60 फीसदी टैक्स चुकाकर बचें जुर्माने और मुकदमेबाजी से : सीए गिरीश आहूजा

- विवाद से विश्वास योजना में अपनी अघोषित आय का खुलासा करने खुद आगे आएंगे करदाता

विवेक झा, भोपाल। आयकर विभाग द्वारा तलाशी और जब्ती के लिए नए नियमों से मुकदमेबाजी में कमी आ सकती है और अनुपालन भी बढ़ सकता है। अगर करदाता जांच के नतीजे कबूल कर लेता है और अपनी अघोषित आय पर 60 फीसदी कर चुकाने को राजी हो जाता है तो उसके खिलाफ मामला बंद कर दिया जाएगा। ऐसे मामले में करदाता को अलग से जुर्माना या ब्याज नहीं भरना पड़ेगा। यह जानकारी सीए गिरीश आहूजा ने दी। वे यहां टैक्‍स लॉ बार एसोसि‍एशन द्वारा आयोजित एक दिनी राज्य स्तरीय कांफ्रेंस में पधारे थे। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष मृदुल आर्य, मनोज पारख, अंकुर अग्रवाल, धीरज अग्रवाल, संदीप चौहान, भूपेश खुरपिया, राजेश्वर दयाल, संतोष शाक्य आदि उपस्थित थे। साथ ही प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए हुए कर सलाहकारों ने इस कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराई।

आहूजा ने बताया कि ‘तलाशी के बाद कार्रवाई में आम तौर पर लंबा समय लगता है। मगर विवाद से विश्वास योजना के तहत करदाता तलाशी के नतीजे मान लेता है और अपनी छिपाई गई आय पर 60 फीसदी कर चुकाता है तो मामला एक ही सुनवाई में खत्म हो सकता है। करदाता को कोई जुर्माना या ब्याज भी नहीं देना होगा। उन्होंने कहा कि अगर करदाता अधिकारी द्वारा तलाशी गई अघोषित आय पर कर चुका देता है तो मामला खत्म हो जाएगा। लेकिन करदाता आकलन से ज्यादा अघोषित आय स्वीकार करता है तो अतिरिक्त रकम पर 50 फीसदी जुर्माना लगाया जा सकता है। नए नियमों का मकसद करदाताओं को अघोषित आय बताने के लिए प्रोत्साहित करना है और इससे मुकदमेबाजी कम से कम 20 फीसदी घट सकती है। इस योजना को ब्लॉक आकलन कहा गया है और यह तलाशी के नतीजे से 6 साल पहले तक की अघोषित कार्रवाई पर लागू होगी।

ईमानदारी से टैक्स चुकाएं, सरकार से कुछ नहीं छिपा

दिल्ली से पधारे टैक्स गुरू डॉ गिरीश आहूजा ने आयकर विषय में बताया कि आज के डिजिटल युग में किसी भी व्यक्ति के पूरे लेनदेन की जानकारी सरकार के पास है कोई भी चीज उनसे छुपी नहीं है। जोमैटो से क्या खरीदा किसी, स्टोर से क्या उच्च मूल्य का सामान खरीदा कहां-कहां शेयर है कहां बैंक खाते हैं यह सब जानकारी उनके पास है। आपके सोशल मीडिया एकाउंट पर भी उनकी नजर है। उन्हें सही-सही अपने आयकर विवरणी में दर्शना चाहिए।

पुरानी कर व्यवस्था खत्म कर सकती है सरकार

गिरीश आहूजा कहते हैं कि बहुत सारे लोगों ने रिटर्न दाखिल करते समय आयकर की धारा 80सी के तहत टैक्स से छूट पाने का क्लेम कर देते हैं, 80डी क्लेम करते हैं और जमा कुछ नहीं करते हैं। इसका कारण यह है कि उन्हें इसका प्रूफ तो कुछ देना नहीं होता। सबको पता है कि 90 पर्सेंट को स्क्रूटनी में आना नहीं है। इसलिए रिटर्न भरने वाले सबसे पहला काम ये करते हैं। दूसरा कारण यह है कि रिटर्न में 70 पर्सेंट एचआरए (हाउस रेंट अलाउंट) बोगस रहता है। उन्होंने कहा कि जो लोग आरटीआर में हाउस रेंट दिखाते हैं। उनमें से ज्यादातर लोगों में से कोई अपने पिता को किराया दे रहा है,  तो कोई अपने भाई, अपनी बहन, अपने रिश्तेदारों को किराया दे रहा है। लोगों ने हद तो ये कर दी कि कई लोग अपनी पत्नी तक को घर का किराया दे देते हैं।

गिरीश आहूजा ने आगे कहा कि कहते हैं, ‘सैलरी वाले दान बहुत देते हैं। देता सैलरी वाला ही है और कोई नहीं देता। उन्होंने कहा कि धन कहां घटा। उन्होंने कहा कि जितना दिया, उतना वापस ले लिया और ऊपर से डिडक्शन भी ले लिया। तो फिर धन कहां घटा? धन और बढ़ गया। यही कारण है कि सरकार के ध्यान में है कि पुरानी कर व्यवस्था को खत्म करना है और नई कर व्यवस्था को लाना है।

रेवेन्यू बढ़ाने में सहयोग करें कर सलाहकार : सीपी गोयल, चीफ कमिश्नर, सीजीएसटी

टैक्स ला बार एसोसिएशन की राज्य स्तरीय टैक्स कॉन्फ्रेंस में सीजीएसटी के चीफ कमिश्नर सी पी गोयल जी ने उपस्थित कर सलाहकारों को सलाह दी कि सरकार की मंशा के अनुरूप नियमित रूप से कर का भुगतान एवं विवरणी प्रस्तुत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सलाहकार और विभाग दोनों का ही व्यापारी को सहूलियत पहुंचना उद्देश्य है एवं उन्हें मिलजुलकर रेवेन्यू बढ़ाने में सहयोग करना चाहिए क्योंकि देश की प्रगति में कर का योगदान महत्वपूर्ण है।

बिजनेस रहेगा तो टैक्स बढ़ेगा : सीए बिमल जैन

दिल्ली से पधारे सीए बिमल जैन ने बताया कि देश में जीएसटी को लागू हुए 7 वर्ष हो चुके हैं, उसके नियमों में लगातार बदलाव हो रहा है, यही बदलाव कारोबारियों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही जीएसटी अधिकारी भी व्यापारियों को अनावश्यक परेशान करते हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी में कई विसंगतियां हैं जैसे यदि सप्लायर ने जीएसटी नहीं भरा तो विक्रेता को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता। उसे अपनी लायबलटीज जमा करनी होती हैं यदि वह इसमें लेट होता है तो उस पर 18 प्रतिशत का ब्याज देना होता है। जबकि अगर जीएसटी अधिकारी उसका रिफंड समय पर नहीं देता तो विभाग को सिर्फ 6 प्रतिशत ब्याज देना होता है। जीएसटी में रजिस्टेशन कराना व उसे बंद करना काफी कठिन कार्य हो गया है। यदि कोई व्यापारी जीएसटी का रजिस्ट्रेशन कराना चाहता है तो उसे अनवांटेड डाक्यूमेंट के नाम से परेशान किया जाता है, ताकि वह उससे आकर मिले। यह किसलिए होता है यह सब समझते हैं। सरकार को इस पर अंकुश लगाना चाहिए और प्रक्रियाओं का सरलीकरण करना चाहिए। ताकि व्यापारी परेशान न हो व सरकार को लगातार टैक्स की प्राप्ति होती रहे।

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