पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करो, भेदभावपूर्ण PLI योजना वापस लो
बैंक कर्मियों का भोपाल में जोरदार प्रदर्शन; 11 सितंबर और 28-30 सितंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल, 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

विवेक झा, भोपाल। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने और स्केल-IV एवं उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई पीएलआई (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) योजना को एकतरफा एवं भेदभावपूर्ण बताते हुए वापस लेने की मांग को लेकर गुरुवार को राजधानी भोपाल में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत सैकड़ों बैंक कर्मचारी और अधिकारी शाम 5:15 बजे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस, अरेरा हिल्स, जेल रोड के सामने एकत्र हुए। कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और सभा आयोजित की।

5 दिन बैंक खुले, कर्मचारियों को भी मिले राहत
सभा में बैंक यूनियन पदाधिकारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से पांच दिन का बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस जायज मांग को सरकार की ओर से अनावश्यक रूप से लंबित किया जा रहा है। बैंकिंग व्यवस्था में तकनीक और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के बावजूद कर्मचारियों को अभी भी मौजूदा कार्य व्यवस्था के तहत काम करना पड़ रहा है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह से कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिल सकेगा। इस मांग पर सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।

PLI योजना पर सबसे ज्यादा नाराजगी
प्रदर्शन में बैंक यूनियनों ने स्केल-IV एवं उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई नई पीएलआई योजना का विरोध किया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जब पीएलआई का मुद्दा सुलह (Conciliation) प्रक्रिया के समक्ष लंबित है, ऐसे समय में सरकार ने बैंकों को इस योजना को लागू करने के लिए बाध्य किया है।
यूनियन नेताओं के मुताबिक यह योजना एकतरफा और भेदभावपूर्ण है। उनका आरोप है कि योजना के माध्यम से बैंक अधिकारियों के एक छोटे वर्ग को अनुपातहीन रूप से अधिक प्रोत्साहन राशि देकर लाभ पहुंचाया जा रहा है। इससे बैंक कर्मचारियों के बीच विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है।

व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन का भी विरोध
वक्ताओं ने कहा कि सरकार व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी Individual Performance Based Incentive की नीति को भी आगे बढ़ा रही है। यूनियनों का कहना है कि बैंकिंग व्यवस्था सामूहिक टीमवर्क पर आधारित है और कर्मचारियों के योगदान को अलग-अलग वर्गों में बांटकर प्रोत्साहन देने की नीति उचित नहीं है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि पीएलआई जैसी योजनाओं में पारदर्शिता और समानता जरूरी है। किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले कर्मचारी संगठनों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की जानी चाहिए।

