केव टू कोड: BHEL की 1100 एकड़ जमीन पर लिखी जा सकती है भोपाल के AI भविष्य की कहानी

क्रेडाई ‘कमाल का भोपाल’ अभियान ने भूमि विकास में AI लाइटहाउस, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्मार्ट इंडस्ट्रीज और रिसर्च को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई; मनोज मीक बोले- भोपाल की प्राचीन सृजनशीलता और BHEL की इंजीनियरिंग क्षमता को AI युग से जोड़ने का अवसर

BHEL की जमीन को लेकर आगे बढ़ी प्रक्रिया का स्वागत

विवेक झा, भोपाल, 20 सितंबर। भोपाल के औद्योगिक और तकनीकी भविष्य को नई दिशा देने के लिए BHEL की लगभग 1100 एकड़ भूमि को मध्यप्रदेश के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही प्रक्रिया को क्रेडाई के ‘कमाल का भोपाल’ अभियान ने महत्वपूर्ण अवसर बताया है। अभियान का कहना है कि इस भूमि के विकास की योजना केवल औद्योगिक विस्तार तक सीमित न रहकर AI लाइटहाउस, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्मार्ट इंडस्ट्रीज, रिसर्च और उच्च कौशल रोजगार को केंद्र में रखकर तैयार की जानी चाहिए।

क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष और ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर मनोज मीक ने कहा कि जिस भोपाल क्षेत्र की पहचान भीमबेटका की प्राचीन रॉक पेंटिंग्स, साँची की ज्ञान परंपरा और राजा भोज की नगर एवं जल प्रबंधन दृष्टि से रही है, वही शहर अब AI युग की नई औद्योगिक कहानी लिखने की क्षमता रखता है।

‘केव टू कोड’ से प्राचीन प्रतिभा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का विचार

‘कमाल का भोपाल’ अभियान ने इस पूरी परिकल्पना को ‘केव टू कोड’ की अवधारणा से जोड़ा है। इसका मूल विचार भोपाल की प्राचीन सृजनशीलता, वैज्ञानिक सोच और औद्योगिक क्षमता को आधुनिक तकनीक, AI और नए उद्यमों से जोड़ना है।

मीक के अनुसार, राजधानी की वैज्ञानिक प्रतिभा और मौजूदा औद्योगिक क्षमताओं को एक साथ लाया जाए तो इसका लाभ केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को मिल सकता है। उनका कहना है कि BHEL की जमीन इस दिशा में एक बड़े औद्योगिक-तकनीकी इकोसिस्टम की आधारभूमि बन सकती है।

वर्षों की पैरवी को मिला नया आधार

मीक ने बताया कि GIS-2025 से पहले मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत ‘कमाल का भोपाल’ अभियान की रिपोर्ट में BHEL की अतिरिक्त भूमि के पुनर्पयोग, आधुनिक उद्योग, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को लेकर सुझाव दिए गए थे।

उन्होंने बताया कि CREDAI की ओर से दिए गए विभिन्न अभ्यावेदनों में लगभग 2200 एकड़ भूमि पर AI लाइटहाउस और स्मार्ट इंडस्ट्रीज की विस्तृत परिकल्पना प्रस्तुत की गई है।

मीक ने कहा कि भौंरी में प्रस्तावित नॉलेज एंड AI सिटी ‘इकाई’ की पहल के बाद BHEL की भूमि को लेकर आगे बढ़ती प्रक्रिया इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार, शासन-प्रशासन, BHEL प्रबंधन तथा सहयोगी जनप्रतिनिधियों के योगदान के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

AI सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं, बड़े औद्योगिक इकोसिस्टम का नाम

AI आधारित अर्थव्यवस्था के लिए केवल सॉफ्टवेयर और डेटा ही पर्याप्त नहीं होंगे। इसके पीछे सर्वर, बिजली, कूलिंग, नेटवर्किंग और अनेक प्रकार के औद्योगिक उपकरणों की बड़ी व्यवस्था की जरूरत होती है।

प्रेस नोट में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि दुनिया के डेटा सेंटरों की बिजली खपत 2025 के लगभग 485 टेरावॉट-घंटे से बढ़कर 2030 में लगभग 950 टेरावॉट-घंटे हो सकती है। क्रेडाई के अनुसार, यह बढ़ती मांग पावर सिस्टम और ऊर्जा दक्ष उपकरणों के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा कर सकती है।

