चार श्रम संहिताओं के अनुपालन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर हुआ मंथन
भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में ‘श्रम संवाद’ कार्यक्रम आयोजित, नियोक्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों को नियुक्ति पत्र, वेतन भुगतान, पीएफ और संविदा श्रमिकों से जुड़े प्रावधानों की दी जानकारी

विवेक झा, भोपाल। श्रम कानूनों के अनुपालन, नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों और श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से मंगलवार, 28 अक्टूबर को अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, मुगालिया कोट, भोपाल में जिला स्तरीय क्षमता निर्माण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘श्रम संवाद’ के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम में उद्योगों, नियोक्ताओं और अन्य हितधारकों को चार श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों, अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं तथा केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम मध्यप्रदेश सरकार के युवा संगम कार्यक्रम के साथ आयोजित हुआ, जिसमें लगभग 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के उप सचिव गोविंद राम ने मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने चारों श्रम संहिताओं की प्रमुख विशेषताओं और नियोक्ताओं की अनुपालन संबंधी जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रम कानूनों के प्रावधानों को समझने और उनका पालन करने के महत्व पर चर्चा की, ताकि उद्योगों और प्रतिष्ठानों में श्रम संबंधी नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके।

वेतन, सामाजिक सुरक्षा और औद्योगिक संबंधों पर चर्चा
कार्यक्रम में उप श्रम आयुक्त श्रीमती पी. जैस्मिन अली सितारा तथा श्रम सचिव रघुराज राजेंद्रन ने श्रम एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से संबंधित लाभों की जानकारी दी। अधिकारियों ने श्रमिकों के हितों की सुरक्षा और विभिन्न योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया।
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II कृष्ण कुमार तथा उप श्रम आयुक्त श्रीमती रजनी मालवीय ने वेतन, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा और औद्योगिक संबंधों से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी। इन विषयों के माध्यम से प्रतिभागियों को श्रम कानूनों के विभिन्न पहलुओं और उनके व्यावहारिक अनुपालन से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि श्रम कानूनों की जानकारी केवल नियोक्ताओं और उद्योग प्रबंधन के लिए ही नहीं, बल्कि श्रमिकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। नियमों और योजनाओं की सही जानकारी से श्रमिक अपने अधिकारों तथा उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
रोजगार और पेंशन योजनाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम में केंद्र सरकार की रोजगार प्रोत्साहन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II रौशन कश्यप ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) की जानकारी साझा की। वहीं, उप कल्याण आयुक्त (केंद्रीय) श्री अंकुर ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM) के बारे में बताया।
इन सत्रों का उद्देश्य प्रतिभागियों को योजनाओं के प्रावधानों और उनसे संबंधित लाभों की जानकारी देना था, ताकि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंच सके और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़े।
पीएफ से लेकर नियुक्ति पत्र तक के सवालों के मिले जवाब
कार्यक्रम का प्रश्नोत्तर सत्र भी महत्वपूर्ण रहा। इसमें प्रतिभागियों ने श्रम कानूनों के अनुपालन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक विषयों पर सवाल पूछे। पंजीकरण, नियुक्ति पत्र, भविष्य निधि (पीएफ), वेतन भुगतान और संविदा श्रमिकों से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को श्रम कानूनों से जुड़ी प्रक्रियाओं और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिला। उद्योगों और प्रतिष्ठानों में श्रम संबंधी नियमों के अनुपालन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई।
विभिन्न विभागों के अधिकारियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, आंचलिक कार्यालय भोपाल श्री गौतम, श्रम प्रवर्तन अधिकारी (केंद्रीय) अमित सिंह और आशीष कुमार गुप्ता तथा कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के संयुक्त निदेशक निश्चल नाग सहित संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सहभागिता से श्रम कानूनों, भविष्य निधि, कर्मचारी बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा करने का अवसर मिला।
श्रम कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
‘श्रम संवाद’ कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य उद्योगों, नियोक्ताओं और अन्य हितधारकों को चार श्रम संहिताओं के प्रावधानों तथा अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं से परिचित कराना था। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और श्रम कानूनों से जुड़े सवालों का समाधान करना भी कार्यक्रम का अहम हिस्सा रहा।
कार्यक्रम के माध्यम से श्रम कानूनों के अनुपालन और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में प्रयास किया गया। इसमें शामिल लगभग 120 प्रतिभागियों को विभिन्न श्रम संबंधी प्रावधानों, योजनाओं और प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
चार श्रम संहिताएं और उनके प्रमुख प्रावधान
केंद्र सरकार ने श्रम कानूनों को सरल बनाने और श्रमिकों के अधिकारों तथा सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से चार श्रम संहिताएं बनाई हैं। इनके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
1. वेतन संहिता, 2019 (Code on Wages)
इस संहिता में न्यूनतम वेतन, वेतन का समय पर भुगतान, बोनस और समान पारिश्रमिक से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इसका उद्देश्य श्रमिकों को उचित वेतन सुनिश्चित करना और वेतन संबंधी नियमों को सरल बनाना है।
2. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code)
यह संहिता ट्रेड यूनियनों की मान्यता, औद्योगिक विवादों के समाधान, सेवा शर्तों, छंटनी और प्रतिष्ठानों को बंद करने से जुड़े प्रावधानों को समाहित करती है। इसका उद्देश्य नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच औद्योगिक संबंधों को व्यवस्थित करना है।
3. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security)
इसमें भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ और कर्मचारी क्षतिपूर्ति जैसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं से संबंधित प्रावधान हैं। इसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के साथ गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।
4. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code)
इस संहिता में कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य, कामकाज की परिस्थितियों, कार्य के घंटों, अवकाश, कल्याणकारी सुविधाओं तथा ठेका और अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसका उद्देश्य श्रमिकों के लिए सुरक्षित और बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित करना है।
इन संहिताओं का उद्देश्य: चारों श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रम कानूनों को एकीकृत करना, अनुपालन की प्रक्रिया को सरल बनाना तथा श्रमिकों के वेतन, सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और औद्योगिक संबंधों से जुड़े प्रावधानों को व्यवस्थित करना है।





