प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए जरूरी सारी 36 अनुमतियां 30 दिन के भीतर मिलें : शर्मा
पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से रूबरू हुए एफएमपीसीसीआई के अध्यक्ष

भोपाल। बेंगलुरु और मुंबई की तर्ज पर मप्र में भी नए स्टार्टअप्स के लिए फ्लेटेड इंडस्ट्री एरिया चिन्हित किए जाने चाहिए। साथ ही प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए सारे नियम, प्रक्रिया ऑनलाइन किए जाने चाहिए। उद्योग लगाने के लिए आवश्यक 36 अनुमतियां आवेदन करने के 30 दिनों के भीतर मिल जानी चाहिए या मिल गई मानी जानी चाहिए। यह कहना है प्रदेश के शीर्ष औद्योगिक संगठन कहे जाने वाले फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एफएमपीसीसीआई) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दीपक शर्मा का। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से चर्चा में अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए श्री शर्मा ने कहा कि आने वाले दिनों में हम प्रदेश के एकेडमिक इंस्टीट्यूशंस के साथ मिलकर इंडस्ट्रीज-एकेडमिक पार्टनरशिप प्रोग्राम की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस प्रोग्राम के तहत हम प्रदेश की इंडस्ट्रीज को एकेडमिक इंस्टीट्यूशंस की रिसर्च एंड एनालिसिस का कैसे फायदा मिले इस पर काम करेंगे। साथ ही हम प्रयास करेंगे कि इंडस्ट्रीज की डिमांड के मुताबिक ही प्रोफेशनल्स उद्यमियों को मिलें। सारी इंडस्ट्रीज चाहे वह छोटी हो या बड़ी सालभर एक जैसी क्षमता के साथ नहीं चलती है, इसलिए हम प्रदेश के पॉवर सेक्टर से यह चाहते हैं कि हमें जरूरत के हिसाब से ही बिजली मिलनी चाहिए। विद्युत नियामक आयोग में भी इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि को बोर्ड में जगह दी जानी चाहिए। व्यापार-उद्योग का फिजिकल इंटरेक्शन बंद करके उसे ऑनलाइन मोड में लाने की तैयारी की जा रही है।
मप्र में उद्योग-व्यापार के लिए हैं असीम संभावनाएं
श्री शर्मा ने बताया कि ये पूरा कालखंड उद्योग एवं व्यापार जगत के लिए बहुत अपॉर्च्यूनिटी लेकर आ रहा है। वर्ष 1990 के दशक में भारत और चीन की स्थिति लगभग समान थी, लेकिन उस वक्त हमने हड़बड़ी में उदारीकरण के तहत पूरी दुनिया के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे, लेकिन चीन ने अपनी बेहतरीन अंदरुनी तैयारी करने के बाद ही वर्ष 2001 में आकर अपने दरवाजे सिलेक्टेड सेक्टर के लिए खोले वह भी धीरे-धीरे। अब भारत के पास कोविड के बाद फिर दोबारा मौका अमृतकाल के रूप में मिल रहा है। वैसे भी अमेरिका, कनाडा, आॅस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में नई पीढ़ी उद्यमिता में उतनी नहीं आ रही है जितनी पहले आया करती थी। जहां तक मप्र की बात है तो यहां कृषि, माइनिंग, लॉजिस्टिक, मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। अप्रैल के बाद से प्रदेश में चार रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव आयोजित की जा चुकी हैं जिनमें हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव सरकार को मिले हैं। सागर जैसे छोटे शहर में ही 27 हजार करोड़ रु. के निवेश प्रस्ताव मिलने से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में इसका असर धरातल पर उतरता दिखेगा। वहीं केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से मप्र के एग्रीकल्चर सेक्टर और जबलपुर-कानपुर कॉरिडोर से लॉजिस्टिक से लेकर इंडस्ट्रीज सभी को फायदा होगा। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में भी भूमि आवंटन की प्रक्रिया तेज हो रही है।
मप्र को सेंट्रलाइज्ड होने का मिलेगा फायदा
श्री शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित है जिसका लाभ उसे प्राप्त होता है। कई अन्य राज्य जैसे उत्तराखण्ड आदि में परिवहन लागत बहुत ज्यादा होती है। इस दृष्टिकोण से मध्यप्रदेश बहुत फायदे में रहता है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की ऐसी बहुत की कंपनियॉं है जो कि करोड़ों रूपये परिवहन लागत के बचा रही है। यही कारण है कि कई कंपनियॉं जैसे वर्धमान, दावत फूड आदि मध्यप्रदेश में आईं। नई सरकार ने उद्योगों के विकास के लिए तेज गति से काम करना प्रारंभ कर दिया है। जबलपुर, उज्जैन, सागर आदि में इंडस्ट्रीय कानक्लेव करना और करोड़ों रूपये का निवेश लाना एक अच्छी पहल है। सागर से ही 27000 करोड़ निवेश की उम्मीद हैं।
उदयोगों को विभिन्न प्रकार के लाइसेंस 10 साल के लिए मिले
श्री शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश के उद्योगपति अपना समय उत्पादन एवं निर्यात की क्षमता में वृद्धि करने में लगाना चाहते है ना कि अलग-अलग लायसेंस के लिए विभागों के चक्कर लगाने में, इसलिए सरकार को चाहिए कि पेन कार्ड एवं पासपोर्ट आदि की तरह लायसेंस की समय सीमा भी 10 साल एवं अधिक होना चाहिए इसके बाद रिन्यूअल आनलाईन होना चाहिए या फिर 30 दिन में पास ना होने पर डीम्ड अनुमति होनी चाहिए।
आदर्श इंडस्ट्रीयल एरिया की तरह विकसित हों औदयोगिक क्षेत्र
दीपक शर्मा ने कहा कि गोविंदपुरा एवं पीथमपुर इंडस्ट्रीयल एरिया को ‘‘आदर्श इंडस्ट्रीयल’’ एरिया के रूप में विकसित किया गया है जिसमें सरकार ने वहॉ के विकास का अधिकार एसोसिएशन को दिया है। इसका प्रभाव यह हुआ कि इन क्षेत्रों में आधारभूत संरचना का विकास तेजी से हुआ है। इसी तरह मध्यप्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को भी आदर्श इंडस्ट्रीयल एरिया की तरह विकसित किया जाये एवं सभी औद्योगिक क्षेत्रों से अवैध अतिक्रमणों को हटाना चाहिए।
सरकार से किया आग्रह
- सरकार को समय सीमा में काम पूरा करना चाहिए
- सरकार को फ्लैटेड इंडस्ट्रीयल एरिया डेवलप करना चाहिए
- विद्युत नियामक आयोग में भी उद्योगों का एक प्रतिनिधि होना चाहिए
- मैन्युफैक्चरिंग का डाटा एक जगह होना चाहिए जिससे फारवर्ड एवं बैकवर्ड लिंकेज स्थापित किया जा सके
- शिक्षा एवं उद्योग क्षेत्र के बीच समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए





