मध्यप्रदेश में अभी तेज ठंड नहीं, आखिरी सप्ताह में बढ़ेगी

भोपाल

मध्यप्रदेश में नवंबर में गुलाबी ठंड का असर रहता है। अमूमन 15 से 20 नवंबर के बीच ही पारे में गिरावट होने लगती है। ग्वालियर, जबलपुर, पचमढ़ी, नौगांव, मलांजखंड समेत कई शहरों में पारा 8 डिग्री तक पहुंच जाता है, जबकि भोपाल-इंदौर में पारा 10 से 11 डिग्री के बीच रहता है। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो इस बार भी ऐसा ही ट्रेंड रहने का अनुमान है।

 पचमढ़ी में रात का तापमान 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी में न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जो सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस कम रहा।

मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एचएस पांडे ने बताया कि वर्तमान में मध्य प्रदेश के मौसम को प्रभावित करने वाली कोई प्रभावी मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ भी कम तीव्रता वाले आ रहे हैं। इस वजह से मौसम के मिजाज पर विशेष प्रभाव नहीं हो रहा है। वर्तमान में हवाओं का रुख उत्तर-पूर्वी, पूर्वी एवं उत्तर-दक्षिणी हो रहा है। इस वजह से नमी आने के कारण बीच-बीच में बादल भी आ जाते हैं।

उत्तरी हवाओ-पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव

एमपी मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर भारत और हिमाचल प्रदेश के ऊपर एक्टिव वेस्टर्न डिस्टरबेंस लौट गया है। इस कारण रात में हवाओं का रुख उत्तर-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी हो गया है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने तूफान से ठंडी हवाएं आ रही हैं, इसके प्रभाव से अगले एक दो दिन में तापमान  गिर सकता है।उत्तर भारत में 2 नवंबर तक एक पश्चिमी विक्षोप एक्टिव होगा, जिसका कोई विशेष प्रभाव मध्यप्रदेश पर नहीं होगा, लेकिन इससे पारे में वृद्धि होगी। आज शनिवार से भी एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, इसके चलते 1 नवंबर तक तापमान में फिर से वृद्धि दर्ज की जाएगी। इसके बाद पारे में गिरावट आएगी।

हवाओं की रफ्तार भी काफी मंद बनी हुई है। रात के समय उत्तरी हवाएं चलने के कारण सिहरन बनी हुई है। उधर दिन के समय पूर्वी एवं दक्षिणी हवाएं चलने से दिन का तापमान बढ़ा हुआ है। इस वजह से दिन व रात के तापमान के बीच काफी अंतर भी बना हुआ है। अभी इसी तरह का मौसम बना रहने की संभावना है।

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ राजस्थान के पास द्रोणिका के रूप में बना हुआ है, जबकि दूसरा पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान के आसपास द्रोणिका के रूप में मौजूद है। दोनों पश्चिमी विक्षोभ कमजोर हैं। इस वजह से इनका मौसम पर विशेष असर नहीं हो रहा है। हवाओं का रुख बार-बार बदलता रहने से तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव हो रहा है।

 

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