राजधानी में आयोजित इंटरनेशनल फेस्टिवल एंड कोलोक्वियम संपन्न
डिग्री नहीं, जीवन की सीख है शिक्षा

भोपाल। भोपाल इंटरनेशनल सेंटर का दो दिनी समारोह इंटरनेशनल फेस्टिवल एंड कोलोक्वियम (बी.आई.एफ.सी) का रविवार को समापन हुआ। मिंटो हॉल में हुए सत्र में पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के वक्तव्य हुए।
सुबह के सत्र में शशिधर कपूर जी द्वारा बीआईसी के विजन के बारे में जानकारी दी गई। पहले सत्र में विषय था इंटरनेशनल एस्पेक्ट्स आफ भोपाल स्मार्ट सिटी ,रामसर साइट एंड अपर लेक। इस पर डॉक्टर विनय श्रीवास्तव,रविंद्र सक्सेना एवं चंद्रकांत नायडू ने अपने विचार रखे।
दूसरे सत्र में एजुकेशन विजन भोपाल 2047 पर चर्चा हुई। इस विषय पर माखनलाल पत्रकारिता विवि के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि भोपाल में जो जीवन शैली की गुणवत्ता है, वह भारत में सबसे अनोखी है। भारतीय भाषाओं में सिलेबस अपनाने की प्राथमिकता मध्य प्रदेश ने ही की है। वह सराहनीय कदम है। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल के कुलपति डॉ सूर्य प्रकाश ने तक्षशिला नालंदा जैसे यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए पुराने जमाने की शिक्षा व्यवस्था पर प्रकाश डाला। जागरण लेक सिटी यूनिवर्सिटी के चांसलर पीके विस्वास ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देना चाहिए। सिर्फ डिग्री ही एकमात्र विकल्प नहीं है सबसे बड़ी शिक्षा जिंदगी की सीख है जिंदगी जीने का सलीका है। डॉ. अग्रवाल ने कहा अगर आपको एजुकेशन को बचाना है तो सबसे पहले प्राइमरी एजुकेशन को ठीक करना होगा।
तीसरे सेशन में मेडिकल विजन ऑफ भोपाल 2047 विषय पर डॉ. अनूप हजेला ने मेडिकल में सभी गवर्नमेंट स्कीम्स के बारे में प्रकाश डाला। किरण फाऊंडेशन ऑर्गन डोनेशन संस्था के डॉ राकेश भार्गव ने कहा लोगों में ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया को समझना और उसके बारे में जानना जरूरी है। क्लिंटन फाउंडेशन से आए शिवम ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के बारे में जानकारी दी। सिद्धांत हॉस्पिटल के डॉ. सुबोध वाष्र्णेय ने पीपीपी मॉडल के बरे में जानकारी दी। चौथे सेशन में एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट पे लविश भंडारी जो इंडिया टुडे के सरवर है उन्होंने ऑनलाइन सेशन कंडक्ट किया।
अगला सत्र था ‘कैलाश सारंग द शेपर्स ऑफ भोपाल’। इस सत्र में राजेंद्र कोठारी ने कैलाश सारंग के संस्मरणों को सुनाया और उनकी महानता के बारे में अवगत कराया। स्व. सारंग के बेटे और प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ऑनलाइन शामिल हुए। उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि कैलाश जी मेरे पिता ही नहीं मेरे फिलॉस्फर, गाइड ,मेरे संरक्षक सभी थे। मैंने उनसे हमेशा सीखा है। उन्होंने भोपाल को रचने और बसने का काम किया है।
गोस्वामी जी ने कैलाश सारंग के जीवन का परिचय दिया उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहां भाजपा की आधारशिला पर कैलाश जी का ही नाम था उन्होंने कयस्थ समाज के लिए बहुत काम किया है। सारंग के बड़े बेटे विवेक सारंग ने कहा कि भोपाल के विलीनीकरण आंदोलन में भी उनकी प्रमुख भूमिका रही।
सुप्रसिद्ध रंगकर्मी और इंदिरा गांधी कला केंद्र नई दिल्ली के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी तथा उनकी पत्नी मधुलिका जोशी ऑनलाईन जुड़े। उनसे विवेक सावरीकर ने बात की। जोशी ने कहा कि मॉल संस्कृति में अपनापन नहीं है। वहीं, कभी हम मोहल्ले-पड़ोस की परचून की दुकान पर जाते थे तो उस दुकानदार से हमारे पारिवारिक रिश्ते बन जाते थे।
पूर्व वन अधिकारी सक्सेना जी ने प्रदेश में घटते वन और बढ़ते तापमान पर आंकड़ों सहित तथ्यपरक जानकारी दी। उन्होंने साफ शब्दों में चेताया कि यदि हम अभी नहीं संभले तो नतीजा हमारी अगली पीढ़ी भुगतेगी। इसके बाद पूर्व मुख्य सचिव शरदचंद्र बेहार ने विजन भोपाल 2047,सेविंग फॉरेस्ट पर वक्तव्य दिया। समापन सत्र में राज्य मंत्री कृष्णा गौर ने ‘बाबूलाल गौर द मेकर्स ऑफ भोपाल’ विषय पर वक्तव्य देते हुए अपने ससुर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का भावुक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि बाबूजी के मन मे सोते- जागते हमेशा भोपाल का विकास ही रहता था। भोपाल में तो बहुत पहले ही बुलडोजर चलाने लगे थे और वे बुलडोजर गौर कहलाने लगे थे।बाबुजी भोपाल को पेरिस बनाना चाहते थे।





