5 दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू नहीं हुई तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल
UFBU का ऐलान: 11 सितंबर और 28-30 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल; सरकार की PLI योजना को बताया भेदभावपूर्ण, समझौते के उल्लंघन का आरोप

विवेक झा, नई दिल्ली/भोपाल। बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच दिन कामकाज लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। फोरम ने 11 सितंबर तथा 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को देशव्यापी बैंक हड़ताल का आह्वान किया है। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर 2026 से लगातार और अनिश्चितकालीन बैंक हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है। UFBU का दावा है कि उसके घटक संगठन बैंकिंग उद्योग के 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
5 दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग
UFBU की प्रमुख मांग 8 मार्च 2024 के समझौते और ज्वाइंट नोट के अनुसार सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करना है। फोरम के अनुसार पहले बैंक सोमवार से शुक्रवार तक पूरे दिन और शनिवार को आधे दिन काम करते थे। मई 2015 के समझौते के बाद हर महीने दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया, जबकि बाकी शनिवार पूर्ण कार्य दिवस किए गए थे।
यूनियनों का कहना है कि उस समय यह भी आश्वासन दिया गया था कि आगे चलकर सभी शनिवार को अवकाश देने पर विचार किया जाएगा।
40 मिनट अतिरिक्त काम के बदले शनिवार को छुट्टी
UFBU के अनुसार मार्च 2024 के वेतन संशोधन समझौते में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक प्रबंधन ने शेष शनिवारों को भी अवकाश घोषित करने पर सहमति दी थी। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन बैंकिंग कार्य समय में 40 मिनट की वृद्धि करने पर यूनियनों ने सहमति दी।
फोरम का कहना है कि प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद इस पर निर्णय नहीं हुआ है। यूनियनों का दावा है कि 40 मिनट प्रतिदिन अतिरिक्त कार्य से ग्राहकों के लिए उपलब्ध कुल बैंकिंग कारोबारी घंटों में कमी नहीं होगी।
केंद्र-राज्य सरकारों समेत कई संस्थानों में 5 दिन काम
UFBU ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों, रिजर्व बैंक, एलआईसी, जीआईसी, नाबार्ड तथा कई निजी कंपनियों और वित्तीय बाजारों में पांच दिन कार्य सप्ताह लागू है। बैंकिंग क्षेत्र में भी महीने में दो शनिवार पहले से अवकाश हैं, इसलिए बाकी शनिवारों को अवकाश घोषित करना तार्किक कदम होगा।
फोरम ने कहा कि बैंक कर्मचारी कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में भी लगातार सेवाएं देते रहे हैं। वर्तमान में कर्मचारियों की कमी, बढ़ते बैंकिंग कारोबार और काम के दबाव के कारण कर्मचारियों एवं अधिकारियों के कार्य-जीवन संतुलन पर असर पड़ रहा है।
PLI योजना पर भी सरकार से टकराव
UFBU ने सरकार की नई Performance Linked Incentive (PLI) योजना का भी विरोध किया है। फोरम के अनुसार नवंबर 2020 में IBA और यूनियनों के बीच हुए समझौते के तहत बैंक के प्रदर्शन और लाभ के आधार पर सभी कर्मचारियों को समान आधार पर अधिकतम 15 दिन के वेतन तक प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई थी। इसमें स्वीपर, हाउसकीपर, चपरासी, क्लर्क से लेकर जनरल मैनेजर तक के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे।
यूनियनों का आरोप है कि नवंबर 2024 में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने स्केल-IV से स्केल-VII के अधिकारियों के लिए अलग प्रोत्साहन फॉर्मूला लागू करने का निर्देश दिया। UFBU इसे द्विपक्षीय समझौते के विपरीत और भेदभावपूर्ण बता रहा है।
5% अधिकारियों को 365 दिन तक के वेतन का प्रोत्साहन
फोरम के अनुसार नई व्यवस्था में स्केल-IV से VII के करीब 40 हजार अधिकारी, जो कुल बैंकिंग कार्यबल का लगभग 5 प्रतिशत हैं, उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर 365 दिन के वेतन तक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। वहीं शेष 95 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए अधिकतम प्रोत्साहन 15 दिन के वेतन तक सीमित है।
UFBU का कहना है कि इससे बैंक कर्मचारियों की सामूहिक टीम भावना प्रभावित होगी और कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ेगी। यूनियनों ने व्यक्तिगत प्रदर्शन के बजाय पूरे बैंक के प्रदर्शन के आधार पर समान प्रोत्साहन व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
दिल्ली हाईकोर्ट में मामला लंबित
UFBU ने बताया कि मार्च 2026 में DFS द्वारा अपनी प्रोत्साहन व्यवस्था लागू करने के निर्देश के बाद यूनियनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में मामला दायर किया। फोरम के अनुसार यह मामला अभी लंबित है। इसके बावजूद 21 अगस्त 2026 को DFS ने बैंकों को योजना लागू करने के निर्देश दिए।
UFBU का आरोप है कि मामला मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष भी लंबित है और इस दौरान प्रबंधन को यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए थी। यूनियनों ने सरकार की कार्रवाई को सामूहिक सौदेबाजी और द्विपक्षीय समझौतों की भावना के विपरीत बताया है।
अवशेष मुद्दों के समाधान की भी मांग
फोरम ने मार्च 2024 के समझौते में तय किए गए residual issues यानी लंबित मुद्दों के समाधान की मांग भी उठाई है। इसके अलावा मार्च 2025 और जनवरी 2026 में दिए गए हड़ताल नोटिसों में उठाए गए मुद्दों के समाधान की भी मांग की गई है।
UFBU ने कहा कि लगातार संवाद और समझौते के प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं निकलने के कारण यूनियनों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
तीन चरणों में आंदोलन का ऐलान
UFBU के अनुसार आंदोलन का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा—
- 11 सितंबर 2026: देशव्यापी बैंक हड़ताल
- 28, 29 और 30 सितंबर 2026: लगातार तीन दिन बैंक हड़ताल
- 26 अक्टूबर 2026 से: लगातार एवं अनिश्चितकालीन बैंक हड़ताल
फोरम ने कहा है कि सरकार और बैंक प्रबंधन यदि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था, PLI योजना और अन्य लंबित मुद्दों पर समाधान नहीं निकालते हैं तो आंदोलन को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।
UFBU ने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से आगामी आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।





