बैंक हड़ताल से प्रदेश में बैंकिंग ठप, भोपाल में 3 हजार कर्मचारियों ने निकाली रैली
पांच दिवसीय बैंक सप्ताह लागू करने और भेदभावपूर्ण PLI योजना वापस लेने की मांग; UFBU का ऐलान—मांगें नहीं मानीं तो 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन

विवेक झा, भोपाल, 11 सितंबर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर शुक्रवार को हुई राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का व्यापक असर बैंकिंग सेवाओं पर पड़ा। सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के करीब 8 लाख कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल में शामिल हुए। इसके चलते देशभर में बैंक शाखाओं का कामकाज प्रभावित रहा। मध्य प्रदेश में लगभग 40 हजार और राजधानी भोपाल में करीब 5 हजार बैंक कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल पर रहे। दिनभर बैंक शाखाओं के बाहर ताले लटके रहे।

भोपाल में सुबह से शुरू हुआ प्रदर्शन
राजधानी में हड़ताली बैंक कर्मचारी और अधिकारी सुबह 10 बजे पंजाब नेशनल बैंक, इंदिरा प्रेस कॉम्प्लेक्स शाखा के सामने एकत्रित हुए। यहां कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रेस कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में करीब 3 हजार बैंक कर्मचारियों ने रैली निकाली।
रैली में कर्मचारी दो-दो की पंक्तियों में अनुशासित तरीके से चल रहे थे। उनके हाथों में मांगों से संबंधित प्लेकार्ड और लाल झंडे थे। गगनभेदी नारों के बीच निकली रैली ने पूरे क्षेत्र का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद बैंक कर्मचारियों ने प्रभावी सभा आयोजित कर अपनी मांगों और सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई।

सात बैंक संगठनों के संयुक्त मंच का आंदोलन
UFBU में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के सात प्रमुख संगठन शामिल हैं। इनमें ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन, बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन और इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस शामिल हैं।
संगठनों ने हड़ताल के माध्यम से पांच दिवसीय बैंक सप्ताह लागू करने, सरकार की एकतरफा और भेदभावपूर्ण प्रोडक्टिविटी लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना वापस लेने, यूनियनों के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर PLI योजना में संशोधन करने तथा अन्य लंबित मुद्दों का समाधान करने की मांग उठाई।

मार्च 2024 के समझौते के बाद भी फैसला लंबित
सभा में वक्ताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारी सोमवार से शुक्रवार तक पूरे दिन और शनिवार को आधे दिन काम करते रहे हैं। मई 2015 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक प्रबंधन के साथ हुए समझौते में पहले चरण में प्रत्येक माह के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया था। इसके बदले शेष शनिवारों को आधे दिन के स्थान पर पूरे दिन काम करने पर सहमति बनी थी। साथ ही भविष्य में सभी शनिवारों को अवकाश देने की दिशा में प्रयास करने का आश्वासन दिया गया था।
नवंबर 2020 में हुए समझौते में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इसके बाद वेतन पुनरीक्षण वार्ता के दौरान मार्च 2024 में हुए समझौते में शेष शनिवारों को भी अवकाश घोषित करने पर सहमति बनी। इसके बदले यूनियनों ने सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य समय देने पर सहमति दी थी।
वक्ताओं के अनुसार, यह प्रस्ताव भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा गया है, लेकिन ढाई वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी मामला लंबित है।

बैंकिंग घंटों में कमी नहीं होने का दावा
UFBU नेताओं ने कहा कि पांच दिवसीय बैंक सप्ताह लागू होने से ग्राहकों के लिए बैंकिंग के कुल कार्य घंटों में कमी नहीं होगी। सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य समय के कारण बैंकिंग सेवाओं के निर्धारित घंटे पूरे किए जा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों, भारतीय रिजर्व बैंक, एलआईसी, जीआईसी, नाबार्ड, निजी कंपनियों तथा शेयर, मुद्रा और विदेशी मुद्रा बाजार में पहले से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। बैंकों में भी महीने के दो शनिवार पहले से अवकाश रहते हैं। ऐसे में केवल शेष शनिवारों को अवकाश घोषित करने की मांग की जा रही है।

कार्य-जीवन संतुलन को बताया जरूरी
वक्ताओं ने कहा कि बैंकिंग कार्य लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है। कर्मचारियों और अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद बैंक कर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में भी ग्राहकों को सेवाएं दी हैं। कोरोना महामारी के दौरान भी बैंक कर्मचारी और अधिकारी लगातार काम करते रहे।
UFBU ने कहा कि कर्मचारियों के उचित कार्य-जीवन संतुलन के लिए पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना जरूरी है। संगठन का आरोप है कि अन्य क्षेत्रों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू होने के बावजूद बैंक कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

