कोलार में बाबा रामदेव दरबार मंदिर स्थापना दिवस 31 से, जिंद बाबा जयंती महापर्व के रूप में मनाई जाएगी

दो दिवसीय आयोजन में सुंदरकांड, रात्रि जागरण, कन्या पूजन और समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन

भोपाल।

राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित राजहर्ष कॉलोनी में बाबा रामदेव दरबार मंदिर के स्थापना दिवस के अवसर पर 31 जनवरी से दो दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन बाबा रामदेव दरबार मंदिर, रुणिचा धाम सेवा समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है। इस दौरान जिंद बाबा की जयंती को महापर्व के रूप में श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाएगा।

समिति के अध्यक्ष एवं मंदिर के पुजारी राजेश गुरु ने जानकारी देते हुए बताया कि स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत 31 जनवरी को शाम 7 बजे से सुंदरकांड पाठ एवं रात्रि जागरण का आयोजन किया जाएगा। वहीं दूसरे दिन 1 फरवरी को कन्या पूजन के पश्चात शाम 5 बजे से प्रसादी वितरण एवं विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जो देर रात्रि तक चलेगा। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

छुआछूत और भेदभाव के विरोध के प्रतीक हैं बाबा रामदेव

बाबा रामदेव राजस्थान के सुप्रसिद्ध लोक देवता माने जाते हैं। उनका जन्म ऊंडु कश्मीर (बाड़मेर) में हुआ था, जिसे कुछ विद्वान उडूकासमीर भी कहते हैं। उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। बाबा रामदेव को रामसा पीर के नाम से भी जाना जाता है। वे राजा अजमल जी के पुत्र थे और उनकी माता का नाम मैणादे था।

मान्यताओं के अनुसार राव मल्लीनाथ (मारवाड़ के राठौड़ शासक) ने उन्हें पोकरण की जागीर प्रदान की थी। बाबा रामदेव ने कामड़िया पंथ की स्थापना की और अपने जीवन में सामाजिक समरसता, समानता तथा छुआछूत के विरोध का संदेश दिया। वे भैरव नामक राक्षस के संहार के लिए भी प्रसिद्ध हैं।

हिंदू–मुस्लिम एकता के प्रतीक

बाबा रामदेवजी केवल हिंदुओं ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय के भी आराध्य हैं, जो उन्हें रामसा पीर के नाम से पूजते हैं। लोककथाओं के अनुसार मक्का से आए पाँच पीरों ने उनकी दिव्य शक्तियों को देखकर उन्हें रामसा पीर की उपाधि दी और उनके साथ रहने का निर्णय लिया। आज भी रामदेवरा (जैसलमेर) स्थित उनकी समाधि के पास उन पीरों की मजारें मौजूद हैं, जो सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती हैं।

रामदेवरा में लगता है भव्य मेला

बाबा रामदेवजी का समाधि स्थल रामदेवरा (जैसलमेर) में स्थित है, जहाँ भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया से दशमी तक विशाल मेला लगता है। इस मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

समिति ने सभी श्रद्धालुओं और नागरिकों से अपील की है कि वे इस दो दिवसीय आयोजन में शामिल होकर बाबा रामदेवजी के जीवन, संदेश और सामाजिक समरसता की भावना से प्रेरणा लें।

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