BHEL की इंजीनियरिंग क्षमता को नए कारोबार से जोड़ने का सुझाव

मीक ने कहा कि भोपाल के पास पहले से ही बड़े औद्योगिक अनुभव का आधार मौजूद है। BHEL की ट्रांसफॉर्मर, मोटर, स्विचगियर और कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी इंजीनियरिंग तथा परीक्षण क्षमताओं को नए उत्पादों और उद्यमों के साथ जोड़ा जा सकता है।

उनके अनुसार, भोपाल केवल AI सॉफ्टवेयर तैयार करने वाले शहर की भूमिका तक सीमित न रहे, बल्कि AI को संचालित करने वाले औद्योगिक उपकरणों और तकनीकी समाधानों की अर्थव्यवस्था में भी अपनी भूमिका तलाश सकता है।

लैब से बाजार तक पहुंचने का रास्ता बनाने की जरूरत

क्रेडाई के अनुसार, भोपाल में ऐसी कई संस्थागत क्षमताएं मौजूद हैं, जिन्हें एक साझा नवाचार व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। CSIR-AMPRI में उद्योगों के लिए मेटल 3D प्रिंटिंग और परीक्षण की सुविधाएं हैं। CIPET भोपाल में डिजाइन, टूलिंग और उत्पाद परीक्षण का आधार उपलब्ध है।

इसी तरह IISER भोपाल में माइक्रोफैब्रिकेशन और मेडिकल इमेजिंग में AI से संबंधित शोध का उल्लेख किया गया है। संस्थान का इनक्यूबेशन केंद्र बाहरी उद्यमियों को भी अवसर प्रदान करता है।

अचारपुरा स्थित IREL रेयर अर्थ मेटल एंड टाइटेनियम थीम पार्क को भी इस तकनीकी इकोसिस्टम की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है। प्रेस नोट के अनुसार, BARC की तकनीकों पर आधारित पायलट और मिनी प्लांट उद्यमियों को तकनीक के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।

आइडिया से प्रोटोटाइप और फिर बाजार तक पहुंचे स्टार्टअप

अभियान का कहना है कि इन संस्थानों की वास्तविक उपयोगिता तब और बढ़ सकती है, जब कोई नया उद्यमी अपना विचार लेकर आए और उसे डिजाइन, प्रोटोटाइप, परीक्षण और औद्योगिक उपयोग तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता मिले।

इसके लिए साझा लैब, मेंटरशिप, कंप्यूटिंग संसाधन, उद्योगों से जुड़ाव और शुरुआती ग्राहकों का नेटवर्क तैयार करने की आवश्यकता बताई गई है।

भौंरी से मोहासा-बाबई तक एक साझा तकनीकी कॉरिडोर की संभावना

मीक ने भौंरी की प्रस्तावित ‘इकाई’, BHEL की इंजीनियरिंग क्षमता, अचारपुरा की मटेरियल टेक्नोलॉजी, गोविंदपुरा-मंडीदीप के उद्योगों और मोहासा-बाबई के पावर एवं रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माण को साझा रिसर्च और स्किलिंग से जोड़ने का सुझाव दिया।

उनके अनुसार, स्थानीय औद्योगिक इकाइयां AI आधारित नए उद्यमों की ग्राहक भी बन सकती हैं। उदाहरण के तौर पर मशीन खराब होने से पहले उसके संकेतों की पहचान, कैमरों से उत्पाद की गुणवत्ता जांचना और उत्पादन प्रक्रिया में ऊर्जा की बर्बादी कम करना जैसे AI समाधान स्थानीय उद्योगों में पायलट किए जा सकते हैं।

1 गीगावॉट AI डेटा सेंटर क्षमता का निवेश संदर्भ

प्रेस नोट में स्पेन की कंपनी सबमर को राज्य की ओर से भविष्य में 1 गीगावॉट तक AI-अनुकूल डेटा सेंटर क्षमता के उद्देश्य से दिए गए आशय-पत्र का भी उल्लेख किया गया है। क्रेडाई के अनुसार, यह निवेश संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ है और भोपाल-आसपास के तकनीकी इकोसिस्टम को व्यापक अवसरों से जोड़ सकता है।

राजधानी होने का लाभ AI स्टार्टअप्स को मिले

क्रेडाई ने कहा कि भोपाल में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की मौजूदगी AI आधारित उद्यमों के लिए वास्तविक समस्याओं पर समाधान विकसित करने का अवसर पैदा कर सकती है।

