फेक न्यूज के जमाने में हम नेक न्यूज वाले बनें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि फेक न्यूज़ के जमाने में हम नेक न्यूज़ वाले बने। पत्रकारिता में सत्ता का विरोध ठीक है, लेकिन देश विरोध नहीं होना चाहिए। हमारे लिए न्यूज़ से ऊपर नेशन हो, देश हित को हम सर्वोपरि रखें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सत्रारंभ – अभ्युदय 2026 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मां सरस्वती, भारत माता और दादा माखनलाल चतुर्वेदी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के प्रकाशनों क्रमशः "दो सदी साक्षी", विकल्प लैब जरनल "मैं न्यूज़ रूम" और भारत की टेंपल इकोनॉमी पर केंद्रित जरनल "इंडियन कलाईडोस्कोप" का विमोचन किया तथा विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों सु परिधि पुजारी, सु तमन्ना लश्कर और सु शिविका गुप्ता का उनकी उपलब्धियां के लिए सम्मान कर उन्हें अलंकरण प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी "100 साल से 100 सुर्खियां" का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आगमन पर कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने डॉ. यादव को विश्वविद्यालय की परंपरा अनुसार पुस्तकें "माखन के लाल" और "कार्टून कथा" तथा अंग वस्त्रम भेंट कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध अभिनेता, लेखक और साहित्यकार पीयूष मिश्रा और देशभर से आए विश्वविद्यालय के 50 पूर्व विद्यार्थी विशेष रूप से उपस्थित थे।
पत्रकारिता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने देशभर में अपनी साख बनाई हैं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय आज देश का उत्कृष्ट पत्रकारिता व संचार संस्थान बन चुका है। यह पत्रकारों के लिए एक पवित्र मंदिर की तरह है। यहां के विद्यार्थियों ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और आधुनिक दौर की डिजिटल पत्रकारिता के जरिए देशभर में अपनी साख और धाक बनाई है। आजादी के दौर में दादा पंडित माखनलाल चतुर्वेदी, कवि प्रदीप को उनकी रचनाओं के लिए अंग्रेजों ने सजा सुनाई थी। हमारे साहित्यकार और पत्रकार उस दौर में निडरता के साथ सच्चाई के साथ खड़े थे और आज भी वे उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारिता विश्वविद्यालय के विकास के लिए संकल्पबद्ध है। कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी और समस्त स्टॉफ ने विश्वविद्यालय की विरासत को प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया है।
आपातकाल के दौर में समाचार पत्रों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के स्वाधीनता आंदोलन में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर ने पत्रकार की भूमिका में महत्वूपर्ण योगदान दिया। वे पढ़ाई के लिए लंदन गए और 1857 के संघर्ष के सही स्वरूप को सबके सामने लाते हुए बताया कि यह मात्र सैनिक विद्रोह नहीं अपितु स्वतंत्रता के लिए समर था। दो बार कालापानी की सजा मिलने पर भी उन्होंने पत्रकारिता और लेखन कार्य को जारी रखा। उन्होंने हिंदी भाषा को समाज में प्रतिष्ठित स्थान दिलवाने के लिए आंदोलन चलाया। देश में हिंदी पत्रकारिता के स्वनामधन्य पत्रकारों की लंबी परंपरा रही है। इसके बाद आपातकाल के दौर में समाचार पत्रों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्कालीन सत्ता का विरोध किया और अपनी असहमति स्वरूप समाचार पत्रों के संपादकीय पृष्ठ खाली छोड़ दिए गए।
भारत में प्राचीन काल से ही संप्रेषण की सशक्त परंपरा रही है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही संप्रेषण की सशक्त परंपरा रही है। महर्षि वाल्मीकि ने लव-कुश को भगवान राम की कथा से परिचित कराया और बाद में दोनों बालकों ने अयोध्या पहुंचकर राम के दरबार में राम कथा का सस्वर गायन किया। महर्षि वाल्मीकि भगवान राम के अतीत के स्वर्णिम पक्ष को लव और कुश के माध्यम से समाज के सामने लाए, यह कुशल संप्रेषण का ही प्रभावी तरीका था। इसी प्रकार भगवान कृष्ण के काल में देवऋषि नारद जी ने सूचनाओं के आदान-प्रदान से एक पत्रकार के रूप में भूमिका निभाई। भगवान कृष्ण ने मध्यप्रदेश की धरती पर 64 कला और 14 विद्याएं सीखकर हम सभी को गौरवान्वित किया है।
भगवान कृष्ण और आचार्य आदि शंकर, दोनों की शिक्षा मध्यप्रदेश की धरती पर हुई
कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी आज देशभर के शीर्ष संस्थानों में नाम रोशन कर रहे हैं। भगवान कृष्ण और आचार्य आदि शंकर, दोनों की शिक्षा मध्यप्रदेश की धरती पर हुई है। विद्यार्थी नकारात्मक विचारों को कभी स्वयं पर हावी न होने दें और सकारात्मक कार्यों के माध्यम से देश को आगे बढ़ाएं। सुप्रसिद्ध अभिनेता, लेखक और साहित्यकार पीयूष मिश्रा ने कहा कि भोपाल की सुंदरता यहां की आत्मीय बोली, लोगों का व्यवहार, खानपान और परंपराएं सभी को सहज ही आकर्षित करती हैं। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. पी. शशिकला ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. विजय अग्रवाल, हेमंत मुक्तिबोध सहित विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापक, अतिथि विद्वान, नवागत एवं पूर्व विद्यार्थी और समस्त अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।




