मजदूर दिवस पर भोपाल में गूंजे इंकलाबी नारे, श्रमिकों ने श्रम कानूनों की रक्षा का लिया संकल्प

नीलम पार्क में सैकड़ों मजदूर-कर्मचारी जुटे, शिकागो के शहीदों को दी श्रद्धांजलि; नए लेबर कोड्स और बेरोजगारी के खिलाफ जताया विरोध

विवेक झा, भोपाल, 1 मई 2026। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में श्रमिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन और सभा का आयोजन किया। मई दिवस समारोह समिति भोपाल के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न श्रमिक संगठनों, कर्मचारी संघों और सामाजिक समूहों से जुड़े सैकड़ों लोग शामिल हुए।

शाम करीब 5 बजे जहांगीराबाद स्थित नीलम पार्क में एकत्रित हुए मजदूरों, कर्मचारियों और अधिकारियों ने “दुनिया के मेहनतकशों एक हो”, “शिकागो के अमर शहीदों को लाल सलाम” और “अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस जिंदाबाद” जैसे नारों के साथ वातावरण को इंकलाबी रंग में रंग दिया। कार्यक्रम स्थल लाल झंडों, पोस्टरों, बैनरों और प्ले कार्ड्स से सजा हुआ था, वहीं लाल परिधान पहने मेहनतकशों की उपस्थिति आकर्षण का केंद्र बनी रही।

रैली और सभा में दिखा श्रमिक एकजुटता का प्रदर्शन

नीलम पार्क में एकत्रीकरण के बाद श्रमिकों ने पार्क परिसर में ही एक इंकलाबी रैली निकाली, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। रैली के बाद आयोजित सभा में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे।

सभा को वी.के. शर्मा, एस.एस. मौर्य, प्रमोद प्रधान, विनोद लोगरिया, यशवंत पुरोहित, दीपक रत्न शर्मा, संजय मिश्रा, आर.जी. पांडे, पूषण भट्टाचार्य, भगवान स्वरूप कुशवाह सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।

शिकागो के शहीदों के संघर्ष को किया याद

वक्ताओं ने कहा कि 1 मई 2026 को दुनिया भर के श्रमिक मई दिवस की 140वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। इस अवसर पर शिकागो के हेयमार्केट स्क्वायर में हुए श्रमिकों के नरसंहार को याद किया गया, जहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर गोलियां चलाई गई थीं।

उन्होंने बताया कि मजदूरों के खून से सफेद झंडे लाल हो गए थे, जो आज श्रमिक आंदोलन के लाल झंडे का प्रतीक बन चुका है। वक्ताओं ने कहा कि मई दिवस हमें एकता, संघर्ष और बलिदान के उस इतिहास को याद दिलाता है, जिसे आगे बढ़ाने का संकल्प लेना जरूरी है।

श्रम कानूनों और यूनियन अधिकारों पर चिंता

सभा में वक्ताओं ने मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज श्रमिकों का शोषण बढ़ रहा है। कम वेतन, नौकरी की असुरक्षा और ट्रेड यूनियन के अधिकारों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, जिससे पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां भी श्रमिक हितों के खिलाफ हैं और नए श्रम संहिता (लेबर कोड्स) के जरिए श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि इन कानूनों से यूनियन बनाना कठिन होगा और मजदूरों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

सार्वजनिक क्षेत्र और रोजगार पर भी उठाए सवाल

सभा में यह भी कहा गया कि भारत जैसे युवा देश में रोजगार सृजन की जरूरत है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करने की नीतियों के कारण रोजगार के अवसर घट रहे हैं। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

वक्ताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा करने और युवाओं के लिए रोजगार बढ़ाने के लिए संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।

युद्ध के खिलाफ और शांति के पक्ष में आवाज

सभा में श्रमिक संगठनों ने युद्ध का विरोध करते हुए शांति और सह-अस्तित्व का समर्थन किया। वक्ताओं ने कहा कि युद्ध हमेशा विनाशकारी होता है और इसका सबसे अधिक असर श्रमिकों और आम जनता पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि युद्ध पूंजीवाद और साम्राज्यवाद की रणनीति है, जिसका विरोध करना जरूरी है।

संघर्ष जारी रखने का आह्वान, लिया संकल्प

सभा के अंत में सभी श्रमिकों और संगठनों ने शिकागो के अमर शहीदों के संघर्ष से प्राप्त श्रम कानूनों की रक्षा करने का सामूहिक संकल्प लिया। साथ ही केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम में एटक, सीटू, एआईयूटीयूसी, बैंक, बीमा, बीएसएनएल, मेडिकल रिप्रजेंटेटिव, पेंशनर्स एसोसिएशंस, हम्माल मजदूर सभा, आंगनवाड़ी, किसान, महिला, छात्र, नौजवान, लेखक, संस्कृति कर्मी और रंगकर्मियों सहित विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी रही।

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