20 साल से नई विकास योजना की मांग, 21 साल से इंतजार; अब भोपाल के सामने निर्णायक मौका
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद नई विकास योजना की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद; जेडी टाउन प्लानिंग से प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची मांग, अब संघर्ष सिर्फ प्रकाशन का नहीं बल्कि जमीन पर अमल का

विवेक झा, भोपाल। राजधानी भोपाल की नई विकास योजना को लेकर करीब दो दशक से उठती आवाज अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों, सीलिंग और भोपाल विकास योजना से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकार के लिए नई विकास योजना का प्रारूप जारी कर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, अंतिम योजना और उससे जुड़ी न्यायिक शर्तों की स्थिति की शब्दशः पुष्टि हस्ताक्षरित आदेश से होना अभी बाकी है।
भोपाल विकास योजना-2005 का नियोजन क्षितिज समाप्त हुए करीब 21 वर्ष हो चुके हैं। इसके बावजूद सितंबर 2026 तक नई उत्तराधिकारी विकास योजना अधिसूचित नहीं हो सकी है। इस दौरान शहर की आबादी, यातायात, आवास, व्यावसायिक गतिविधियों और शहरी विस्तार का स्वरूप तेजी से बदला, लेकिन शहर के लिए अंतिम और व्यापक नया नियोजन ढांचा अब भी लंबित है।
2006 से लगातार उठ रही नई विकास योजना की मांग
क्रेडाई भोपाल अध्यक्ष और शहरी विकास शोधकर्ता मनोज सिंह मीक के अनुसार नई विकास योजना की जरूरत को वे वर्ष 2006 से लगातार अलग-अलग मंचों पर उठाते रहे हैं। इस दौरान ज्वाइंट डायरेक्टर टाउन प्लानिंग से लेकर मुख्य सचिव, महापौर, मुख्यमंत्री, सांसद और केंद्रीय नगरीय विकास मंत्री तक आवेदन, प्रतिवेदन और अध्ययन प्रस्तुत किए गए।
मीक के अनुसार मांग का उद्देश्य सिर्फ नया नक्शा तैयार कराना नहीं रहा, बल्कि बदलते भोपाल के अनुरूप ऐसा नियोजन ढांचा तैयार कराना है, जिसमें सड़क, आवास, व्यावसायिक क्षेत्र, पुनर्विकास, सार्वजनिक सुविधाएं और भविष्य की शहरी जरूरतों को एक साथ देखा जा सके।
टाउन प्लानिंग से पीएमओ तक पहुंचा मामला
नई विकास योजना को लेकर की गई पहल का सिलसिला पिछले कुछ वर्षों में भी जारी रहा। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 13 अक्टूबर 2024 को मुख्य सचिव स्तर पर विकास योजना का विषय उठाया गया। इसके बाद 31 दिसंबर 2024 को अपर मुख्य सचिव के समक्ष योजना के प्रकाशन की मांग रखी गई।
9 फरवरी 2025 को केंद्रीय नगरीय विकास मंत्री के सामने भोपाल के नियोजित विस्तार और पुनर्विकास से जुड़े विषय भी रखे गए। इसके बाद 21 नवंबर 2025 को भोपाल के समग्र विकास को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के जनशिकायत पोर्टल पर आवेदन दर्ज किया गया। इसका पंजीयन क्रमांक PMOPG/E/2025/0178515 बताया गया है।
शिकायत की जगह सुझाव मानकर बंद हुआ प्रकरण
उपलब्ध स्थिति-प्रति के अनुसार 16 फरवरी 2026 को इस प्रकरण को शिकायत के बजाय सुझाव के रूप में मानकर बंद दिखाया गया। इसके बाद मीक की ओर से दर्ज प्रतिक्रिया में 21 वर्षों से विकास योजना में हो रही देरी को स्वयं एक शिकायत बताते हुए मास्टर प्लान के शीघ्र प्रकाशन की मांग दोहराई गई।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि नई विकास योजना को लेकर मांग सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग प्रशासनिक और राजनीतिक स्तरों तक पहुंचाई जाती रही है।
मई 2026 के नागरिक विमर्श में भी उठा मुद्दा
14 मई 2026 को हुए नागरिक विमर्श में भी भोपाल की नई विकास योजना को जल्द आगे बढ़ाने की मांग सामने आई। इसमें सिर्फ योजना प्रकाशित करने की बात नहीं थी, बल्कि उसके साथ वित्तीय रूपरेखा और जिम्मेदार क्रियान्वयन एजेंसी तय करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
