पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग, भोपाल में बैंक कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन
UFBU के आह्वान पर सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारी जुटे; बोले- मार्च 2024 के समझौते के बावजूद दो साल से वित्त मंत्रालय में लंबित है प्रस्ताव, मांग नहीं मानी तो राष्ट्रव्यापी हड़ताल तेज करेंगे

विवेक झा, भोपाल, 12 अगस्त। सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर में प्रदर्शन हुए। इसी क्रम में UFBU की भोपाल इकाई के आह्वान पर राजधानी के सैकड़ों बैंक कर्मचारी और अधिकारी शाम करीब 5:15 बजे पंजाब नेशनल बैंक के जोनल ऑफिस, अरेरा हिल्स के सामने एकत्रित हुए। कर्मचारियों ने मांग के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और सभा आयोजित की। बैंक यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि मांग पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा राष्ट्रव्यापी बैंक हड़तालें की जा सकती हैं।

2015 में दूसरे-चौथे शनिवार की छुट्टी से हुई थी शुरुआत
सभा को संबोधित करते हुए यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि पहले बैंक सोमवार से शुक्रवार तक पूरे दिन और प्रत्येक शनिवार को आधे दिन काम करते थे। वर्ष 2015 में सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के बीच सहमति के बाद दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया, जबकि बाकी शनिवार पूर्ण कार्य दिवस रखे गए।
वक्ताओं के अनुसार उस समय डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते विस्तार और बैंक शाखाओं में ग्राहकों की संख्या में कमी को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई थी। साथ ही शेष शनिवारों को भी अवकाश घोषित करने के विषय पर उचित समय पर विचार करने की बात कही गई थी।

मार्च 2024 में बनी थी पांच दिन बैंकिंग की सहमति
बैंक यूनियनों के अनुसार मार्च 2024 के वेतन संशोधन समझौते के दौरान IBA ने सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने पर सहमति दी थी। इसके तहत ग्राहकों के लिए बैंकिंग कारोबार के समय में प्रतिदिन 40 मिनट की वृद्धि करने और उसके बदले शेष शनिवारों को भी बैंक अवकाश घोषित करने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई थी।
यूनियनों का कहना है कि इससे ग्राहकों के लिए उपलब्ध कुल बैंकिंग व्यवसाय के घंटों में कमी नहीं होती, बल्कि सप्ताह के अन्य कार्यदिवसों में अतिरिक्त समय देकर इसकी भरपाई की जानी थी।
दो साल से अधिक समय से वित्त मंत्रालय में लंबित प्रस्ताव
वक्ताओं ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव को विधिवत स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय भेजा गया था, लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। यूनियनों का कहना है कि लगातार प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर UFBU को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
इसी मांग को लेकर 27 जनवरी 2026 को बैंक हड़ताल भी की गई थी, लेकिन इसके बाद भी मामला सरकार के स्तर पर लंबित है।

कर्मचारियों पर बढ़ रहा काम का दबाव
सभा में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के बढ़ते कार्यदबाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन नेताओं ने कहा कि बैंक शाखाओं में कर्मचारियों की कमी और बैंकिंग कारोबार के लगातार बढ़ने के कारण कर्मचारियों तथा अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है।
कई कर्मचारी सामान्य कार्य समय से अधिक समय तक काम कर रहे हैं। वहीं बैंक अधिकारियों को कई बार शनिवार और रविवार को भी काम के लिए बुलाया जाता है। ऐसे में कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance) के लिए पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था जरूरी है।
‘40 मिनट अतिरिक्त काम करने को तैयार’
UFBU नेताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारी और अधिकारी ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने के लिए सहमत हैं। उनका कहना है कि इससे ग्राहकों को मिलने वाले कुल बैंकिंग कारोबार के समय में कोई कमी नहीं होगी।
यूनियनों ने इसे कर्मचारियों के हित के साथ-साथ ग्राहकों की सुविधा से जुड़ी व्यवस्था बताते हुए सरकार से प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देने की मांग की।

कई क्षेत्रों में पहले से लागू है पांच दिन का कार्य सप्ताह
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सप्ताह में पांच दिन कार्य प्रणाली केंद्र एवं राज्य सरकारों के कई कार्यालयों, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), निजी कंपनियों और अनेक उद्योगों में पहले से लागू है। ऐसे में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को इससे वंचित रखना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं का विस्तार होने के बावजूद कर्मचारियों का कार्यभार कम नहीं हुआ है। इसके विपरीत बैंकिंग कारोबार और जिम्मेदारियां बढ़ी हैं।
सरकार ने अनदेखी की तो आंदोलन होगा तेज
UFBU ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग पर लगातार निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन के नेताओं के अनुसार UFBU की आगामी बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और हड़ताल सहित अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की घोषणा की जा सकती है।
UFBU ने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से आगामी आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान भी किया।
भोपाल में बड़ी संख्या में यूनियन पदाधिकारी रहे मौजूद
प्रदर्शन और सभा में फोरम से संबद्ध विभिन्न बैंक यूनियनों के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को संबोधित किया। इनमें संजीव मिश्रा, वी.के. शर्मा, दिनेश झा, प्रवीण मेघानी, दीपक रत्न शर्मा, निर्भय सिंह ठाकुर, संजय कुदेशिया, वी.एस. नेगी, देवेंद्र खरे, मनीष भार्गव, जे.पी. झंवर, सुबिन सिन्हा, मनीष चतुर्वेदी, अनिल कुमार श्रीवास्तव, मनीष भार्गव, अम्बरीश नंदा, हरिशंकर पांडे, सनी श्रीवास्तव, सुमित मिश्रा, विशाल जैन, आस्तिक बाजपेयी, गुणशेखरन, जे.पी. दुबे, कैलाश माखीजानी, राजीव उपाध्याय, महेंद्र गुप्ता, अमित गुप्ता, अमोल अचवाल, वैभव गुप्ता, सनी शर्मा, शैलेन्द्र नरवरे, संतोष मालवीय, राम चौरसिया, डी.के. सिंह, के. वासुदेव सिंह, मनीष यादव, पंकज ठाकुर, अमित शर्मा, शोभित वाडेल, सिद्धार्थ सिंह, वासु जेठानी, अविनाश धमेजा, राशी सक्सेना, दिव्या, खरे शिवानी शर्मा और राजेश्वरी अय्यर सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
UFBU मध्य प्रदेश के कोऑर्डिनेटर वी.के. शर्मा ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की यह मांग लंबे समय से लंबित है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन और बैंकिंग व्यवस्था में हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू किया जाना समय की आवश्यकता है।





