रक्षाबंधन पर बाजार में 30 हजार करोड़ रुपए की रौनक, लोकल राखियों की बढ़ी मांग

कैट का दावा- राखियों का कारोबार 25 हजार करोड़ रुपए, मिठाई-ड्राई फ्रूट्स से लेकर कपड़े, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च हुए अतिरिक्त 5 हजार करोड़ रुपए

नई दिल्ली/भोपााल। रक्षाबंधन इस बार सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते की मिठास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के बाजारों में भी जमकर रौनक लेकर आया। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के आकलन के अनुसार, रक्षाबंधन के दौरान देशभर में करीब 30 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक गतिविधियां हुईं। इनमें अकेले राखियों का कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपए रहा, जबकि मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, परिधान, उपहार, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अन्य सामान पर करीब 5 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए।

त्योहारों से जुड़ी है बड़ी आर्थिक श्रृंखला

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि भारत के त्योहार केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था को भी गति देते हैं। त्योहारों के दौरान किसान, कारीगर, शिल्पकार, छोटे उद्योग, महिला उद्यमी, परिवहन, सेवा क्षेत्र और थोक एवं खुदरा कारोबार से जुड़े लोगों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं।

उन्होंने कहा कि दीपावली, होली, नवरात्र, गणेश उत्सव, दुर्गा पूजा, ईद, क्रिसमस, छठ और रक्षाबंधन जैसे पर्व करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर पैदा करते हैं। इसे कैट ने ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ की मजबूत धुरी बताया है।

लोकल राखियों और स्वदेशी उत्पादों पर जोर

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को व्यापक समर्थन मिला। बाजार में हस्तनिर्मित और स्थानीय स्तर पर तैयार राखियों की मांग बढ़ी। महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों और एमएसएमई द्वारा तैयार उत्पादों को भी उपभोक्ताओं ने प्राथमिकता दी।

उनके अनुसार, इससे स्थानीय कारोबार के साथ-साथ छोटे उद्यमों और उनसे जुड़े परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिली।

मिठाई से इलेक्ट्रॉनिक्स तक बढ़ी खरीदारी

कैट के अनुमान के मुताबिक रक्षाबंधन से जुड़े अतिरिक्त 5 हजार करोड़ रुपए के खर्च में करीब 25% मिठाई और ड्राई फ्रूट्स, 20% परिधान एवं फैशन एक्सेसरीज, 20% एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स, 15% इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, 10% सोना-चांदी एवं आभूषण और शेष 10% अन्य उपहार वस्तुओं पर खर्च हुआ।

छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों में भी रौनक

व्यापारिक संगठनों के अनुसार इस बार महानगरों के साथ छोटे शहरों, अर्ध-शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण बाजारों में भी खरीदारी का उत्साह देखने को मिला। दुकानों पर राखियों के साथ मिठाई, गिफ्ट पैक, कपड़े, कॉस्मेटिक, एक्सेसरीज और अन्य उपहार सामग्री की बिक्री बढ़ी।

व्यापार के साथ रोजगार को भी मिला सहारा

कैट के राष्ट्रीय चेयरमैन बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रक्षाबंधन भावनाओं और रिश्तों के साथ आर्थिक गतिविधियों का भी बड़ा अवसर है। त्योहारों के दौरान स्थानीय दुकानदारों से लेकर कारीगरों, परिवहन और सेवा क्षेत्र तक कारोबार बढ़ता है। इससे रोजगार और उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलता है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर बाजारों में दिखाई दी रौनक स्वदेशी उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती पसंद और स्थानीय व्यापार को मिल रहे समर्थन का संकेत है।

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