241 किमी का सपना, योजना-अवधि में बनीं 53 किमी सड़कें; पुराने प्लान के क्रियान्वयन ने उठाए सवाल

सरकारी दस्तावेज में सामने आया विकास योजना-2005 का क्रियान्वयन अंतर; 188 किमी का अंतर, CAG ने नियोजन एवं पर्यवेक्षण बैठकों में 96% कमी दर्ज की; मनोज मीक बोले- इस बार हर प्रस्ताव के साथ बजट, एजेंसी और समयसीमा तय हो

विवेक झा, भोपाल। भोपाल की नई विकास योजना को लेकर चल रही बहस के बीच पुराने सरकारी रिकॉर्ड की दो संख्याएं शहर के भविष्य के नियोजन पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं—241 किमी और 53 किमी। विकास योजना-2005 में 241 किमी सड़कें प्रस्तावित की गई थीं, जबकि विकास योजना-2031 के प्रारूप में दर्ज पुराने प्लान के क्रियान्वयन-पुनरावलोकन के अनुसार योजना अवधि में इनमें से 53 किमी सड़कें ही विकसित हो सकीं।

यानी प्रस्तावित और विकसित सड़क नेटवर्क के बीच 188 किमी का अंतर रहा। प्रतिशत के लिहाज से यह अंतर करीब 78% बैठता है। हालांकि यह आंकड़ा वर्तमान में भोपाल में मौजूद या निर्मित सड़कों की स्थिति नहीं बताता, बल्कि पिछली विकास योजना की अवधि में प्रस्तावित सड़कों के क्रियान्वयन का ऐतिहासिक अंतर दर्शाता है।

पुराने रिकॉर्ड ने नई योजना के सामने रखी बड़ी चुनौती

नई विकास योजना को लेकर अब जब प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना बनी है, पुराने प्लान के क्रियान्वयन का रिकॉर्ड एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन गया है। सवाल यह है कि नई योजना में प्रस्तावित सड़क, परिवहन, आवास, व्यावसायिक और अन्य विकास परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए क्या ऐसा तंत्र बनाया जाएगा, जिससे पिछली योजना जैसी देरी और क्रियान्वयन-अंतर को कम किया जा सके।

शहरी विकास शोधकर्ता मनोज सिंह मीक के अनुसार नई योजना सिर्फ नक्शे और प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हर बड़े प्रस्ताव के साथ यह स्पष्ट होना चाहिए कि उसे पूरा करने के लिए धन कहां से आएगा, जिम्मेदार एजेंसी कौन होगी और काम किस समयसीमा में पूरा किया जाना है।

241 किमी प्रस्तावित, 53 किमी का विकास

सरकारी दस्तावेज में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक विकास योजना-2005 में 241 किमी सड़कें प्रस्तावित थीं। बाद के पुनरावलोकन में योजना अवधि के दौरान 53 किमी विकास का उल्लेख है।

इन दोनों आंकड़ों के बीच 188 किमी का अंतर निकलता है। यानी प्रस्तावित नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा योजना अवधि में अपेक्षित रूप से विकसित नहीं हो सका।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 53 किमी का आंकड़ा वर्तमान भोपाल में बनी सड़कों का आंकड़ा नहीं है। यह पिछली विकास योजना के प्रस्तावों और उस योजना अवधि में दर्ज क्रियान्वयन का तुलनात्मक आंकड़ा है।

निगरानी व्यवस्था पर भी CAG ने उठाए सवाल

सिर्फ सड़क निर्माण ही नहीं, योजना की निगरानी से जुड़े रिकॉर्ड में भी कमी का उल्लेख किया गया है। प्रेस नोट में CAG के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया गया है कि भोपाल विकास योजना-2005 की नियोजन एवं पर्यवेक्षण समिति की अपेक्षित बैठकों में 96% की कमी दर्ज की गई।

योजना के क्रियान्वयन के लिए निगरानी बैठकें महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि इनके माध्यम से प्रस्तावित कार्यों की प्रगति, बाधाओं और जिम्मेदार एजेंसियों की समीक्षा की जा सकती है। ऐसे में बैठकों में इतनी बड़ी कमी का उल्लेख नई योजना के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने की जरूरत की ओर संकेत करता है।

भूमि उपयोग में भी सामने आया क्रियान्वयन अंतर

पुरानी विकास योजना की समीक्षा में केवल सड़कें ही नहीं, बल्कि अलग-अलग भूमि उपयोग श्रेणियों में भी उपलब्धि और प्रस्तावों के बीच अंतर दर्ज किया गया।

प्रेस नोट के अनुसार CAG के रिकॉर्ड में आवासीय श्रेणी में 31%, वाणिज्यिक में 56%, औद्योगिक में 64%, सार्वजनिक-अर्धसार्वजनिक में 52% और मनोरंजन श्रेणी में 64% उपलब्धि-अंतर दर्ज किया गया है।

परिवहन श्रेणी के लिए अलग मापन पद्धति अपनाए जाने के कारण उसकी तुलना इन श्रेणियों के साथ सीधे तौर पर नहीं की गई है।

