मध्यप्रदेश में बैंकों का पैसा कहां पहुंच रहा, कहां नहीं, क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात की बड़ी खाई
सिंगरौली में जमा 100 रुपए पर सिर्फ 13 रुपए का ऋण, आगर-मालवा में 100 रुपए जमा पर 229 रुपए का कर्ज; 24 जिलों का CD रेशियो 100% से ऊपर
विवेक झा, भोपाल। मध्यप्रदेश में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार लगातार हो रहा है, लेकिन बैंकों द्वारा जमा राशि के मुकाबले ऋण वितरण (क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो) में जिलों के बीच भारी असमानता सामने आई है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की मार्च 2026 तक की रिपोर्ट बताती है कि जहां आगर-मालवा जिले में प्रत्येक 100 रुपए की जमा राशि पर करीब 229 रुपए का ऋण दिया जा रहा है, वहीं सिंगरौली में 100 रुपए की जमा पर केवल 12.72 रुपए का कर्ज वितरित हो रहा है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि प्रदेश का औसत क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो 83.20 प्रतिशत है, लेकिन कई जिले इससे काफी ऊपर और कई बहुत नीचे हैं।
क्या होता है CD रेशियो और क्यों है महत्वपूर्ण
क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो यह बताता है कि बैंक जमा की गई राशि का कितना हिस्सा ऋण के रूप में बाजार में वापस दे रहे हैं। यदि किसी जिले में यह अनुपात अधिक है तो इसका अर्थ है कि वहां उद्योग, व्यापार, कृषि और अन्य क्षेत्रों में बैंक अधिक निवेश कर रहे हैं। वहीं कम CD रेशियो यह संकेत देता है कि जिले से जमा तो हो रही है, लेकिन उसी अनुपात में ऋण नहीं दिया जा रहा। इससे स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और निवेश की गति प्रभावित होती है।
आगर-मालवा बना प्रदेश का नंबर-1 जिला
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में सबसे अधिक CD रेशियो आगर-मालवा का 228.50 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसके बाद शाजापुर (184.49%), राजगढ़ (170.21%), रायसेन (144.08%), हरदा (141.69%), रतलाम (135.23%), देवास (135.05%), सीहोर (129.60%) और इंदौर (102.43%) प्रमुख जिलों में शामिल हैं। इन जिलों में बैंक जमा राशि से कहीं अधिक ऋण वितरित कर रहे हैं, जो मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बेहतर क्रेडिट मांग का संकेत है। कुल 24 जिलों का CD रेशियो 100 प्रतिशत से अधिक है।
सिंगरौली सबसे पीछे, छह जिले 40 प्रतिशत से भी नीचे
प्रदेश के छह जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। सिंगरौली का CD रेशियो केवल 12.72 प्रतिशत है, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम है। इसके अलावा मऊगंज (24.33%), अनूपपुर (32.51%), निवाड़ी (32.84%), उमरिया (34.58%) और सीधी (39.50%) भी 40 प्रतिशत से नीचे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जिलों में जमा राशि की तुलना में ऋण वितरण बेहद कम है, इसलिए यहां बैंकिंग हस्तक्षेप और वित्तीय समावेशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
भोपाल-जबलपुर जैसे बड़े शहर भी 100% से नीचे
राजधानी भोपाल का CD रेशियो 74.52 प्रतिशत है, जबकि ग्वालियर 69.29 प्रतिशत, जबलपुर 67.62 प्रतिशत, छिंदवाड़ा 80.89 प्रतिशत, बुरहानपुर 87.81 प्रतिशत, मुरैना 87.23 प्रतिशत, सिवनी 83.50 प्रतिशत और सागर 64.23 प्रतिशत के साथ मध्यम श्रेणी में हैं। इन जिलों में बैंकिंग गतिविधियां संतुलित हैं, लेकिन ऋण विस्तार की अभी भी पर्याप्त संभावना बनी हुई है।
प्रदेश का औसत CD रेशियो थोड़ा घटा
रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 में प्रदेश का CD रेशियो 83.51 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 में मामूली गिरावट के साथ 83.20 प्रतिशत रह गया। यानी राज्य स्तर पर ऋण वितरण स्थिर बना हुआ है, लेकिन जिलावार असमानता लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम CD रेशियो वाले जिलों में उद्योग, कृषि, स्वरोजगार और एमएसएमई के लिए ऋण वितरण बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि स्थानीय आर्थिक विकास को गति मिल सके।
कम CD रेशियो वाले जिलों पर रहेगा विशेष फोकस
SLBC ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि जिन जिलों का CD रेशियो 40 प्रतिशत से कम है, वहां क्रेडिट पेनिट्रेशन बढ़ाने, वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और उत्पादक क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाने की आवश्यकता है। इससे न केवल स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार और निवेश में भी तेजी आएगी।
फैक्ट फाइल
प्रदेश का औसत CD रेशियो (मार्च 2026): 83.20%
सबसे अधिक CD रेशियो वाले जिले
- आगर-मालवा : 228.50%
- शाजापुर : 184.49%
- राजगढ़ : 170.21%
- रायसेन : 144.08%
- हरदा : 141.69%
सबसे कम CD रेशियो वाले जिले
- सिंगरौली : 12.72%
- मऊगंज : 24.33%
- अनूपपुर : 32.51%
- निवाड़ी : 32.84%
- उमरिया : 34.58%
- सीधी : 39.50%
अन्य प्रमुख जिले
- भोपाल : 74.52%
- ग्वालियर : 69.29%
- जबलपुर : 67.62%
- इंदौर : 102.43%