पेंशन से भर्ती तक कई मुद्दे लंबित
सभा में बैंक कर्मियों ने केवल पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह और पीएलआई का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि लंबे समय से लंबित कई अन्य मांगों को भी सामने रखा। इनमें पेंशन अपडेशन, पेंशनभोगियों के एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, NPS को OPS में बदलना और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान डीए योजना प्रमुख हैं।
इसके अलावा पर्याप्त संख्या में क्लर्क, सब-स्टाफ और आर्म्ड गार्ड्स की भर्ती करने की मांग भी की गई। यूनियन नेताओं ने कहा कि बैंक शाखाओं में कर्मचारियों की कमी का असर सीधे कामकाज और ग्राहकों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है। ऐसे में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने की मांग
बैंक यूनियनों ने ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा में वृद्धि की मांग भी उठाई। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों से जुड़े आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के कई मुद्दे अभी तक लंबित हैं। इनका समाधान किए बिना सरकार अगले वेतन संशोधन समझौते को जल्द पूरा करने का प्रयास कर रही है, जो यूनियनों को स्वीकार्य नहीं है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि पहले लंबित मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए और उसके बाद ही अगले वेतन संशोधन से जुड़े विषयों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए आने वाले महीनों में राष्ट्रव्यापी हड़तालों का ऐलान किया है। फोरम के अनुसार 11 सितंबर 2026 को एक दिन की राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल, इसके बाद 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को लगातार तीन दिन राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल की जाएगी।
यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल शुरू करने की घोषणा की गई है। इससे बैंकिंग सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
यूनियनों से आंदोलन में बड़ी भागीदारी की अपील
सभा में वक्ताओं ने सभी संबद्ध यूनियनों से अपने सदस्यों की अधिक से अधिक संख्या में रैलियों, प्रदर्शनों, हड़तालों और अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। नेताओं ने कहा कि मौजूदा आंदोलन बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के लंबित मुद्दों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण और निर्णायक है।
इन नेताओं ने किया संबोधित
भोपाल में आयोजित सभा को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस में शामिल विभिन्न बैंक यूनियनों के पदाधिकारियों संजीव मिश्रा, वीके शर्मा, नजीर कुरैशी, अम्बरीश नंदा, दिनेश झा, प्रवीण मेघानी, दीपक रत्न शर्मा, विशाल जैन, वीएस नेगी और सुबीन सिन्हा सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की मांगों पर सरकार और बैंक प्रबंधन को गंभीरता से विचार करते हुए द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है और आने वाले दिनों में प्रदर्शन तथा हड़ताल को और प्रभावी बनाने की तैयारी की जाएगी।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बैंककर्मी रहे मौजूद
प्रदर्शन एवं सभा में संजीव मिश्रा, वीके शर्मा, सुबिन सिन्हा, प्रवीण मेघानी, जेपी झंवर, नजीर कुरैशी, अम्बरीष नंदा, दीपक रत्न शर्मा, दिनेश झा, संदीप चौबे, विशाल जैन, वीएस नेगी, पंकज ठाकुर, गुणशेखरन, वैभव गुप्ता, सनी शर्मा, जितेंद्र दोहरे, इमरतलाल रायकवार, क्षितिज तिवारी, लता भारती, स्वप्निल चतुर्वेदी, राहुल सोनकुंवर, जितेंद्र श्रीवास्तव, जेपी दुबे, सत्येंद्र चौरसिया, राकेश नायक, मनीष खरे, आलोक पटेल, प्रियंका गुप्ता, रजनीकांत श्रीवास्तव, प्रशांत पाटिल, आदिश जैन, आनंद भोजवानी, राजेश खोबरागड़े, अर्पिता कपूर, किरण ठाकुर, विशाल धमेजा, विजय चोपड़े, डीके सिंह, मनीष यादव, मोहन मालवीय, राजेश्वरी अय्यर, मनीष भार्गव, नीरज कुमार, केशव धाकड़, कृतिका शर्मा, अशोक कुमार पंचोली, कैलाश माखीजानी, दीप्ति सीतलानी, वैशाली मैडम, आस्तीक वाजपेई, देवेंद्र खरे, बृजेंद्र सिंह, जीत सिंह नागर, विजयपाल, अभिषेक सिंह, सुनील सेवानी, राजीव उपाध्याय, देवीदास अहिरवार, राजेश अहिरवार, शाहिद खान, प्रशांत भाई, अमित प्रजापति, संजय भामी, कपिला मैडम, रश्मि तिवारी, सतीश चौबे, अमित गुप्ता, अमित शर्मा, सिद्धार्थ सिंह, वासुदेव जेठानी, भामा चौधरी, दिव्या खरे, पल्लवी शर्मा, रवीना मिश्रा, श्रेया पाठक, राशि सक्सेना, शिवानी शर्मा, राम चौरसिया, राज भारती, प्रेरणा गौर, श्रुति मैडम, अनामिका स्वर्णकार, देवेंद्र दांगी, अंकित पुरोहित, आकृति राजपूत, सपना मैडम, सुमित मिश्रा, हितेश कुम्हरे, अपूर्वा श्रीवास्तव, मोनिका गुप्ता, अनिमेष कुमार, टीएन विन्डैया, मनीष चतुर्वेदी, हरिशंकर पांडे, विनय शुक्ला, श्रेया पाठक, सौरभ मिश्रा, प्रतीक अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस दौरान कर्मचारियों ने एकजुटता के साथ अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।





