सर्किल रेट से कम पर रजिस्ट्री कराई तो आ सकता है आयकर नोटिस, टैक्स प्लानिंग में पारदर्शिता जरूरी : सीए डॉ. गिरीश आहूजा

‘प्रारंभ’ राष्ट्रीय संगोष्ठी में आयकर सर्च एंड सीजर, अंतरराष्ट्रीय कराधान से लेकर टैक्स प्लानिंग तक विशेषज्ञों ने समझाए कानून के व्यावहारिक पहलू; 600 से अधिक सीए हुए शामिल

विवेक झा, भोपाल, 9 अगस्त। संपत्ति की खरीद-बिक्री में रजिस्ट्री कराते समय केवल स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क का ध्यान रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आयकर कानून के प्रावधानों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। संबंधित क्षेत्र के सर्किल रेट से कम मूल्य पर संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर आयकर विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है। ऐसे में संपत्ति के वास्तविक मूल्य, सर्किल रेट, भुगतान के माध्यम और दस्तावेजों में पारदर्शिता रखना बेहद जरूरी है। यह बात देश के विख्यात कर विशेषज्ञ सीए (डॉ.) गिरीश आहूजा ने भोपाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘प्रारंभ- Where Journey to Excellence Begins’ के समापन अवसर पर कही।

द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की डायरेक्ट टैक्सेस कमेटी द्वारा आयोजित तथा मध्य भारत क्षेत्रीय परिषद (CIRC) की भोपाल शाखा की मेजबानी में होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से 600 से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं कर विशेषज्ञों ने भाग लिया। दूसरे दिन आयकर सर्च एंड सीजर, अंतरराष्ट्रीय कराधान, कर संधियों, ब्लैक मनी एक्ट, प्रत्यक्ष करों में हुए बदलाव, न्यायिक निर्णय और टैक्स प्लानिंग जैसे विषयों पर गहन तकनीकी चर्चा हुई।

टैक्स प्लानिंग का मतलब केवल टैक्स बचाना नहीं

अंतिम तकनीकी सत्र में ‘प्रत्यक्ष कर अपडेट्स, न्यायिक निर्णय एवं टैक्स प्लानिंग के व्यावहारिक मुद्दे’ विषय पर सीए (डॉ.) गिरीश आहूजा ने सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि टैक्स प्लानिंग का उद्देश्य केवल कर की राशि कम करना नहीं होना चाहिए। कानून के दायरे में रहते हुए वित्तीय लेन-देन की बेहतर योजना बनाना, सही दस्तावेज रखना और भविष्य में होने वाले विवादों से बचना भी टैक्स प्लानिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने आयकर कानून में हालिया बदलावों और न्यायिक निर्णयों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि कर पेशेवरों को लगातार कानून में हो रहे परिवर्तनों और न्यायालयों के फैसलों का अध्ययन करते रहना चाहिए। इससे करदाताओं को समय पर सही सलाह दी जा सकेगी।

सर्किल रेट की अनदेखी से बढ़ सकती है आयकर संबंधी परेशानी

सीए आहूजा ने संपत्ति की रजिस्ट्री को टैक्स प्लानिंग से जोड़ते हुए कहा कि संपत्ति खरीदते या बेचते समय संबंधित क्षेत्र में लागू सर्किल रेट को ध्यान में रखना चाहिए। यदि रजिस्ट्री में संपत्ति का मूल्य निर्धारित सर्किल रेट से कम दर्शाया जाता है, तो आयकर कानून के तहत कर संबंधी सवाल खड़े हो सकते हैं और विभाग की ओर से नोटिस भी आ सकता है।

उन्होंने कहा कि संपत्ति के लेन-देन में वास्तविक भुगतान, दस्तावेजों में दर्शाया गया मूल्य और लागू सरकारी दरों के बीच पारदर्शिता जरूरी है। करदाता को संपत्ति खरीदने से पहले मूल्यांकन, भुगतान के माध्यम और संबंधित दस्तावेजों की उचित जांच कर लेनी चाहिए।

डिजिटल दौर में वित्तीय लेन-देन छिपाना आसान नहीं

आहूजा ने कहा कि वर्तमान समय में वित्तीय लेन-देन की जानकारी विभिन्न डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध हो रही है। ऐसे में करदाताओं के लिए अपने वित्तीय लेन-देन की सही जानकारी आयकर रिटर्न में देना और आवश्यक दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना बेहद जरूरी हो गया है।

उन्होंने सीए सदस्यों से कहा कि वे अपने क्लाइंट्स को केवल तत्काल कर बचत के विकल्प न बताएं, बल्कि ऐसे विकल्प सुझाएं जो कानून के अनुरूप हों और भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी पैदा न करें।

