है। ऐसे में डीलर चाहते हैं कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में MDR और अन्य भुगतान लागत को लेकर स्पष्ट, पारदर्शी और डीलर-अनुकूल व्यवस्था हो।

मप्र में भी बढ़ी बिक्री; लेकिन डीलरों की चिंता मुनाफे को लेकर

भोपाल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष पाण्डे ने बताया कि देश में दोपहिया वाहनों की बिक्री इस साल मजबूत रफ्तार से बढ़ रही है। अगस्त 2026 में देश में 17.15 लाख टू-व्हीलर रिटेल हुए, जो अगस्त 2025 के 14.33 लाख के मुकाबले 19.69 प्रतिशत अधिक हैं। यह अगस्त महीने में अब तक की सबसे अधिक बिक्री है। पाण्डे ने बताया कि ग्रामीण बाजार में दोपहिया बिक्री 20.25 प्रतिशत, जबकि शहरी बाजार में 19.07 प्रतिशत बढ़ी। उन्होंने बताया कि डीलरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मार्जिन और लागत की है। वाहन बेचने के साथ शोरूम, कर्मचारी, स्टॉक, वित्तीय लागत, सर्विस सेंटर और मार्केटिंग का खर्च भी बढ़ रहा है। ऐसे में ज्यादा वाहन बेचने के बावजूद प्रति वाहन बचने वाला लाभ दबाव में आ सकता है।

दूसरी चुनौती इन्वेंटरी की है। अलग-अलग मॉडल, वेरिएंट और रंगों का स्टॉक रखना पड़ता है। किसी मॉडल की मांग कम होने पर डीलर की पूंजी स्टॉक में फंस जाती है।

मप्र में 9 महीने में 9 लाख से ज्यादा टू-व्हीलर

मध्य प्रदेश में जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान 9,02,563 दोपहिया वाहनों का पंजीकरण हुआ है। इसमें Hero MotoCorp की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत, Honda की 24.38 प्रतिशत, TVS की 17.55 प्रतिशत और Bajaj की 13.76 प्रतिशत रही। ये आंकड़े निर्माता की डिस्पैच नहीं, बल्कि RTO/VAHAN में दर्ज वास्तविक वाहन पंजीकरण पर आधारित हैं। देश के कुल बाजार में मप्र की हिस्सेदारी करीब 5.4 प्रतिशत है।

 

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