2006 से नई योजना की मांग उठा रहे मीक

शहरी विकास शोधकर्ता मनोज सिंह मीक के अनुसार वे वर्ष 2006 से लगातार भोपाल के लिए नई विकास योजना की जरूरत उठाते रहे हैं। शुरुआत में मांग नई मास्टर प्लान तैयार करने और उसे लागू करने तक केंद्रित थी, लेकिन समय के साथ उनके प्रतिवेदनों में योजना के साथ वित्तीय व्यवस्था, जिम्मेदार संस्थाओं और समयबद्ध क्रियान्वयन को भी प्रमुखता दी गई।

उनका कहना है कि नई योजना तैयार करना पहला चरण है। वास्तविक परिणाम तभी आएगा, जब योजना में दर्ज प्रावधानों को जमीन पर उतारने के लिए पहले से संसाधन और जिम्मेदारी तय हो।

2024 में अपर मुख्य सचिव के सामने उठाया मुद्दा

नई विकास योजना को लेकर यह मांग पिछले कुछ वर्षों में भी लगातार विभिन्न स्तरों पर रखी गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार 31 दिसंबर 2024 को नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव के समक्ष योजना के प्रकाशन की मांग दर्ज की गई।

इसके बाद वर्ष 2025 में यह विषय केंद्रीय नगरीय विकास मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा। इससे स्पष्ट है कि नई विकास योजना का मुद्दा केवल स्थानीय प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा।

मई 2026 के नागरिक विमर्श में भी उठी मांग

मई 2026 में सांसद आलोक शर्मा की अध्यक्षता में हुए नागरिक विमर्श में भी नई विकास योजना के साथ वित्तीय रूपरेखा और क्रियान्वयन एजेंसी तय करने की मांग रखी गई।

इसका अर्थ यह है कि अब नई योजना को लेकर चर्चा केवल यह नहीं है कि भोपाल का नया मास्टर प्लान कब आएगा। इसके साथ यह भी सवाल जुड़ा है कि योजना में शामिल परियोजनाओं को पूरा करने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था किस प्रकार बनाई जाएगी।

2047 की दिशा वाली योजना में जवाबदेही की मांग

22 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के बाद नई विकास योजना की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना ने पुराने रिकॉर्ड को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

प्रस्ताव यह है कि 2047 की दिशा वाली नई योजना में प्रमुख सड़क और विकास परियोजनाओं के साथ केवल उनका स्थान या प्रस्ताव दर्ज न हो, बल्कि उनकी जमीन की उपलब्धता, अनुमानित लागत, वित्तीय स्रोत, जिम्मेदार संस्था और लक्ष्य वर्ष भी सार्वजनिक किए जाएं।

इससे योजना के प्रस्ताव और उसके क्रियान्वयन के बीच स्पष्ट संबंध बनाया जा सकता है।

हर बड़े प्रोजेक्ट के सामने हो ‘कौन, कितना और कब’

नई योजना के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यही है कि प्रत्येक प्रमुख परियोजना के साथ तीन बुनियादी सवालों का जवाब पहले से तय हो—कितना बजट चाहिए, जिम्मेदारी किस एजेंसी की होगी और काम कब तक पूरा होना है।

यदि किसी सड़क के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, तो भूमि अधिग्रहण या अन्य प्रक्रिया की स्थिति भी स्पष्ट हो। इसी तरह वित्तीय स्रोत तय नहीं होने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता और समयसीमा के साथ अलग से चिह्नित किया जा सके।

मीक बोले- पुराने आंकड़े आरोप नहीं, चेतावनी हैं

मनोज सिंह मीक का कहना है कि 241 किमी प्रस्तावित और 53 किमी विकास का आंकड़ा किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाने के लिए नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह आंकड़ा भविष्य की योजना तैयार करने वालों के लिए एक सीख है कि सिर्फ प्रस्ताव तैयार करने से शहर का विकास सुनिश्चित नहीं होता।

“241 किमी में 53 किमी का पुराना रिकॉर्ड किसी पर आरोप लगाने के लिए नहीं, अगली योजना को जमीन पर उतारने के लिए चेतावनी की तरह पढ़ना चाहिए।”
— मनोज सिंह मीक

अब नई योजना के साथ क्रियान्वयन का रोडमैप जरूरी

भोपाल की नई विकास योजना को लेकर अब आने वाला चरण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शहर का विस्तार पुराने नियोजन ढांचे से काफी आगे बढ़ चुका है। ऐसे में नई योजना में भविष्य की जरूरतों को शामिल करने के साथ यह भी जरूरी होगा कि प्रस्तावित परियोजनाओं के क्रियान्वयन का स्पष्ट रोडमैप तैयार हो।

पुरानी योजना के आंकड़े यही संकेत देते हैं कि नई विकास योजना की सफलता सिर्फ उसके प्रकाशन से नहीं, बल्कि उसके लागू होने की गति और निगरानी व्यवस्था से तय होगी। इसलिए इस बार शहर के सामने चुनौती नया प्लान बनाने से आगे बढ़कर उसे समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button