मध्यप्रदेश में निर्माण नियमों में एकरूपता की तैयारी, एफएआर और प्रोजेक्ट लागत पर क्रेडाई का साझा प्रस्ताव
क्रेडाई मध्यप्रदेश भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के चैप्टर के साथ निर्माण नियमों, एफएआर, टीडीआर, अतिरिक्त निर्माण शुल्क और समयबद्ध मंजूरी पर साझा शहरी विकास सुधार प्रस्ताव तैयार करेगा

विवेक झा, भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में निर्माण नियमों की स्पष्टता, परियोजनाओं की लागत और भवन निर्माण की मंजूरियों से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को लेकर क्रेडाई मध्यप्रदेश साझा शहरी विकास सुधार प्रस्ताव तैयार करेगा। इसके लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के क्रेडाई चैप्टर के बीच समन्वय स्थापित कर डेवलपर्स के अनुभवों और सुझावों को एक दस्तावेज में शामिल किया जाएगा। प्रस्ताव के जरिए राज्य सरकार के सामने निर्माण नियमों में स्पष्टता, विकास योजनाओं में एकरूपता और समयबद्ध मंजूरी से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे।
क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष मनोज मीक के अनुसार, मंगलवार, 13 अक्टूबर को क्रेडाई भोपाल कार्यालय में नई विकास योजना के ड्राफ्ट पर सुझाव और आपत्तियां देने वाले सदस्यों की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक के साथ इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर चैप्टर के प्रतिनिधियों से ऑनलाइन विचार-विमर्श की योजना भी बनाई गई है। इसमें प्रदेश के प्रमुख शहरों में लागू निर्माण नियमों के अंतर और उनके व्यावहारिक प्रभावों पर चर्चा होगी।
एफएआर, टीडीआर और अतिरिक्त निर्माण शुल्क पर फोकस
क्रेडाई के प्रस्ताव में एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो), अतिरिक्त निर्माण के प्रीमियम, टीडीआर और विभिन्न शुल्कों की स्पष्टता को प्राथमिकता दी जाएगी। एफएआर से यह निर्धारित होता है कि किसी भूखंड पर नियमों के अनुसार कुल कितना निर्माण किया जा सकता है। वहीं, टीडीआर यानी ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स के जरिए निर्धारित शर्तों के अधीन अतिरिक्त निर्माण क्षमता उपलब्ध हो सकती है।
निर्माण क्षमता और उससे जुड़े शुल्कों की जानकारी परियोजना की लागत, निवेश और आर्थिक व्यवहार्यता को प्रभावित करती है। क्रेडाई का मानना है कि यदि डेवलपर को जमीन खरीदने से पहले यह स्पष्ट हो कि संबंधित भूखंड पर कितना निर्माण अनुमत होगा और इसके लिए कितने शुल्क देने होंगे, तो परियोजना की योजना बनाना अधिक आसान हो सकता है।
संगठन समान भूखंड, सड़क की चौड़ाई और भूमि उपयोग जैसी समान परिस्थितियों के आधार पर नियमों की तुलना करने पर जोर दे रहा है। इससे अलग-अलग शहरों में नियमों के अंतर और उनके कारण परियोजनाओं की लागत पर पड़ने वाले प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के नियमों की तुलना
क्रेडाई मध्यप्रदेश की ओर से शासन को भेजे गए पत्र में लैंड डेवलपमेंट और बिल्डिंग नियमों के साथ ग्वालियर की विकास योजना 2035 तथा भोपाल 2047 के ड्राफ्ट में मौजूद अलग-अलग व्यवस्थाओं का मुद्दा उठाया गया है।
संगठन का उद्देश्य है कि प्रदेश के दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को विकास और आर्थिक उन्नति के समान अवसर मिलें। इसके लिए निर्माण और कॉलोनाइजेशन से जुड़े नियमों की तुलना करते हुए उन बिंदुओं की पहचान की जाएगी, जहां स्पष्टता या नीतिगत बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है।
प्रस्तावित बैठक में सदस्यों की व्यावहारिक कठिनाइयों को व्यवस्थित सुझावों और आपत्तियों में बदलने की तैयारी की जाएगी। क्रेडाई के अनुसार, इससे किफायती निर्माण, निवेश की सुरक्षा और आवास आपूर्ति बढ़ाने से जुड़े मुद्दों को शासन के सामने तथ्यात्मक तरीके से रखा जा सकेगा।
मंजूरी में देरी और लागत की अनिश्चितता घटाने की मांग