प्रेस नोट में भोपाल के AI एक्सेलरेटर, गवर्नेंस सैंडबॉक्स और राज्य डेटा सेंटर के डिजिटल ट्विन से जुड़े समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि शहरी सेवाओं, स्वास्थ्य, जल प्रबंधन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सीमित और मापनीय पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं।

ऐसे समाधान सफल होने पर अन्य शहरों में भी लागू किए जा सकते हैं। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को काम के साथ वास्तविक समस्याओं पर तकनीकी समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा।

AI विकास के साथ ऊर्जा और पानी की योजना भी जरूरी

क्रेडाई का मानना है कि AI और डेटा सेंटर आधारित विकास के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। ऊर्जा, पानी, स्टोरेज, भरोसेमंद ग्रिड और दक्ष कूलिंग की दीर्घकालीन योजना भी साथ तैयार करनी होगी।

भोपाल के सौर संसाधनों को रिन्यूएबल पावर और स्टोरेज के साथ जोड़ने की संभावना पर भी जोर दिया गया है। साथ ही, उद्योगों और डेटा सेंटरों के लिए पानी की उपलब्धता, आपूर्ति, पुनः उपयोग और कूलिंग सिस्टम की दक्षता का संयुक्त आकलन करने की जरूरत बताई गई है।

प्राकृतिक विरासत के साथ टेक्नोलॉजी सिटी की पहचान

क्रेडाई ने भोपाल की झीलों, वन विहार नेशनल पार्क और रातापानी टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक परिवेश को शहर की जीवन-गुणवत्ता की महत्वपूर्ण ताकत बताया है।

अभियान का कहना है कि प्राकृतिक संपदा के साथ बेहतर कार्यस्थल, आवास और आवागमन की सुविधाएं विकसित की जाएं तो भोपाल तकनीकी क्षेत्र की प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें शहर में बनाए रखने में सक्षम हो सकता है।

युवाओं के आइडिया को शहर में ही कारोबार बनाने पर जोर

‘कमाल का भोपाल’ अभियान ने भोपाल में आयोजित एंथ्रोपिक क्लॉड बिल्ड डे से जुड़े विमर्श का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय युवाओं में नए तकनीकी विचारों की संभावनाएं हैं। जरूरत इस बात की है कि ऐसे विचारों को मेंटर्स, साझा कंप्यूटिंग संसाधन, लैब और शुरुआती ग्राहक उपलब्ध कराए जाएं।

अभियान के अनुसार, रोजगार की योजना में केवल सॉफ्टवेयर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस, कूलिंग, नेटवर्किंग, साइबर सिक्योरिटी और मशीन संचालन जैसी तकनीकी स्किल्स को भी शामिल किया जाना चाहिए।

‘युवा अपने सपनों के लिए घर छोड़ने को मजबूर न हों’

मनोज मीक ने कहा, “केव-टू-कोड भोपाल की सृजनशीलता को नए समय से जोड़ने का विचार है। भीमबेटका की अभिव्यक्ति, साँची का बोध, विद्वान राजा भोज की नगर दृष्टि और BHEL की इंजीनियरिंग से प्रेरणा लेकर हम ऐसा राजधानी क्षेत्र बना सकते हैं, जहां युवा अपने सपनों के लिए घर छोड़ने को मजबूर न हों।”

उन्होंने कहा कि BHEL की भूमि और उससे जुड़ी सुविधाओं का संयुक्त आकलन करते हुए चरणबद्ध विश्वस्तरीय मास्टर प्लान तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही संस्थानों और उद्योगों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।

सिर्फ निवेश नहीं, रोजगार और स्थानीय कारोबार भी बने पैमाना

मीक ने परियोजना की प्रगति मापने के लिए केवल निवेश राशि को आधार नहीं बनाने की बात कही। उनके अनुसार, इसके साथ चालू उद्यम, स्थानीय खरीद, अप्रेंटिसशिप और वास्तविक रोजगार जैसे परिणामों को भी मापा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि BHEL की भूमि भोपाल के औद्योगिक और तकनीकी भविष्य को आकार देने का महत्वपूर्ण अवसर है। यदि इसे रिसर्च, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्मार्ट इंडस्ट्री और उच्च कौशल रोजगार से जोड़ा जाता है तो राजधानी की अगली पहचान यहां तैयार होने वाले विचारों, उत्पादों और अवसरों से बन सकती है।

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