न्यायिक फैसलों का टैक्स प्लानिंग में भी महत्व

सीए (डॉ.) आहूजा ने कहा कि टैक्स कानून की व्याख्या केवल अधिनियम की धाराओं को पढ़कर पूरी नहीं होती। विभिन्न उच्च न्यायालयों, सर्वोच्च न्यायालय और अधिकरणों के फैसलों का भी कर मामलों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कर पेशेवरों से आग्रह किया कि वे नए न्यायिक निर्णयों का नियमित अध्ययन करें और यह समझें कि संबंधित निर्णय किन परिस्थितियों में लागू होता है। इससे कर विवादों को शुरुआती स्तर पर ही कम करने में मदद मिल सकती है।

सर्च एंड सीजर में करदाता और सीए के अधिकारों पर चर्चा

संगोष्ठी के दूसरे दिन चौथे तकनीकी सत्र में ‘आयकर सर्च एवं सीजर के दौरान व्यावहारिक रणनीतियां और सर्वोत्तम प्रथाएं’ विषय पर चर्चा हुई। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चले इस सत्र में सीए टी. पोस्तवाल एवं अधिवक्ता महेश अग्रवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में मार्गदर्शन दिया।

विशेषज्ञों ने सर्च एवं सर्वे की कार्यवाही के दौरान करदाताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के कानूनी अधिकारों एवं दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही ऐसी कार्यवाही के दौरान अपनाई जाने वाली व्यावहारिक रणनीतियों और बेहतर प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।

अंतरराष्ट्रीय कराधान और DTAA की बारीकियां समझाईं

पांचवें तकनीकी सत्र में ‘अंतरराष्ट्रीय कराधान, कर संधियां (DTAA) एवं ब्लैक मनी एक्ट’ विषय पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चले सत्र में विदेशी संपत्तियों के प्रकटीकरण, अंतरराष्ट्रीय कर नियमों और विभिन्न देशों के बीच कर संधियों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय लेन-देन एवं विदेशी संपत्तियों से जुड़े मामलों में सही अनुपालन और दस्तावेजी प्रक्रिया के महत्व को भी रेखांकित किया।

हालिया आयकर बदलावों से अपडेट रहने की सलाह

अंतिम तकनीकी सत्र में सीए (डॉ.) गिरीश आहूजा ने हालिया आयकर संशोधनों, न्यायिक निर्णयों और कर नियोजन के व्यावहारिक पहलुओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि आयकर कानून लगातार विकसित हो रहा है। इसलिए सीए और अन्य कर पेशेवरों के लिए केवल पुराने प्रावधानों के आधार पर काम करना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने सदस्यों से कहा कि वे नए कानून, संशोधन, अधिसूचनाओं और न्यायिक निर्णयों का लगातार अध्ययन करें, ताकि वे अपने क्लाइंट्स को अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध सलाह दे सकें।

600 से अधिक सीए ने हासिल किया तकनीकी ज्ञान

दो दिवसीय ‘प्रारंभ’ राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 600 से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं कर विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सम्मेलन में तकनीकी सत्रों के साथ विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच संवाद का अवसर भी मिला।

संगोष्ठी में कर कानूनों के सैद्धांतिक पक्ष के साथ-साथ उनके व्यावहारिक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इससे प्रतिभागियों को अपने पेशेवर कार्य में कर कानूनों और नवीनतम प्रावधानों को बेहतर तरीके से लागू करने की जानकारी मिली।

भोपाल शाखा की टीम ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए ICAI भोपाल शाखा के अध्यक्ष सीए आदित्य श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष सीए प्रदीप मुटरेजा एवं सचिव सीए अभिषेक जैन सहित पूरी कार्यकारिणी का आभार व्यक्त किया गया।

आयोजन को सफल बनाने में कोषाध्यक्ष सीए नंदन नरुला, CICASA अध्यक्ष सीए पीयूष चतर, कार्यसमिति सदस्य सीए अर्पित राय एवं सीए सुचिता गोयल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

डायरेक्ट टैक्सेस कमेटी के उपाध्यक्ष सीए पंकज शाह एवं कॉन्फ्रेंस डायरेक्टर सीए अभय छाजेड़ ने सभी वक्ताओं, अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

करदाताओं के लिए संदेश—सही जानकारी और दस्तावेज रखें

संगोष्ठी में विशेषज्ञों की चर्चाओं का मुख्य संदेश यही रहा कि बदलते डिजिटल और कानूनी वातावरण में करदाताओं को अपने वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बरतनी चाहिए। विशेष रूप से संपत्ति की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री, विदेशी संपत्ति, सर्च एवं सीजर तथा अन्य बड़े वित्तीय लेन-देन में संबंधित कर प्रावधानों की जानकारी रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर टैक्स प्लानिंग, सही दस्तावेज, कानून का अनुपालन और नवीनतम न्यायिक निर्णयों की जानकारी करदाताओं को अनावश्यक विवादों और कानूनी परेशानियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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