रेरा सुधारों में बायर्स की सुरक्षा और प्रोजेक्ट की गति का संतुलन जरूरी: क्रेडाई

क्रेडाई भोपाल ने नए रेरा चेयरमैन शैलेंद्र सिंह को सौंपा 6-बिंदु प्रतिवेदन; प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, बैंक अकाउंट से निकासी, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और क्वार्टरली रिपोर्टिंग में बदलाव की मांग

पुराने प्रक्रियागत मुद्दों के समाधान की मांग

विवेक झा, भोपाल, 21 सितंबर। मध्यप्रदेश रेरा में सुधारों को लेकर क्रेडाई भोपाल ने बायर्स के हितों की सुरक्षा और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की समय पर प्रगति के बीच संतुलन बनाने की जरूरत बताई है। क्रेडाई भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को अध्यक्ष मनोज मीक के नेतृत्व में नए रेरा चेयरमैन शैलेंद्र सिंह से मुलाकात कर उन्हें पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं और रेरा कम्प्लायंस से जुड़ी वर्षों पुरानी व्यावहारिक कठिनाइयों एवं प्रक्रियागत विसंगतियों को लेकर 6-बिंदु प्रतिवेदन सौंपा।

क्रेडाई ने कहा कि उसकी मांग नियमों में ढील देने की नहीं, बल्कि रेरा एक्ट के अनुरूप स्पष्ट, समयबद्ध, पारदर्शी और व्यावहारिक व्यवस्था बनाने की है।

‘कमाल का भोपाल’ की पुस्तकें और राजा भोज की प्रतिमा भेंट

मुलाकात के दौरान ‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान के तहत रेरा चेयरमैन को भोपाल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विशिष्टताओं पर आधारित पुस्तकें भेंट की गईं। इसके साथ ही विद्वान राजा भोज द्वारा रचित नगर नियोजन से संबंधित ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ और राजा भोज की प्रतिमा भी भेंट की गई।

क्रेडाई के अनुसार, रेरा चेयरमैन ने राजधानी से संबंधित इस बौद्धिक संपदा की सराहना की।

प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन की वैलिडिटी बदलने का प्रस्ताव

क्रेडाई के 6 प्रमुख सुधार प्रस्तावों में प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन की वैलिडिटी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने मांग की कि रेरा प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन की वैधता बिल्डिंग परमिशन की अवधि के बजाय प्रमोटर द्वारा घोषित प्रोजेक्ट कम्प्लीशन अवधि के अनुरूप होनी चाहिए।

क्रेडाई का कहना है कि इससे प्रोजेक्ट की वास्तविक समयसीमा और रेरा रजिस्ट्रेशन की वैधता के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा।

सेपरेट बैंक अकाउंट के सीए सर्टिफिकेट में बदलाव की मांग

प्रतिवेदन में सेपरेट बैंक अकाउंट से राशि निकालने के लिए आवश्यक सीए सर्टिफिकेट की गणना व्यवस्था को भी रेरा एक्ट और अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था के अनुरूप करने की मांग की गई।

इसके साथ ही प्रोजेक्ट कॉस्ट में फाइनेंस पर ब्याज, बैंक चार्जेस, ऑन-साइट खर्च, डेवलपमेंट वर्क्स, सेवाओं और अन्य प्रत्यक्ष निर्माण लागत को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।

एनफोर्समेंट ऑफिसर की शक्तियां स्पष्ट करने की मांग

क्रेडाई ने एनफोर्समेंट ऑफिसर की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को एक्ट एवं नियमों में निर्धारित सीमा तक स्पष्ट करने का मुद्दा भी उठाया।

प्रतिवेदन में कहा गया कि शिकायतों की सुनवाई और निर्णय से संबंधित अधिकारों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर प्रभावित पक्षों के अपील के अधिकार के इस्तेमाल में व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। संगठन ने अधिकारों और प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है।

30 दिन में रजिस्ट्रेशन, लेकिन प्रक्रिया महीनों तक लंबित

क्रेडाई ने रेरा एक्ट में प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन आवेदन पर 30 दिनों में निर्णय की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यवहार में कई मामलों में बार-बार कम्प्लायंस मांगे जाने के कारण प्रक्रिया कई महीनों तक लंबित हो जाती है।

