‘अन्नदाताओं’ के बाद अब ‘आवासदाताओं’ से सरकार का संवाद, रियल एस्टेट की समस्याओं पर होगा राज्यस्तरीय समाधान सम्मेलन
क्रेडाई भोपाल ने मुख्य सचिव को सौंपा 29 सूत्रीय प्रतिवेदन; रेरा नियुक्तियां जल्द, सभी विभागों के साथ होगा समाधान सम्मेलन, मास्टर प्लान पर अभी भी समय-सीमा तय नहीं

विवेक झा, भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों के बाद अब सरकार ने आवास क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ भी संवाद की पहल शुरू कर दी है। राजधानी भोपाल में गुरुवार को वल्लभ भवन में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने क्रेडाई भोपाल के प्रतिनिधिमंडल के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र की लंबित समस्याओं और व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तृत चर्चा की। लगभग एक घंटे तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे भी मौजूद रहे।
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को 10 पृष्ठों का 29 सूत्रीय प्रतिवेदन सौंपते हुए भोपाल मास्टर प्लान, रेरा, विकास शुल्क, कलेक्टर गाइडलाइन, स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क, संपत्ति कर, बिजली, पर्यावरण स्वीकृतियां, एसटीपी, एफएआर और विकास अनुमतियों से जुड़ी समस्याओं को विस्तार से रखा।
रियल एस्टेट समस्याओं के समाधान के लिए होगा राज्यस्तरीय सम्मेलन
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि रियल एस्टेट और शहरी विकास से जुड़े सभी विभागों की भागीदारी के साथ एक दिवसीय राज्यस्तरीय समाधान सम्मेलन आयोजित करने पर सहमति बनी।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए। सम्मेलन में नगरीय विकास, राजस्व, पंजीयन, ऊर्जा, पर्यावरण, रेरा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, क्रेडाई मध्यप्रदेश तथा प्रदेश के सभी नगर अध्यायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
क्रेडाई ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर लागू सफल नीतियों और अन्य राज्यों के श्रेष्ठ मॉडल का अध्ययन भी सम्मेलन में किया जाए, ताकि मध्यप्रदेश में भी व्यवहारिक और निवेश-अनुकूल नीतियां लागू की जा सकें।
रेरा अध्यक्ष और तकनीकी सदस्य की नियुक्ति जल्द होगी
बैठक में लंबे समय से लंबित रेरा (RERA) से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि रेरा अध्यक्ष और तकनीकी सदस्य की नियुक्ति शीघ्र की जाएगी, जिससे परियोजनाओं से जुड़े लंबित मामलों के निराकरण में तेजी आएगी।
इसके अलावा सीए प्रमाण-पत्रों की गणना में आ रही तकनीकी त्रुटियों, परियोजनाओं को समाप्त घोषित करने की समय-सीमा और अन्य प्रक्रियात्मक कठिनाइयों पर भी व्यावहारिक समाधान निकालने का भरोसा दिया गया।
कारोबार सुगमता के तहत एनओसी 12 से घटकर तीन
बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि प्रदेश सरकार Ease of Doing Business के तहत निर्माण परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को लगातार सरल बना रही है।
उन्होंने जानकारी दी कि पहले जहां विभिन्न विभागों से 12 से अधिक एनओसी लेना अनिवार्य था, अब उन्हें घटाकर सिर्फ तीन कर दिया गया है। इस संबंध में अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। इससे निर्माण परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिलने और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भोपाल मास्टर प्लान पर नहीं मिली स्पष्ट समय-सीमा
बैठक में क्रेडाई ने राजधानी के नए मास्टर प्लान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। संगठन का कहना था कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं होने के कारण भोपाल का नियोजित विस्तार प्रभावित हो रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सीमित भूमि उपयोग, बढ़ती जमीन की कीमतें और अनुमतियों की बढ़ती लागत के कारण किफायती आवास परियोजनाओं का विकास कठिन होता जा रहा है।