PLI योजना को लेकर भी नाराजगी
सभा में बैंक यूनियनों ने सरकार की PLI योजना पर भी सवाल उठाए। वक्ताओं ने इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण बताते हुए वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि PLI से संबंधित नीतिगत बदलाव यूनियनों के साथ द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वेतन समझौते के समय उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान नहीं हो सका था। इन्हें शेष लंबित मुद्दों के रूप में आगे उठाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब तक इन पर ठोस प्रगति नहीं हुई है।
भर्ती से लेकर पेंशन तक कई मांगें लंबित
UFBU ने बैंकों में क्लेरिकल और सब-स्टाफ की पर्याप्त भर्ती करने की मांग की। इसके अलावा नई पेंशन व्यवस्था यानी NPS समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने, NPS में बैंकों के अतिरिक्त 4 प्रतिशत योगदान पर आयकर छूट देने, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाने और पेंशन अपडेशन की मांग भी उठाई गई।
संगठन ने पेंशन पर समान महंगाई भत्ता लागू करने, नवंबर 2022 से पहले के पेंशनरों के लिए एक्स-ग्रेशिया में संशोधन करने, सभी निजी बैंकों में एक्स-ग्रेशिया लागू करने और बैंकों में वर्कमैन डायरेक्टर तथा ऑफिसर डायरेक्टर के पद रिक्त रखने की प्रवृत्ति समाप्त करने की मांग की।
इसके साथ ही लीव बैंक व्यवस्था लागू करने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम बैंकों द्वारा वहन करने की मांग भी रखी गई।
सुलह बैठकों में नहीं बनी सहमति
वक्ताओं ने बताया कि 8 और 9 सितंबर को मुख्य श्रम आयुक्त तथा उप मुख्य श्रम आयुक्त की ओर से सुलह बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में वित्त मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए। हालांकि, पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन या स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं मिलने के कारण हड़ताल टालने पर सहमति नहीं बन सकी।
UFBU नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार और बैंक प्रबंधन के रवैये के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने हड़ताल के कारण ग्राहकों को हुई परेशानी पर खेद जताते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदारी केंद्र सरकार की नीतियों की है।
नेताओं ने दी आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी
सभा को बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों के नेताओं के अलावा केंद्रीय श्रमिक संगठनों, केंद्र और राज्य कर्मचारियों तथा बीमा कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। इनमें संजीव मिश्रा, वीके शर्मा, नजीर कुरैशी, केके त्रिपाठी, प्रवीण मेघानी, संजय कुदेशिया, विशाल धमेजा, वीएस नेगी, दिनेश झा, विशाल जैन, अनिल कुमार श्रीवास्तव, शिवशंकर मौर्या, संजय मिश्रा, श्याम कस्तूरे, निर्भय सिंह ठाकुर, जेपी झवर, सुबिन सिन्हा, पंकज ठाकुर, अंबरीश नंदा, कुलदीप स्वर्णकार, गुणशेखरन, देवेंद्र खरे, दीपक नायर, सुमित मिश्रा, कैलाश माखीजानी, महेंद्र गुप्ता, अमित गुप्ता, जसविंदर बेरासिया, मनीष चतुर्वेदी, टी एन वेंडीया, पुष्कर, प्रणिता, आयुषी, मनीष भार्गव, आस्तिक बाजपेई, सत्येंद्र चौरसिया, दिव्या खरे, राशि सक्सेना, सुनील देसाई, रामकुमार साहू, अमोल अचवाल और वैभव गुप्ता सहित अन्य शामिल रहे।
UFBU मध्य प्रदेश के कोऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने कहा कि यदि मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो 28, 29 और 30 सितंबर को राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल की जाएगी। इसके बाद 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन बैंक हड़ताल शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि आगामी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। संगठन ने शुक्रवार की सफल हड़ताल के लिए बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की एकजुटता को बधाई दी।
ये हैं मुख्य मांगें
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पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू किया जाए।
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सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित किया जाए।
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सरकार की एकतरफा और भेदभावपूर्ण PLI योजना वापस ली जाए।
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PLI योजना में संशोधन के लिए बैंक यूनियनों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की जाए।
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बैंकों में क्लेरिकल और सब-स्टाफ की पर्याप्त भर्ती की जाए।
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नई पेंशन योजना (NPS) समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू की जाए।
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NPS में बैंकों के अतिरिक्त 4 प्रतिशत योगदान पर आयकर छूट दी जाए।
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ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाई जाए।
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पेंशन का अपडेशन किया जाए।
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पेंशन पर समान महंगाई भत्ता (DA) लागू किया जाए।
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नवंबर 2022 से पहले के पेंशनरों के एक्स-ग्रेशिया में संशोधन किया जाए।
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सभी निजी बैंकों में एक्स-ग्रेशिया की व्यवस्था लागू की जाए।
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बैंकों में वर्कमैन डायरेक्टर और ऑफिसर डायरेक्टर के पद रिक्त रखने की प्रवृत्ति समाप्त की जाए।
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बैंकों में लीव बैंक की व्यवस्था लागू की जाए।
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सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम बैंक प्रबंधन वहन करे।
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वेतन समझौते से जुड़े सभी शेष लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए।





