भोपाल चैंबर चुनाव में बड़ा बदलाव, अब 2 साल पुराने सदस्य भी लड़ सकेंगे चुनाव
वार्षिक साधारण सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित; पहले 5 साल की सदस्यता थी जरूरी, गोविंद गोयल बोले- फैसले से चैंबर की कार्यप्रणाली में अधिक सदस्यों की भागीदारी का रास्ता खुलेगा

विवेक झा, भोपाल, 30 सितंबर। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की कार्यकारिणी का चुनाव लड़ने के नियम में बड़ा बदलाव किया गया है। अब चैंबर के कम से कम 2 वर्ष पुराने सदस्य भी कार्यकारिणी सदस्य का चुनाव लड़ सकेंगे। पहले चुनाव लड़ने के लिए कम से कम 5 वर्ष से चैंबर का सदस्य होना अनिवार्य था। बुधवार को गुजराती समाज भवन, टीटी नगर में आयोजित वार्षिक साधारण सभा में सदस्यता अवधि को 5 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
चैंबर अध्यक्ष गोविंद गोयल ने कहा कि इस बदलाव से चैंबर की कार्यप्रणाली में अधिक सदस्यों की भागीदारी का मार्ग खुलेगा और नए सदस्यों को भी संगठन में जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलेगा।

5 साल की जगह अब 2 साल की सदस्यता
वार्षिक साधारण सभा में चैंबर की प्रबंध समिति की ओर से पहले पारित उस प्रस्ताव को आमसभा के सामने रखा गया, जिसमें कार्यकारिणी सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित सदस्यता अवधि में बदलाव का प्रावधान था।
इस पर सदस्यों के बीच विचार-विमर्श के बाद न्यूनतम सदस्यता अवधि को 5 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया। आमसभा ने इसे सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।
अब जिन सदस्यों को चैंबर की सदस्यता लिए कम से कम 2 वर्ष पूरे हो चुके हैं, वे कार्यकारिणी सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए पात्र होंगे।

नए सदस्यों की भागीदारी का रास्ता खुलेगा
चैंबर अध्यक्ष गोविंद गोयल के अनुसार नियम में बदलाव का उद्देश्य संगठन की कार्यप्रणाली में अधिक सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। पांच वर्ष की सदस्यता की अनिवार्यता के कारण चुनाव में भागीदारी का दायरा सीमित था, जिसे अब कम किया गया है।
दो वर्ष की सदस्यता पूरी कर चुके सदस्यों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलने से चैंबर की प्रबंध समिति में नए सदस्यों के आने की संभावना बढ़ेगी।
भोपाल मास्टर प्लान पर व्यापारियों से सुझाव मांगे
वार्षिक साधारण सभा में भोपाल के नए मास्टर प्लान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। चैंबर अध्यक्ष गोविंद गोयल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी किए जाने का उल्लेख करते हुए व्यापारियों से अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और जरूरतों के संबंध में सुझाव मांगे।
उन्होंने व्यापारियों से कहा कि वे मास्टर प्लान से जुड़ी अपनी राय, सुझाव और आपत्तियां लिखित रूप में चैंबर को उपलब्ध कराएं।

15 अक्टूबर तक भेज सकेंगे सुझाव
चैंबर ने व्यापारियों से सुझाव और आपत्तियां 15 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
गोयल ने कहा कि अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों से मिलने वाले सुझावों को एकत्रित कर चैंबर की ओर से संबंधित विभागों और उचित मंच के समक्ष रखा जाएगा। इसमें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग सहित संबंधित विभागों के सामने व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं और आवश्यकताओं को रखने की बात कही गई है।
व्यापारिक क्षेत्रों की जरूरतों को मास्टर प्लान में शामिल कराने की पहल
चैंबर का कहना है कि नए मास्टर प्लान में व्यापारिक क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को भी उचित स्थान मिलना चाहिए।
इसके लिए व्यापारियों से क्षेत्रवार सुझाव मांगे जा रहे हैं। इनमें संबंधित बाजार की जरूरतों, व्यापारिक गतिविधियों और भविष्य के विकास से जुड़े मुद्दों को शामिल किया जा सकता है। प्राप्त सुझावों को संकलित कर संबंधित फोरम के सामने रखने की योजना है।
AGM में वित्तीय प्रस्तावों को भी मंजूरी
वार्षिक साधारण सभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके साथ विभिन्न वैधानिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
सभा में पिछली वार्षिक साधारण सभा की कार्यवाही का अनुमोदन, अंकेक्षक की पुनर्नियुक्ति तथा ऑडिट रिपोर्ट और बैलेंस शीट का अनुमोदन भी किया गया।
अजय देवनानी ने किया सभा का संचालन
वार्षिक साधारण सभा का संचालन अजय देवनानी ने किया। बैठक में चैंबर अध्यक्ष गोविंद गोयल के अलावा कमल पंजवानी, आदित्य मनया जैन, कृष्ण कुमार बांगड़, संजीव जैन, आदित्य सिंह, अनुराग जैन पवैया, सुनील पंजाबी, अमित जैन सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
अब दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
वार्षिक साधारण सभा में लिए गए दोनों फैसले चैंबर की आगामी गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। एक ओर कार्यकारिणी चुनाव में भागीदारी की पात्रता 5 से घटाकर 2 वर्ष की गई है, वहीं दूसरी ओर नए भोपाल मास्टर प्लान को लेकर व्यापारियों से सुझाव जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
अब देखना होगा कि 15 अक्टूबर तक व्यापारियों से कितने सुझाव और आपत्तियां प्राप्त होती हैं और उन्हें चैंबर किस तरह संबंधित विभागों और शासन के सामने प्रस्तुत करता है।





