धनतेरस 2026: घर पर कैसे करें भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त और विधि

Dhanteras  2026 : धनतेरस के पावन पर्व पर मुख्य रूप से भगवान धन्वतंरि, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन धन्वतंरि भगवान समुद्र मंथन के दौरान हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता भी माना जाता है। धनतेरस को धनत्रयोदशी या धन्वतंरि जयंती भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान धन्वतंरि की पूजा करने से अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की प्राप्ति होती है। मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में आर्थिक संपन्नता आती है। भगवान कुबेर की पूजा करने से धन-धान्य और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है। यम के नाम से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन सोना-चांदी, नए बर्तन या नई चीजों को खरीदने से धन में तेरह गुना वृद्धि होती है। जानें धनतेरस के दिन कैसे पूजा की जाती है और खरीदारी और पूजन का शुभ मुहूर्त।

घर पर धनतेरस की कैसे पूजा करें?
कथावाचक प्रदीप मिश्रा के अनुसार, दीवाली के दिन पूजा करने के लिए मुहूर्त देखना चाहिए लेकिन धनतेरस पूजन के लिए मुहूर्त का विचार करना अनिवार्य नहीं होता है। धनतेरस पूजा के लिए अगर जमीन या फर्श पक्की है तो इसे कपड़े से साफ कर लें। अगर मकान कच्चा है तो वहां पर गोबर से लीप लें। यह उस जगह पर करें जहां पूजास्थल है या पूजा करते हैं। पूजा स्थान को साफ करने के बाद आटे से चौक पूरे। चौकी पर एक साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसमें माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की फोटो विराजित करें। अब चौकी के सामने जल का एक कलश रखें और उसके ऊपर गेहूं या चावल से भरा पात्र रखें। अब एक थाली में रोली से स्वास्तिक बनाएं और उसमें चांदी का सिक्का रखें।

अगर चांदी का सिक्का नहीं है तो एक रुपए का सिक्का भी रख सकते हैं। अब थाली में मौली (कलावा), हल्दी और सुपारी रखें। अब सात लंबी बाती वाले घी के दीपक जलाएं। यह दीये आटे के होना शुभ माना जाता है। पहला दीपक लक्ष्मी जी के बाएं ओर रखें। अब पूजन सामग्री अक्षत, मिठाई, सुपारी, पान, कमल गट्टा, धूप, दीप, गुड़ और कमल का फूल, मेहंदी, वस्त्र आदि देवी-देवताओं को समर्पित करें। कमल गट्टा, रोली, सिक्का, अक्षत और पुष्प को हाथ में लेकर मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान गणेश का ध्यान लगाते हुए अपने मन की कामना कहें। इसके बाद अंत में थाली में जो दीये जलाए थे उनसे मां लक्ष्मी की आरती उतारें। आरती उतारने के तुरंत बाद आरती नहीं लें दोनों हाथों को माता लक्ष्मी और कुबेर देवता के सामने पसार कर धन-धान्य में वृद्धि की कामना करें। मां लक्ष्मी से भगवान नारायण, भगवान कुबेर और गणेश जी के घर आगमन की प्रार्थना करें। अब आरती लें और परिवार के सदस्यों को भी दें।

धनतेरस पूजा मंत्र:
धनतेरस के दिन पूजा के समय भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी के मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।

• कुबेर देव का मंत्र: ऊं श्रीं कुबेराय नमः या ऊं कुबेराय नमः
• माता लक्ष्मी का मंत्र: ऊं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त:
धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह 11:06 बजे से लेकर 7 नवंबर को सुबह 10:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शुभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 01:27 बजे तक रहेगा। शाम 04:11 बजे से शाम 05:33 बजे तक का समय भी खरीदारी के लिए उत्तम रहने वाला है।

 

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