PLI पर बैंकों में बढ़ा विरोध: अधिकारियों ने उठाई ‘समानता और न्याय’ की मांग

स्केल-IV से ऊपर के अधिकारियों तक सीमित PLI लागू करने पर आपत्ति, बातचीत से समाधान की अपील

विवेक झा, भोपाल। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के सभी घटक संगठनों और केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (CBOA) ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा जारी उस निर्देश का विरोध किया है, जिसमें स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI लागू करने की बात कही गई है।

एसोसिएशन ने इस फैसले को एकतरफा बताते हुए कहा कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब PLI से जुड़ा मामला अभी मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में बिना सहमति और चर्चा के लिया गया फैसला न केवल अनुचित है, बल्कि इससे चल रही बातचीत की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

‘नीति से बढ़ेगी असमानता’

CBOA का कहना है कि प्रस्तावित PLI ढांचा कर्मचारियों के बीच असमानता को बढ़ावा देगा। इससे वरिष्ठ अधिकारियों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिलेगा, जबकि निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों को सीमित फायदा ही मिल पाएगा। एसोसिएशन के अनुसार, इस तरह की व्यवस्था से कर्मचारियों के बीच असंतोष और असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो बैंकिंग कार्यप्रणाली पर भी असर डाल सकती है।

वित्तीय बोझ और सुशासन पर सवाल

एसोसिएशन ने यह भी आशंका जताई है कि इस प्रकार का PLI मॉडल बैंकों पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाल सकता है। साथ ही, यह सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों के अनुरूप भी नहीं है, क्योंकि इसमें सभी कर्मचारियों के हितों का समान रूप से ध्यान नहीं रखा गया है।

बातचीत से समाधान की मांग

CBOA भोपाल के वाइस प्रेसिडेंट के. के. त्रिपाठी ने जानकारी दी कि एसोसिएशन के महासचिव के. रवि कुमार ने सरकार, इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और सभी बैंकों से अपील की है कि इस निर्णय को फिलहाल स्थगित किया जाए। साथ ही, PLI से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान आपसी संवाद और सहमति के आधार पर किया जाए।

देशभर में एकजुट हो रहे बैंक अधिकारी

यूएफबीयू के बैनर तले विभिन्न बैंक यूनियन और अधिकारी संगठन इस मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले सभी स्तर के कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि बैंकिंग क्षेत्र में संतुलन और पारदर्शिता बनी रहे।

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