‘हिन्दी-हिन्दू-हिन्दुस्तान’ का नारा और महाराष्ट्र में हिंदीवासियों पर बंधन क्यों?

रघु ठाकुर का भाजपा सरकार पर हमला- मराठी प्रमाणपत्र की अनिवार्यता से भाषाई विभाजन बढ़ेगा; संदीपनी विद्यालय योजना में स्कूल विलय को बताया अव्यावहारिक

भोपाल। लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के संरक्षक रघु ठाकुर ने महाराष्ट्र में गैर-मराठी वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा का प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में हिंदी भाषियों के साथ भेदभावपूर्ण और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। ठाकुर ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा करीब 3 लाख गैर-मराठी वाहन चालकों, जिनमें ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य वाहन चालक शामिल हैं और जिनमें बड़ी संख्या उत्तर भारत के हिंदीभाषी लोगों की है, के लिए मराठी प्रमाणपत्र अनिवार्य करना उचित नहीं है।

दशकों से महाराष्ट्र में रह रहे लोगों पर नया बंधन क्यों?

रघु ठाकुर ने कहा कि इनमें से बड़ी संख्या में लोग कई दशकों से महाराष्ट्र में रह रहे हैं। उन्हें रोजमर्रा के कामकाज के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान है और वे मराठी समझते भी हैं। इसके बावजूद भाषा के प्रमाणपत्र की अनिवार्यता लागू करना और इसके उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र पहुंचे लोगों को इस तरह की बाध्यता में बांधना सामाजिक और भाषाई सौहार्द के लिए भी ठीक नहीं है। ठाकुर ने इसे उत्तर भारतीयों और हिंदीभाषियों को महाराष्ट्र से बाहर करने की कोशिश बताया।

‘यह शिवसेना की भाषा नीति पर भाजपा के अमल जैसा’

ठाकुर ने महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह नीति उन्हें शिवसेना की पुरानी भाषा नीति जैसी दिखाई देती है। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार उसी तरह की भाषा आधारित नीति को आगे बढ़ा रही है, जिसका लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी विरोध करती है।

उन्होंने भाजपा के राजनीतिक नारे ‘हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान’ का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि देश में एकता और सांस्कृतिक एकजुटता की बात की जाती है तो फिर गैर-मराठी और हिंदीभाषी लोगों के साथ महाराष्ट्र में इस प्रकार का व्यवहार क्यों किया जा रहा है।

‘भाषा के नाम पर देश को बांटने की मानसिकता खतरनाक’

ठाकुर ने कहा कि भारत की ताकत उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता में है। अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लोगों को रोजगार और व्यवसाय के लिए देश के किसी भी हिस्से में जाने का अधिकार है। उनके अनुसार किसी व्यक्ति की मातृभाषा अलग होने के कारण उसके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिंदीभाषियों को महाराष्ट्र से बाहर करने जैसी मानसिकता से न केवल हिंदुओं के बीच विभाजन पैदा होगा, बल्कि इससे हिन्दुस्तान की एकता और सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ेगा।

भारतीय भाषाओं की रक्षा के लिए व्यापक मोर्चे की तैयारी

रघु ठाकुर ने कहा कि वे इस मुद्दे पर देश के अन्य राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ-साथ हिंदीभाषी राज्यों के क्षेत्रीय दलों के नेताओं से भी संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर नेताओं को पत्र लिखकर भारतीय भाषाओं की रक्षा और भाषाई सद्भाव के लिए व्यापक मोर्चा बनाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।

उनका कहना है कि यह केवल हिंदीभाषियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की सभी भारतीय भाषाओं और उनके बोलने वालों के सम्मान से जुड़ा विषय है।

संदीपनी विद्यालय योजना पर भी सवाल, ग्रामीण स्कूलों के विलय का विरोध

मध्यप्रदेश की शिक्षा नीति को लेकर भी रघु ठाकुर ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रदेश में प्रस्तावित संदीपनी विद्यालयों के आसपास के क्षेत्र में आने वाले सरकारी स्कूलों के विलय की योजना को मूलतः त्रुटिपूर्ण और अव्यावहारिक बताया।

10-12 किमी दूर कैसे पहुंचेंगे छोटे बच्चे?

ठाकुर ने कहा कि संदीपनी विद्यालय के आसपास करीब 12 किलोमीटर के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों के विलय का विचार व्यावहारिक नहीं है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के छोटे बच्चों के लिए इतनी दूरी तय कर स्कूल पहुंचना मुश्किल होगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गांव के प्राथमिक और मिडिल स्कूल बंद या विलय कर दिए जाते हैं तो 10 से 12 किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए छोटे बच्चे कैसे जाएंगे? उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा और उनकी शिक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई।

‘नए संदीपनी विद्यालय खोलें, लेकिन गांव के स्कूल न मिलाएं’

रघु ठाकुर ने मुख्यमंत्री से अपील की कि प्रदेश में नए संदीपनी विद्यालय खोलने की योजना पर उनकी पार्टी को आपत्ति नहीं है। बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए नए विद्यालय खोलने का स्वागत किया जाएगा, लेकिन इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों के मौजूदा सरकारी स्कूलों का किसी दूसरे विद्यालय में विलय नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल बच्चों की पहुंच के भीतर होना जरूरी है। स्कूलों को दूर करने से विशेष रूप से गरीब परिवारों, छोटे बच्चों और छात्राओं की शिक्षा प्रभावित होने की आशंका है।

‘ग्रामीण स्कूलों के विलय के खिलाफ आंदोलन करेगी पार्टी’

ठाकुर ने कहा कि लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी संदीपनी विद्यालयों के नाम पर ग्रामीण सरकारी स्कूलों के विलय का विरोध करेगी। पार्टी ने मध्यप्रदेश इकाई और जिला इकाइयों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने बताया कि पार्टी कार्यकर्ता तहसील और जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे तथा प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपेंगे। पार्टी का कहना है कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए विद्यालय खोलने चाहिए, लेकिन पहले से संचालित ग्रामीण स्कूलों को बंद या विलय करने के बजाय उन्हें बेहतर संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

दो मुद्दों पर सरकार से पुनर्विचार की अपील

रघु ठाकुर ने महाराष्ट्र की भाषा नीति और मध्यप्रदेश की स्कूल व्यवस्था को लेकर सरकारों से पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव और शिक्षा के नाम पर बच्चों से स्कूल की दूरी बढ़ाना, दोनों ही फैसलों के दूरगामी सामाजिक प्रभाव हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारों को ऐसे निर्णय लेने चाहिए, जिनसे सामाजिक एकता मजबूत हो और आम नागरिक, विशेषकर गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों के लिए रोजगार व शिक्षा के अवसर आसान हों।

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