निर्माण परियोजनाओं में जमीन खरीदने से लेकर भवन निर्माण की मंजूरी और काम पूरा होने तक कई नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। नियमों और शुल्कों की स्पष्ट जानकारी नहीं होने या मंजूरी में देरी से परियोजना की लागत और समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
क्रेडाई का साझा प्रस्ताव इन समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर केंद्रित रहेगा। संगठन चाहता है कि डेवलपर्स को जमीन खरीदने से पहले निर्माण क्षमता, लागू शुल्क और जरूरी अनुमतियों की जानकारी मिल सके। साथ ही मंजूरी की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हो, ताकि निवेश संबंधी अनिश्चितता कम की जा सके।
इस पहल का उद्देश्य केवल निर्माण क्षेत्र की समस्याएं उठाना नहीं, बल्कि ऐसे नियमों के लिए सुझाव देना भी है, जिनसे निवेश, रोजगार और आवास की उपलब्धता को बढ़ावा मिल सके।
यूनिफाइड नियमों और मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लान पर भी चर्चा
मनोज मीक के अनुसार, यूनिफाइड लैंड डेवलपमेंट रूल्स, यूनिफाइड कॉलोनाइजिंग एक्ट, फायर और लिफ्ट संबंधी नीति-नियमों, इंदौर और जबलपुर की लंबित विकास योजनाओं तथा मेट्रोपॉलिटन रीजन प्लान से जुड़े विषयों पर सरकारी स्तर पर काम चल रहा है।
क्रेडाई का कहना है कि नए प्रावधान तय करने से पहले डेवलपर्स और अन्य संबंधित पक्षों से व्यवस्थित परामर्श किया जाना चाहिए। इससे नियम बनाते समय जमीन पर काम करने वाले लोगों की व्यावहारिक कठिनाइयों और परियोजनाओं की जरूरतों को भी समझा जा सकेगा।
संगठन के अनुसार, साझा प्रस्ताव पर शासन से चर्चा के लिए इसी सप्ताह डायरेक्टर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास से मुलाकात का समय लेने का प्रयास किया जाएगा। यह मुलाकात अभी प्रस्तावित है।
‘कमाल का भोपाल’ की शोध-पहल को आगे बढ़ाने की तैयारी
क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष मनोज मीक के नेतृत्व में ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के तहत ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 से पहले समग्र विकास योजना की आवश्यकता को लेकर एक इनसेप्शन प्रस्तुति में मुद्दे उठाए गए थे। अब प्रस्तावित बैठक में उस शोध और दस्तावेजी पहल को डेवलपर्स के अनुभवों तथा दूसरे शहरों के क्रेडाई चैप्टर के सुझावों के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी है।
इसका उद्देश्य भोपाल सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों में विकास योजनाओं, निर्माण नियमों और निवेश से जुड़े विषयों पर साझा दृष्टिकोण तैयार करना है।
2047 की योजना में भविष्य की तकनीक और बदलती जरूरतें शामिल करने पर जोर
मनोज मीक का कहना है कि अगले 21 वर्षों के लिए बनाई जाने वाली विकास योजना को आज की जरूरतों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और नई तकनीकों के कारण जीवनशैली, रोजगार, आवास और शहरी सुविधाओं की जरूरतों में बदलाव आएगा। इसलिए विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा जरूरी है।
हालांकि, क्रेडाई का यह भी कहना है कि समीक्षा और नियमों में बदलाव की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे पहले से स्वीकृत परियोजनाएं बार-बार अनिश्चितता में न पड़ें। इसके लिए बदलाव की स्पष्ट शर्तें, पर्याप्त समय और पारदर्शी प्रक्रिया निर्धारित करने की जरूरत है।
संगठन के प्रस्ताव का व्यापक उद्देश्य ऐसी शहरी विकास व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ सुरक्षा, बुनियादी सुविधाएं, निवेश का भरोसा और आवास की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो सके।
क्रेडाई मध्यप्रदेश की इस पहल का अगला महत्वपूर्ण चरण साझा प्रस्ताव तैयार करना और उसे शासन के सामने रखना होगा। प्रस्ताव में शामिल सुझावों पर सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित नीतिगत बदलाव यह तय करेंगे कि निर्माण नियमों की स्पष्टता और विभिन्न शहरों की विकास योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में कितनी प्रगति होती है।