हालांकि इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन सरकार की ओर से नए मास्टर प्लान के प्रकाशन की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई गई। विभाग ने केवल इतना कहा कि मास्टर प्लान में देरी के बावजूद भूमि विकास नियमों के माध्यम से शहरी विकास की गति बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कलेक्टर गाइडलाइन और विकास शुल्क पर भी उठाए सवाल
क्रेडाई ने बैठक में कहा कि कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर बढ़ने वाले विकास शुल्क, स्टाम्प शुल्क और अन्य प्रभारों का सीधा असर मकान खरीदारों पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ती लागत के कारण आम नागरिक के लिए घर खरीदना महंगा होता जा रहा है।
इस पर विभाग ने क्रेडाई से अन्य राज्यों की शुल्क व्यवस्था और मध्यप्रदेश की मौजूदा दरों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करने को कहा, ताकि आवश्यक सुधारों पर विचार किया जा सके।
एसटीपी संचालन और अग्नि सुरक्षा पर विशेष जोर
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि रियल एस्टेट परियोजनाओं में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का नियमित संचालन तथा फायर सेफ्टी के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि अमृत योजना के तहत विकसित सीवरेज नेटवर्क के निकट स्थित परियोजनाओं को निर्धारित शुल्क जमा कर इस व्यवस्था से जोड़ने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्य सचिव को सौंपी ‘कमाल का भोपाल’ रिपोर्ट
बैठक के दौरान क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने मुख्य सचिव को राजधानी के समग्र विकास और सकारात्मक ब्रांडिंग पर आधारित ‘कमाल का भोपाल’ रिपोर्ट भी भेंट की।
उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्य सचिव के निर्देश पर तैयार इस रिपोर्ट में राजधानी के आर्थिक, सामाजिक और शहरी विकास से जुड़े कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें से कुछ सुझावों पर कार्य प्रारंभ हो चुका है, जबकि व्यापक स्तर पर अभी और कार्य किया जाना शेष है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव को राजा भोज की कलात्मक प्रतिमा भी भेंट की गई।
‘आवासदाता’ भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण भागीदार
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने कहा कि जिस प्रकार किसान देश के अन्नदाता हैं, उसी प्रकार रियल एस्टेट क्षेत्र आवास उपलब्ध कराकर समाज के ‘आवासदाता’ की भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र की समस्याओं का सीधा प्रभाव घर खरीदारों, निर्माण श्रमिकों, रोजगार, निवेश, बैंकिंग क्षेत्र और शहरी अधोसंरचना पर पड़ता है। इसलिए इन समस्याओं का समयबद्ध समाधान केवल बिल्डर्स के हित में नहीं, बल्कि व्यापक जनहित और प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए भी आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
बैठक में क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक के साथ संगठन के सचिव सुनील कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष संजीव सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष जयंत भंडारी तथा यूथ क्रेडाई के रौनक साहिता सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य बातें
- मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल से क्रेडाई भोपाल की एक घंटे तक चली महत्वपूर्ण बैठक।
- रियल एस्टेट क्षेत्र की समस्याओं पर 29 सूत्रीय प्रतिवेदन सौंपा।
- सभी संबंधित विभागों के साथ राज्यस्तरीय समाधान सम्मेलन आयोजित करने पर सहमति।
- रेरा अध्यक्ष और तकनीकी सदस्य की नियुक्ति जल्द करने का आश्वासन।
- निर्माण परियोजनाओं के लिए 12 से अधिक एनओसी घटाकर तीन किए जाने की जानकारी।
- भोपाल मास्टर प्लान पर विस्तृत चर्चा, लेकिन सरकार ने प्रकाशन की समय-सीमा स्पष्ट नहीं की।
- कलेक्टर गाइडलाइन, विकास शुल्क और किफायती आवास के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
- मुख्य सचिव को ‘कमाल का भोपाल’ रिपोर्ट एवं राजा भोज की कलात्मक प्रतिमा भेंट की गई।
- क्रेडाई ने कहा— “आवास क्षेत्र की समस्याओं का समाधान प्रदेश के आर्थिक विकास और आम नागरिकों के हित से जुड़ा है।”