संगठन ने इसके लिए स्पष्ट चेकलिस्ट, समयबद्ध ऑनलाइन स्क्रूटनी और पारदर्शी डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया है। इससे आवेदकों को अपने आवेदन की स्थिति और लंबित आपत्तियों की जानकारी स्पष्ट रूप से मिल सकेगी।

पूरी हो चुकी परियोजनाओं को रजिस्ट्रेशन से छूट का सुझाव

क्रेडाई ने पूरी हो चुकी परियोजनाओं के संबंध में राजस्थान में लागू व्यवस्था का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि जिन प्रोजेक्ट्स को बिक्री, मार्केटिंग या बुकिंग शुरू होने से पहले सक्षम अथॉरिटी से कम्प्लीशन अथवा ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त हो चुका है, उन्हें निर्धारित डिक्लेरेशन और जांच के बाद रेरा रजिस्ट्रेशन से छूट देने की व्यवस्था की जा सकती है।

संगठन ने इसे पूरी हो चुकी परियोजनाओं के लिए प्रक्रियागत स्पष्टता से जोड़ते हुए व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया।

प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद क्वार्टरली रिपोर्टिंग पर सवाल

क्रेडाई ने सक्षम अधिकारी से प्राप्त डेवलपमेंट कम्प्लीशन को पोर्टल पर अपलोड करने के बाद भी क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करने की बाध्यता का मुद्दा उठाया।

संगठन ने मांग की कि कम्प्लीशन अप्रूवल की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और समयसीमा स्पष्ट की जाए। साथ ही, प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद अनिश्चित अवधि तक तिमाही प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बाध्यता समाप्त की जाए।

‘बायर्स के हितों की सुरक्षा रेरा का मूल उद्देश्य’

क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि रेरा का मूल उद्देश्य प्रॉपर्टी बायर्स के हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार, जटिल, अस्पष्ट या विलंबित कम्प्लायंस से डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स की गति और निवेश प्रभावित हो सकता है और इसका असर अंततः होम बायर्स पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि बायर्स को समय पर प्रोजेक्ट मिलना और डेवलपर्स के लिए स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था—दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर चलना जरूरी है। क्रेडाई की मांग नियमों में ढील की नहीं, बल्कि एक्ट के अनुरूप स्पष्ट, समयबद्ध और समान रूप से लागू होने वाली सरल व्यवस्था की है।

रेरा चेयरमैन ने समाधान का दिया भरोसा

रेरा चेयरमैन शैलेंद्र सिंह ने क्रेडाई के प्रतिनिधिमंडल द्वारा रखे गए सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना। प्रेस नोट के अनुसार, उन्होंने बताया कि प्राधिकरण ने कई रिफॉर्म्स पर काम शुरू कर दिया है।

उन्होंने कुछ विषयों पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि संबंधित मामलों के परीक्षण और समाधान की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। चेयरमैन ने कानून-सम्मत तरीके से व्यावहारिक कठिनाइयों के त्वरित समाधान का भरोसा भी दिया।

तकनीकी सदस्य से भी की मुलाकात

प्रतिनिधिमंडल ने रेरा के तकनीकी सदस्य संजय गुप्ता से भी मुलाकात कर प्रतिवेदन के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी। क्रेडाई के अनुसार, उन्होंने भी प्रतिनिधिमंडल की बातों को सकारात्मक दृष्टिकोण से सुना और व्यावहारिक समाधान का आश्वासन दिया।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल

प्रतिनिधिमंडल में क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक के साथ विपिन गोयल, सुनील गुप्ता, अजय शर्मा, समीर सबरवाल, दिनेश गोयल, जयंत भंडारी, आकाश क्षिंगन तथा क्रेडाई ग्वालियर के अध्यक्ष सुदर्शन झंवर उपस्थित रहे।

 क्रेडाई ने उम्मीद जताई कि प्रतिवेदन में उठाए गए प्रक्रियागत मुद्दों पर समयबद्ध कार्रवाई होने से रेरा अनुपालन व्यवस्था अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बन सकेगी तथा इसका लाभ रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को मिल सकता है।

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