यानी अब सवाल केवल यह नहीं है कि भोपाल का नया मास्टर प्लान कब आएगा। इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि योजना लागू कैसे होगी, उसके लिए वित्तीय संसाधन कहां से आएंगे और अलग-अलग विकास कार्यों की जिम्मेदारी किस एजेंसी की होगी।
पुरानी योजना की रफ्तार ने खड़े किए सवाल
नई विकास योजना की जरूरत के पीछे पुरानी योजना के क्रियान्वयन का अनुभव भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में पिछली योजना में 241 किमी प्रस्तावित सड़कों के मुकाबले योजना-अवधि में करीब 53 किमी विकास का उल्लेख किया गया है।
यह आंकड़ा केवल सड़क निर्माण तक सीमित सवाल नहीं उठाता, बल्कि यह भी बताता है कि किसी विकास योजना की सफलता सिर्फ उसके दस्तावेज या नक्शे तैयार होने से नहीं होती। वास्तविक चुनौती योजना में प्रस्तावित प्रावधानों को जमीन पर लागू करने की होती है।
CAG निगरानी बैठकों में 96% कमी का भी उल्लेख
प्रेस नोट में कैग से संबंधित रिकॉर्ड का हवाला देते हुए निगरानी बैठकों में 96 प्रतिशत कमी का उल्लेख किया गया है। ऐसे में अगली विकास योजना के लिए निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है।
यदि नई योजना में सड़क, परिवहन, आवास, व्यावसायिक क्षेत्रों, पुनर्विकास और सार्वजनिक सुविधाओं के बड़े प्रावधान किए जाते हैं, तो उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और निगरानी की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।
अब लड़ाई सिर्फ प्रकाशन की नहीं, क्रियान्वयन की
करीब 20 वर्षों से नई विकास योजना की मांग उठाने वाले मनोज सिंह मीक का कहना है कि अब प्राथमिकता सिर्फ योजना को प्रकाशित कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि नई योजना बनने के बाद उसके क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट रोडमैप भी तैयार हो।
उनके अनुसार भोपाल की बदलती जरूरतों को देखते हुए ऐसी योजना की आवश्यकता है जो शहर के भविष्य के विकास को दिशा दे और वर्षों से लंबित नियोजन संबंधी मुद्दों को स्पष्ट ढांचे में लाए।
“20 साल हमने नया प्लान मांगा; अब हमारी लड़ाई केवल उसके प्रकाशन की नहीं, उसके क्रियान्वयन की है।”
— मनोज सिंह मीक
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद बढ़ी उम्मीद
22 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के बाद नई विकास योजना की प्रक्रिया को लेकर उम्मीद बढ़ी है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकार के लिए प्रारूप जारी कर दावे-आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की संभावना बनी है। हालांकि अंतिम स्थिति न्यायालय के हस्ताक्षरित आदेश और उसमें दर्ज शर्तों के स्पष्ट अध्ययन के बाद ही पूरी तरह सामने आएगी।
ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार नई विकास योजना के प्रारूप को किस रूप में सामने लाती है और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।
भोपाल के लिए अगला चरण ज्यादा महत्वपूर्ण
भोपाल के लिए नई विकास योजना सिर्फ एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं होगी। यह आने वाले वर्षों में शहर के विस्तार, सड़क नेटवर्क, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों, पुनर्विकास तथा सार्वजनिक सुविधाओं की दिशा तय करने वाला आधार बन सकती है।
करीब 21 साल से नई योजना का इंतजार कर रहे शहर के लिए अब असली परीक्षा यही होगी कि प्रस्तावित योजना कितनी जल्दी अंतिम रूप लेती है और उसके बाद उसे जमीन पर लागू करने के लिए कितना प्रभावी वित्तीय, प्रशासनिक और निगरानी तंत्र तैयार किया जाता है।





