किराया और ट्रेनों की श्रेणी का निर्धारण रेलवे का नीतिगत फैसला है, उस पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता : रेलवे

बिलासपुर

पैसेंजर ट्रेन की जगह पर ज्यादा किराया लेकर स्पेशल ट्रेन चलाने और रियायती टिकट बंद करने के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका पर रेलवे ने अपना जवाब पेश करते हुए कोर्ट को बताया कि किराया और ट्रेनों की श्रेणी का निर्धारण रेलवे का नीतिगत फैसला है, उस पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता इस मामले में निर्णय रेलवे बोर्ड को लेना है।  हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर देने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया।

हाई कोर्ट में अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई है कि कोविड-19 के बाद पैसेंजर ट्रेनों को निरस्त कर उन्हें मार्गों पर स्पेशल ट्रेन चला कर ज्यादा किराया वसूल करने साथ ही 39 श्रेणी के अंतर्गत आने वाले यात्रियों को टिकट पर रियायत बंद करने के खिलाफ यह याचिका है। इसमें कहा गया कि केवल विकलांग और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर किराए में सभी तरह की छूट बंद कर दी गई है। सीनियर सिटिजन कंसेशन भी इनमें शामिल है । रेलवे गरीब और आम यात्रियों पर अनावश्यक बोझ डालकर स्पेशल ट्रेन चला रही है जो पैसेंजर ट्रेनों के ही मार्ग पर चल रही है और उन्हीं स्टॉपेज पर रूकती है । इस दौरान मुंबई और दिल्ली में लोकल ट्रेन कोविड-19 के पहले की तरह शुरू की जा चुकी है।

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद रेलवे से जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। रेलवे ने अपने जवाब में कहा है कि किराया और ट्रेनों की श्रेणी का निर्धारण रेलवे का नीतिगत फैसला है, उस पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अधिवक्ता श्रीवास्तव की ओर से कहा गया कि यह जनहित याचिका रेलवे की पॉलिसी के खिलाफ नहीं बल्कि पॉलिसी को लागू करने के लिए है, जिसमें रियायत और पैसेंजर ट्रेनों को चलाना शामिल है।

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