GSTAT में अपील प्रक्रिया होगी और आसान, बार प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से की विस्तृत चर्चा

भोपाल में GST अपीलीय न्यायाधिकरण के उपाध्यक्ष और न्यायिक सदस्य से मुलाकात, पोर्टल संबंधी समस्याओं, हेल्प डेस्क और अपील प्रक्रिया पर हुआ मंथन

विवेक झा, भोपाल। वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) में अपील प्रक्रिया को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए बार एट GST ट्रिब्यूनल, भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने GSTAT, मध्यप्रदेश के माननीय उपाध्यक्ष जस्टिस रूपेश चंद्र वर्श्नेय तथा सदस्य (न्यायिक) उपेंद्र कुमार सिंह से शिष्टाचार भेंट की। बैठक के दौरान अपीलकर्ताओं और कर सलाहकारों को अपील दायर करने में आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा उनके समाधान के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में GSTAT के डिप्टी रजिस्ट्रार विनीत कुमार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार अमित जैन एवं न्यायाधिकरण का प्रशासनिक स्टाफ भी उपस्थित रहा।

पोर्टल पर कॉज लिस्ट और आदेश देखने की दी सलाह

बैठक के दौरान सदस्य (न्यायिक) उपेंद्र कुमार सिंह ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि करदाता, अधिवक्ता और कर सलाहकार नियमित रूप से GSTAT पोर्टल का अवलोकन करें तथा यह सुनिश्चित करें कि पोर्टल पर अपलोड की जा रही कॉज लिस्ट (Cause List) और न्यायालयीन आदेश (Orders) आसानी से देखे जा रहे हैं या नहीं।

उन्होंने कहा कि यदि पोर्टल के संचालन या किसी अन्य तकनीकी अथवा प्रक्रियात्मक विषय में कोई कठिनाई आती है तो उसे तत्काल GSTAT के संज्ञान में लाया जाए, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके।

शिकायतों के समाधान के लिए बनाई गई हेल्प डेस्क

सदस्य (न्यायिक) ने बताया कि अपीलकर्ताओं और अधिवक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए GSTAT में विशेष हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। इसके माध्यम से पोर्टल संचालन, दस्तावेजों की अपलोडिंग, अपील दायर करने की प्रक्रिया और अन्य तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण का उद्देश्य करदाताओं और कर पेशेवरों को पारदर्शी एवं सुविधाजनक न्यायिक प्रक्रिया उपलब्ध कराना है।

पावर ऑफ अटॉर्नी सही तरीके से जमा करने पर दिया जोर

माननीय उपाध्यक्ष जस्टिस रूपेश चंद्र वर्श्नेय ने अधिवक्ताओं एवं कर सलाहकारों से अपील की कि वे पावर ऑफ अटॉर्नी अथवा लेटर ऑफ अथॉरिटी जैसे अधिकृत दस्तावेज पूर्ण और त्रुटिरहित तरीके से प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में छोटी-छोटी त्रुटियां भी अपील प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब का कारण बन सकती हैं।

उन्होंने कहा कि प्रारंभ से ही दस्तावेजों को निर्धारित प्रारूप और नियमों के अनुरूप प्रस्तुत करने से अपीलों के शीघ्र पंजीकरण और सुनवाई में सुविधा होगी।

अतिरिक्त समय का लाभ उठाने की अपील

माननीय उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा अपील दायर करने के लिए प्रदान की गई अतिरिक्त समय-सीमा का करदाताओं को पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने बताया कि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार जितनी अपीलें अपेक्षित थीं, उनकी तुलना में अब तक काफी कम अपीलें दायर हुई हैं।

उन्होंने कर सलाहकारों और अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे पात्र करदाताओं को समय-सीमा के भीतर अपील दायर करने के लिए जागरूक करें, ताकि वे अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित न रहें।

बार और न्यायाधिकरण के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

बैठक के दौरान बार प्रतिनिधिमंडल ने अपील दाखिल करने की प्रक्रिया में आने वाली विभिन्न व्यावहारिक कठिनाइयों, तकनीकी समस्याओं और प्रक्रियात्मक मुद्दों से अधिकारियों को अवगत कराया। दोनों पक्षों ने न्यायाधिकरण और बार के बीच निरंतर संवाद बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की, ताकि भविष्य में उत्पन्न होने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके।

बार एट GST ट्रिब्यूनल, भोपाल के अध्यक्ष अमित जैन व प्रतिनिधिमंडल ने न्यायाधिकरण के अधिकारियों द्वारा दिए गए सहयोग और सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इससे करदाताओं, अधिवक्ताओं और कर सलाहकारों को बड़ी सुविधा मिलेगी।


बैठक से निकले प्रमुख बिंदु

  • GSTAT पोर्टल पर कॉज लिस्ट और आदेश नियमित रूप से देखें।
  • पोर्टल या अपील प्रक्रिया में किसी भी समस्या की सूचना तत्काल हेल्प डेस्क को दें।
  • पावर ऑफ अटॉर्नी और लेटर ऑफ अथॉरिटी सही एवं पूर्ण रूप से जमा करें।
  • अपील दायर करने के लिए मिली अतिरिक्त समय-सीमा का पूरा लाभ उठाएं।
  • करदाताओं को समय-सीमा के भीतर अपील दाखिल करने के लिए जागरूक किया जाए।
  • बार और GSTAT के बीच नियमित संवाद से अपील प्रक्रिया और अधिक सुगम होगी।

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